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पुलिस अधीक्षक एवं जिला पंचायत सी.ई.ओ. द्वारा बैंक अधिकारी/कर्मचारियों की ली गई मीटिंग

ऑनलाईन फ्रॉड से संबंधित खाताधारक का डिटेल गोपनीय रखने व डिजिटल अरेस्ट साइबर फ्रॉड के संबंध में जानकारी दिया गया

 

ट्रैक सिटी। दिनांक 27.12.2024 को पुलिस अधीक्षक मुंगेली भोजराम पटेल (भा.पु.से.) एवं जिला पंचायत सी.ई.ओ. प्रभाकर पाण्डेय द्वारा मनियारी सभा कक्ष कलेक्ट्रेट मुंगेली में जिला स्तर पर सभी बैंक जिसमें भारतीय स्टेट बैंक, ग्रामीण बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, एचडीएफसी, एक्सिस, जिला सहकारी व अन्य बैंको का शाखा प्रबंधकों व राजस्व विभाग के अधिकारियों का बैठक लिया गया जिसमें शासन के विभिन्न योजनाओं का आम जनता को शीघ्र लाभ दिलाने व माईक्रो फाईनेंस कंपनी के संबंध में जानकारी चाही गयी एवं साइबर फ्रॉड के संबंध में दिशा-निर्देश दिया गया।

मीटिंग के दौरान पुलिस अधीक्षक मुंगेली भोजराम पटेल (भा.पु.से.) द्वारा सभी बैंको के शाखा प्रबंधकों को निर्देशित करते हुये सर्वप्रथम साइबर फ्रॉड से शिकार हुये पीड़ित व्यक्तियों के बैंक आने पर तत्काल साइबर हेल्पलाईन नं. 1930 पर कॉल करने की सलाह देने एवं कॉल नहीं लगने पर NCCRP पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने या नजदीकी थाना में रिपोर्ट दर्ज कराने की सलाह दी गयी व यदि किसी व्यक्ति का बैंक अकाउंट ब्लॉक/फीज है तो पुलिस द्वारा जारी N.O.C. के माध्यम से अनब्लॉक करने तथा पीड़ितों के खाता में होल्ड रकम को माननीय न्यायालय से समन्वय कर शीघ्र ही रकम को पीड़ित के खाते में वापस ट्रांसफर करने निर्देशित किया गया साथ ही पुलिस विभाग द्वारा जारी साइबर सुरक्षा के उपाय, साइबर हेल्पलाईन नंबर 1930 की जानकारी बैंकों में चस्पा करने कहा गया।

सभी बैंको को माईक्रो फाईनेस कंपनी का जिला स्तर पर ऑडिट कर जानकारी व समूहों द्वारा लिये लोन की सूची तथा बैंको की सुरक्षा हेतु सीसीटीवी कैमरे की संख्या, उसके रेंज एवं बैंको में कार्यरत सुरक्षा गार्डों का नाम पता मोबाईल नं. की जानकारी चाही गयी है। बैंको द्वारा ग्रामों में कैम्प लगाकर बैंक से संबंधित सुरक्षा उपायों की जानकारी ग्रामीणों तक पहुंचाने व पार्किंग व्यवस्था बनाने हेतु निर्देशित किया गया व खाताधारक व्यक्ति अचानक से ज्यादा रकम ट्रांसफर या विड्रॉल कर रहा है तो उसकी मनः स्थिति को जानने का प्रयास करें कि कही वह साइबर फ्रॉड का शिकार होकर ट्रांजेक्शन तो नहीं कर रहा है, प्रार्थी से सीधे बात कर डिजिटल अरेस्ट या अन्य धोखाधडी के विषय में चर्चा करके उसे ठगी के शिकार होने से बचाया जा सकता है।

क्या है डिजिटल अरेस्ट – डिजिटल अरेस्ट ब्लैकमेल करने का एक एडवांस तारीका है, डिजिटल अरेस्ट में ऑनलाईन धमकी देकर विडियो कॉलिंग के माध्यम से ब्लैकमेलिंग कर पैसे की मांग करते है व साइबर ठग नकली पुलिस अधिकारी या इनकम टैक्स विभाग से बात कर रहे हैं ये कहते है कि आपके पैनकार्ड, आधारकार्ड का इस्तेमाल करते हुये अवैध सामानों की खरीदी की गयी है यह मनी लॉड्रिंग की गई है या फिर यह दावा करते हैं कि कस्टम विभाग से बोल रहे है आपके नाम से कोई पार्सल आया है जिसमें ड्रग्स या प्रतिबंधित चीजे है। इसके बाद लगातार विडियो कॉल ऑडियो कॉल कर सामने में बैठे रहने बोलते है और जमानत के नाम पर लोगों से पैसे की मांग किया जाता है इस तरह अपने ही घर पर ऑनलाईन कैद होकर रह जाते है, इसे डिजिटल अरेस्ट कहा जाता है।

डिजिटल अरेस्ट से बचने के उपाय – डिजिटल अरेस्ट शुरूआत से आपके डर के साथ होती है, ऐसे में यदि आपके पास इस तरह के धमकी वाले फोन कॉल आते हैं तो आपको डरने की जरूरत नहीं है, डरे नहीं बल्कि डटकर सामना करना चाहिए व आये हुये कॉल नंबर को ब्लॉक कर देना चाहिये और पुलिस में तत्काल शिकायत करना चाहिए पैसा बिल्कुल भी न भेजें।

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