BHAKTI

तिलक लगाते समय कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये बड़ी भूल? जानें सही उंगली, दिशा और मंत्रों का पूरा विज्ञान

कोरबा (ट्रैक सिटी) सनातन परंपरा में माथे पर तिलक लगाना केवल एक धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि एक पूर्ण विज्ञान है। किसी भी शुभ कार्य, पूजा-पाठ या त्योहार पर तिलक लगाने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। हालांकि, ज्योतिष और शास्त्रों के अनुसार, तिलक लगाने के लिए आप किस अंगुली (Finger) और किस सामग्री (जैसे चंदन, कुमकुम या भस्म) का उपयोग कर रहे हैं, इसका आपके जीवन, करियर और स्वास्थ्य पर सीधा असर पड़ता है।
गलत अंगुली से तिलक लगाना शुभ कार्यों में बाधा ला सकता है, वहीं सही नियम आपको हर कार्य में विजय दिला सकता है। आइए विस्तार से जानते हैं इसके नियम।

📌 अंगुलियों का खेल: किस अंगुली से तिलक लगाने का क्या होता है असर?
शास्त्रों में हाथ की हर अंगुली का संबंध किसी न किसी विशेष ऊर्जा और ग्रह से बताया गया है:
  • अनामिका (Ring Finger) — सुख, समृद्धि और शांति:
    भगवान की मूर्तियों और देव चित्रों को हमेशा अनामिका अंगुली से तिलक लगाना चाहिए। इसका संबंध सूर्य ग्रह से है। इससे मानसिक शांति मिलती है और घर में समृद्धि आती है।
  • अंगूठा (Thumb) — विजय, शक्ति और आरोग्य:
    अतिथियों, भाइयों या किसी शुभ यात्रा पर जाने वाले व्यक्ति को हमेशा अंगूठे से तिलक करें। इसका संबंध शुक्र ग्रह से है, जो यश और अच्छी सेहत प्रदान करता है।
  • मध्यमा (Middle Finger) — लंबी आयु और सफलता:
      • अगर आप खुद को तिलक लगा रहे हैं, तो हमेशा मध्यमा (बीच वाली) अंगुली का उपयोग करें। इसे शास्त्रों में ‘आयुष्मती’ कहा गया है। इसका संबंध शनि ग्रह से है, जो जीवन में स्थिरता लाता है।
      • तर्जनी (Index Finger) — केवल पितृ कार्य के लिए:
        सामान्य या मांगलिक कार्यों में इस अंगुली का प्रयोग पूरी तरह वर्जित है। इसका उपयोग केवल श्राद्ध या पितृ शांति के समय मृत पूर्वजों को तिलक लगाने के लिए होता है। जीवित व्यक्ति को इससे तिलक लगाने से कार्यों में रुकावट आती है।
      • 🔮 चंदन, कुमकुम या भस्म? सामग्री चुनने का सही नियम:
      • तिलक में इस्तेमाल होने वाली हर सामग्री का अपना एक विशेष आध्यात्मिक महत्व है:
    1. चंदन (Chandan) — विष्णु कृपा और मानसिक शांति:
      भगवान विष्णु और कृष्ण जी की पूजा में पीले या सफेद चंदन का तिलक अनामिका अंगुली से लगाया जाता है। यह मन को शांत और एकाग्र रखता है।
    2. कुमकुम या रोली (Kumkum/Roli) — तेज और आत्मविश्वास:
      देवी मां की पूजा और मांगलिक कार्यों में कुमकुम का तिलक अंगूठे या अनामिका से लगाया जाता है। यह व्यक्ति के भीतर छिपे आत्मविश्वास और तेज को जगाता है।
    3. भस्म या विभूति (Bhasma) — वैराग्य और अहंकार का नाश:
      भगवान शिव के उपासक माथे पर भस्म का ‘त्रिपुंड’ (तीन रेखाएं) लगाते हैं। इसके लिए अंगूठे, मध्यमा और अनामिका तीनों अंगुलियों का एक साथ प्रयोग किया जाता है।     
      एक्सपर्ट कमेंट: क्या कहता है विज्ञान?
      “हमारे माथे के ठीक बीचों-बीच ‘आज्ञा चक्र’ (Pineal Grynthi) होता है। जब हम सही अंगुली से इस स्थान पर हल्का दबाव देते हैं, तो शरीर की मुख्य नसें सक्रिय हो जाती हैं। इससे मस्तिष्क में सेरोटोनिन और मेलाटोनिन जैसे हार्मोंस संतुलित होते हैं, जिससे सिरदर्द कम होता है, एकाग्रता बढ़ती है और तनाव से मुक्ति मिलती है।”डॉ. आनंद शर्मा (अध्यात्म और न्यूरो-साइंटिफिक एक्सपर्ट)


      अक्षत (चावल) लगाना क्यों है जरूरी?
      शास्त्रों के अनुसार, तिलक के ऊपर अक्षत (बिना टूटा हुआ चावल) लगाना बेहद शुभ माना जाता है। चावल को शुद्धता का प्रतीक माना जाता है। तिलक के साथ अक्षत लगाने से आसपास की नकारात्मक ऊर्जा दूर रहती है और पूजा का पूरा फल मिलता है।
      प्रमुख तिलकों का विवरण:
      • त्रिपुंड (शैव तिलक): माथे पर भस्म या चंदन से तीन क्षैतिज (लेटी हुई) रेखाएं बनाई जाती हैं। यह भगवान शिव के उपासकों द्वारा लगाया जाता है और यह वैराग्य का प्रतीक है।
      • ऊर्ध्वपुंड (वैष्णव तिलक): यह माथे पर ‘U’ या ‘V’ आकार में खड़ी रेखाओं के रूप में लगाया जाता है, जिसके बीच में अक्सर एक लाल बिंदु या रेखा होती है। यह भगवान विष्णु, कृष्ण और राम के भक्तों (वैष्णव संप्रदाय) की पहचान है।
      • बिंदु या बिंदी (शाक्त तिलक): माथे के बीचों-बीच लाल कुमकुम या रोली से एक गोल बिंदु लगाया जाता है। यह देवी दुर्गा (शक्ति) की उपासना और ऊर्जा का प्रतीक है।
      • तिलक लगाने के लिए सही दिशा (Correct Direction)
        शास्त्रों के अनुसार, तिलक लगाते और लगवाते समय मुख की दिशा का विशेष ध्यान रखना चाहिए:
          • पूर्व दिशा (East): तिलक लगवाते समय आपका मुख हमेशा पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। पूर्व दिशा को ऊर्जा और सूर्य की दिशा माना जाता है। इस दिशा में मुख करके तिलक लगवाने से मानसिक क्षमता, एकाग्रता और मान-सम्मान में वृद्धि होती है।
          • उत्तर दिशा (North): यदि पूर्व दिशा संभव न हो, तो उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। यह दिशा कुबेर और सफलता की दिशा मानी जाती है, जिससे जीवन में समृद्धि आती है।
          • पश्चिम और दक्षिण दिशा वर्जित: सामान्य मांगलिक कार्यों में पश्चिम या दक्षिण दिशा की ओर मुख करके तिलक नहीं लगवाना चाहिए।


        🕉️ तिलक लगाने के चमत्कारी मंत्र (Tilak Mantras)
        तिलक लगाते समय मंत्रों का उच्चारण करने से उसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। आप अपनी सुविधा के अनुसार नीचे दिए गए मंत्रों का जाप कर सकते हैं:
        1. सामान्य तिलक मंत्र (सभी के लिए उपयोगी)
        खुद को या किसी अन्य को तिलक लगाते समय इस सरल मंत्र का जाप करें:
        “केशवानंत गोविंद बाराह पुरुषोत्तम। पुण्यं यशस्यमायुष्यं तिलकं मे प्रसीदतु॥”
        (अर्थ: हे केशव, अनंत, गोविंद और पुरुषोत्तम भगवान! यह तिलक मुझे पुण्य, यश और लंबी आयु प्रदान करे और मुझ पर आपकी कृपा बनी रहे।)
        2. चंदन लगाते समय का मंत्र
        जब माथे पर शीतल चंदन का तिलक लगाया जा रहा हो:
        “चन्दनस्य महत्पुण्यं पवित्रं पापनाशनम्। आपदां हरते नित्यं लक्ष्मीस्तिष्ठति सर्वदा॥”
        (अर्थ: चंदन अत्यंत पुण्यमयी, पवित्र और पापों का नाश करने वाला है। यह सभी आपदाओं को हर लेता है और इससे घर में हमेशा लक्ष्मी जी का वास रहता है।)

        3. भस्म (त्रिपुंड) लगाते समय का मंत्र
        भगवान शिव की आराधना के समय भस्म लगाते समय इस महामंत्र का मानसिक जाप करें:
        “ॐ नमः शिवाय” या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना सबसे उत्तम माना जाता है।

                                              (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं, शास्त्रों और सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं। इसकी पुष्टि लोक मान्यताओं के आधार पर की गई है।)

Editor in chief | Website |  + posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button