Korba

राष्ट्रीय मध्यस्थता अभियान ( 90 दिवस विशेष अभियान ) के संबंध में प्रधान जिला न्यायाधीश, कोरबा/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, कोरबा द्वारा न्यायाधीशों के साथ ली गई तृतीय बैठक।

कोरबा (ट्रैक सिटी)/ राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वाधान में मध्यस्थता एवं सुलह परियोजना समिति के सहयोग से विशेष मध्यस्थता अभियान राष्ट्र के लिए मध्यस्थता अंतर्गत एस. शर्मा, प्रधान जिला न्यायाधीश / अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, कोरबा की अध्यक्षता में जिला न्यायालय कोरबा में पदस्थ समस्त न्यायाधीशों एवं विडियो कांफेंसिंग के माध्यम से व्यवहार न्यायालयों कटघोरा, पाली एवं करतला में पदस्थ न्यायाधीशगण के साथ तृतीय बैठक विडियो कांफ्रेंसिंग कक्ष में आयोजित की गई।

प्रधान जिला न्यायाधीश / अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, कोरबा के द्वारा उद्बोधन में कहा गया है कि मध्यस्थता के लिए मामलों की श्रेणियों में वैवाहिक विवाद, दुर्घटना दावे, घरेलु हिंसा, चेक बाउंस मामले, वाणिज्यिक विवाद, सेवा विवाद के मामले, आपराधिक समझौता योग्य मामले, उपभोक्ता विवाद, ऋण वसूली मामले, विभाजन और बेदखली मामले, भूमि अधिग्रहण मामले आदि शामिल है। मध्यस्थता एक विवाद समाधान की सहज, त्वरित और विश्वासपूर्ण प्रक्रिया है। और यह न्यायालय से बाहर समाधान के प्रति जन जागरूकता हेतु एक प्रयास है। मध्यस्थता से लंबित मामलों की संख्या में कमी लाई जा सकती है और पक्षकारों को संतोषजनक समाधान प्राप्त हो सकता है। उक्त बैठक में मध्यस्थता केन्द्रों की भूमिका, प्रक्रिया और मामलों की पहचान से संबंधित महत्वपूर्ण दिशा- निर्देश दिए गये। प्रधान जिला न्यायाधीश / अध्यक्ष जिला विधि सेवा प्राधिकरण, कोरबा के द्वारा समस्त न्यायाधीशों को अधिक से अधिक प्रकरणों को चिंहाकित कर मध्यस्थता हेतु रिफर करने हेतु निर्देशित किया गया । तथा इस अभियान का अधिक से अधिक प्रचार प्रसार कर आमजनों तक सूचना पहुंचाने के संबंध में भी निर्देशित किया गया। पैरालीगल वॉलंटियर के माध्यम से मध्यस्थता के व्यापक प्रचार प्रसार हेतु सार्वजनिक स्थलों पर चौक चौराहों पर लोगों को मध्यस्थता के लाभ की जानकारी प्रदाय करने एवं प्रींटिंग व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से इस अभियान का अधिक से अधिक प्रचार प्रसार कर आमजनों तक सूचना पहुंचाने हेतु निर्देशित किया गया । उक्त बैठक में जिला न्यायालय कोरबा में पदस्थ समस्त मान. न्यायाधीशगण एवं बाह्य न्यायालय में पदस्थ न्यायाधीशगण विडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित रहे।

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