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मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री की पहल से आदिवासी अंचलों में बढ़ रहा स्वास्थ्य सुविधा

ट्रैक सिटी/ स्वास्थ्य हर व्यक्ति के लिए कितना आवश्यक है, यह एक आम आदमी ही बता सकता है। एक स्वस्थ समाज ही प्रगति और विकास का आधार बन सकता है। 12 दिसंबर को मनाया जाने वाला सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज दिवस इसी अधिकार को वास्तविकता में बदलने की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसका उद्देश्य है कि प्रत्येक नागरिक को बिना किसी आर्थिक या सामाजिक भेदभाव के उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं सुलभ हो। स्वास्थ्य सेवाएं एक विशेषाधिकार नहीं, बल्कि हर व्यक्ति का हक भी हैं। छत्तीसगढ़ जैसे राज्य जहाँ जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा आदिवासी समाज है, जो दूरस्थ क्षेत्रों में निवास करता है, वहां स्वास्थ्य सेवाओं की चुनौतियाँ और भी अधिक रहता हैं। एमसीबी जिले के भरतपुर, खड़गवां और मनेंद्रगढ़ ब्लॉकों के आदिवासी अंचलों में स्वास्थ्य सुविधाएं अब धीरे-धीरे सुदृढ़ हो रही हैं। यहाँ प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाएं दी जा रही हैं। अभी हाल ही मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने अपने हाथों से चिरमिरी में जिला अस्पताल का लोकार्पण किया है । इसके साथ ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, जनकपुर को 100 बिस्तर अस्पताल में तब्दील करने की घोषणा किया गया है। इससे पहले जिले में मोबाइल मेडिकल यूनिट्स और हाट बाजार क्लिनिक जैसे योजनाओं ने गाँव-गाँव तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुँचाने का कार्य कर रहा है। गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं और बच्चों के लिए विशेष कार्यक्रमों के साथ-साथ मलेरिया और एनीमिया उन्मूलन के प्रयासों ने इन क्षेत्रों में स्वास्थ्य की दिशा में सकारात्मक परिवर्तन लाया है।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे है। जैसे मुख्यमंत्री हाट बाजार क्लिनिक योजना, आयुष्मान भारत योजना और मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना की पहल से राज्य के गरीब और पिछड़े वर्ग तक स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ पहुँचाया जा रहा है। आदिवासी बैगा जनजातीय इलाकों में स्वास्थ्य केंद्रों का विस्तार, आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता और चिकित्सकीय स्टाफ की नियुक्ति जिले की स्वास्थ्य संरचना को मजबूत कर रहा हैं। इसके बावजूद अभी भी कई चुनौतियां मौजूद हैं। कई ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में अभी भी डॉक्टरों और विशेषज्ञों की कमी है। पहुंचहीन ग्रामीण इलाको में शुद्ध पेयजल और स्वच्छता के अभाव के चलते जलजनित बीमारियाँ एक बड़ी समस्या सरकार के सामने बनी हुई हैं। इन दुरूस्त क्षेत्रों में कार्य करने के लिए शासन प्रशासन को सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है। इन दुरूस्त ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूलों और पंचायतों के माध्यम से स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम को और अधिक प्रभावी तरीके से प्रचार प्रसार करने की आवस्यता है। यह सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज दिवस हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या हम अपने नागरिकों को उनके स्वास्थ्य का अधिकार दिला पा रहे हैं। छत्तीसगढ़ में हो रहे प्रयास सराहनीय हैं, लेकिन एक स्थायी बदलाव के लिए और अधिक ठोस कार्य करने की आवश्यक हैं। स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ, किफायती और प्रभावी बनाकर ही हम एक स्वस्थ और समृद्ध समाज का निर्माण कर सकते हैं।

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