गरियाबंद

कुपोषण मुक्त करने जिला प्रशासन सदैव तत्पर – कलेक्टर उइके।  

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कलेक्टर उइके के पहल पर जिले को कुपोषण मुक्त करने तथा बच्चों के बेहतर देखभाल के लिए लगाया जा रहा है मेगा हेल्थ कैम्प।

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छुरा के सांस्कृतिक भवन में कुपोषित बच्चों के लिए मेगा हेल्थ कैम्प लगाया गया

200 से अधिक बच्चों का किया गया स्वास्थ्य जांच, दी गई निःशुल्क दवाईयां

कलेक्टर ने हेल्थ कैम्प में अति गंभीर कुपोषित बच्चों की स्थिति को देखकर तत्काल एनआरसी भेजने के दिये निर्देश

03 अगस्त को होगा में मैनपुर में कुपोषित बच्चों के लिए मेगा हेल्थ कैम्प

गरियाबंद (ट्रैक सिटी)/ कलेक्टर बी.एस. उइके के निर्देशानुसार जिले में बच्चों के बेहतर सुपोषण, स्वास्थ्य एवं देखभाल तथा कुपोषण मुक्त करने के उद्देश्य से कुपोषित बच्चों के स्वास्थ्य जांच एवं ईलाज के लिए आज छुरा के सांस्कृतिक भवन में मेगा हेल्थ कैम्प का आयोजन किया गया। उल्लेखनीय है कि इसकी शुरुआत शुक्रवार 25 जुलाई को जिला मुख्यालय से किया गया था। इसी तरह 03 अगस्त को मैनपुर में मेगा हेल्थ कैम्प का आयोजन किया जायेगा।

इस विशेष स्वास्थ्य शिविर में राजधानी रायपुर के प्रसिद्ध शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ अशोक भट्टर एवं उनकी टीम द्वारा जिले के कुपोषित बच्चों का गंभीरतापूर्वक स्वास्थ्य जांच एवं ईलाज किया जा रहा है। साथ ही बच्चों के पालकों को बच्चों के बेहतर देखभाल एवं कुपोषण को दूर करने खानपान से संबंधित आवश्यक सलाह भी दिया जा रहा है। शिविर में बच्चों का सामान्य विकास, मनोभाव, बोलचाल, हाथ-पैर की एक्टीविटी, मानसिक विकास, बोलने-सुनने, पिछड़ापन, शारीरिक विकास, जन्मजात बीमारी, चर्मरोग, हृदय रोग, बौद्धिक विकास सहित अन्य शारीरिक कमजोरियों की जानकारी लेकर उनका निःशुल्क उपचार एवं दवाईयां वितरित की गई। छुरा विकासखण्ड के लगभग 200 से अधिक बच्चों का वजन माप, वृद्धि चार्ट एवं आवश्यक मापदण्डों में पंजीयन किया गया। इसके आधार पर डॉ भट्टर ने बच्चों की स्वास्थ्य स्थिति की जांच कर आवश्यक ईलाज एवं देखभाल के लिए सुझाव देते हुए उनके आहार एवं खान-पान के बारे में जानकारी दी गई। स्वास्थ्य टीम द्वारा निःशुल्क दवाईयों का भी वितरण किया गया। कार्यक्रम में जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग श्री अशोक पाण्डेय सहित विभागीय अधिकारी-कर्मचारी एवं चिकित्सकीय दल मौजूद रहे।

इस दौरान कलेक्टर श्री उइके ने कहा कि जिले को कुपोषण मुक्त करने जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग तथा महिला एवं बाल विकास विभाग सदैव तत्पर एवं सजग है। गंभीर कुपोषित बच्चों का चिन्हांकन कर उन्हें विशेष पूरक पोषण आहार दिया जा रहा है। कलेक्टर श्री उइके ने बताया कि छुरा विकासखण्ड के 126 अति गंभीर कुपोषित बच्चों को स्थानीय जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, सामाजिक एवं व्यापारिक संगठन, अधिकारी-कर्मचारी द्वारा गोद लेकर अतिरिक्त आहार देने एवं ईलाज में सहायता करने के लिए सभी वर्ग के लोग सामने आ रहे है। कलेक्टर श्री उइके ने हेल्थ कैम्प में लाये गये कुछ अति गंभीर कुपोषित बच्चों की स्थिति को देखते हुए उन्हें तत्काल जिला अस्पताल के एनआरसी में भेजने के निर्देश दिये। उन्होंने महिला एवं बाल विकास विभाग के समन्वय से डॉक्टर भट्टर एवं उनकी टीम की मेगा हेल्थ कैम्प का आयोजन करने पर डॉ. अशोक भट्टर की सराहना की। इसके अलावा चिकित्सकों द्वारा बच्चों की बेहतर देखभाल के लिए दिये गये सलाह का अक्षरशः पालन करने का आग्रह शिशुवती माताओं एवं अभिभावकों से किया। इस अवसर पर डॉ. अशोक भट्टर ने कहा कि मेगा हेल्थ कैम्प गरियाबंद जिला प्रशासन की विशेष पहल है। हमारी टीम ने समाज सेवा में भागीदारी निभाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि कुपोषण बच्चों के लिए अभिशाप बन जाता है। इसलिए इसको दूर करने के लिए विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। कुपोषण से लड़ाई में पोषण आहार की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।

कार्यक्रम में डीपीओ श्री पाण्डेय ने बताया कि गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों की स्थिति के स्वास्थ्य में सुधार लाने के उद्देश्य से जनप्रतिनिधियों, अधिकारी-कर्मचारियों, शिक्षकों, गणमान्य नागरिकों, समाजसेवी संस्थाओं, स्वयंसेवी संस्थाओं, व्यापारी संगठनों, मीडिया प्रतिनिधियों के द्वारा गंभीर कुपोषित बच्चों को उत्साहपूर्वक गोद ले रहे है, ताकि जिले के कोई भी बच्चे कुपोषित न रहे। इसके तहत महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा चिन्हांकित बच्चों की उचित देखभाल एवं 06 माह तक निर्धारित पौष्टिक सामग्री उपलब्ध कराने हेतु सहमति प्रदान कर रहे है। उन्होंने बताया कि महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा चिन्हांकित बच्चों को नियमित रूप से पौष्टिक आहार, स्वास्थ्य जांच और निगरानी प्रदान की जाएगी। इस दौरान जनपद अध्यक्ष श्रीमती मीरा ठाकुर, नगर पंचायत अध्यक्ष श्रीमती लुकेश्वरी निषाद, जिला पंचायत सदस्य श्री लेखराज धुरवा, सीडीपीओ श्री चन्दूलाल साहू, श्री चन्द्रहास साहू सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, विभागीय अधिकारी-कर्मचारी एवं बच्चे के अभिभावकगण बड़ी संख्या में मौजूद थे।

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