कोरबा

‘विजया एकादशी’ शत्रु बाधा से मुक्ति दिलाने वाला व्रत, जानें सही तिथि और पूजा समय।

कोरबा (ट्रैक सिटी)/ *फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को ‘विजया एकादशी’ कहा जाता है। जो इस बार 13 फरवरी 2026 शुक्रवार को है*

*फाल्गुन कृष्ण एकादशी, विजया एकादशी का प्रारंभ- 12 फरवरी 2026, गुरुवार को मध्यान्ह 12 बजकर 22 मिनट से*

*फाल्गुन कृष्ण एकादशी, विजया एकादशी का समापन- 13 फरवरी 2026 शुक्रवार को मध्यान्ह 02 बजकर 55 मिनट पर*

*फाल्गुन कृष्ण एकादशी, विजया एकादशी व्रत के पारण का समय- 14 फरवरी 2026, शनिवार को प्रात: 07 बजकर 01 मिनट से प्रात: 09 बजकर 14 मिनट के मध्य*

*विशेष* 

*फाल्गुन कृष्ण विजया एकादशी का व्रत उदय तिथि अनुसार दिनांक 13 फरवरी 2026, शुक्रवार के दिन रखें* …. *

*एकादशी के दिन खाने में चांवल या चांवल से बनी हुई वस्तुओं का प्रयोग बिल्कुल भी ना करें।*

*भले ही आपने व्रत ना रखा हो…. फिर भी चांवल या चांवल से बनी हुई चीज का खाना वर्जित है।*

*।। विजया एकादशी व्रत कथा।।*

पौराणिक कथा के अनुसार रावण ने जब माता सीता का हरण कर लिया तब प्रभु श्रीराम जी ने हनुमान, सुग्रीव आदि की मदद से लंका पर चढ़ाई की योजना बनाई। राम जी ने सेना सहित लंका की तरफ प्रस्थान किया। समुद्र किनारे पहुंचने पर श्रीरामजी ने विशाल समुद्र को घड़ियालों से भरा देखकर लक्ष्मणजी से कहा कि ये सागर तो अनेक मगरमच्छों और जीवों से भरा है इसे कैसे पार करें। प्रभु श्रीराम की बात सुनकर लक्ष्मणजी ने कहा कि वकदाल्भ्य मुनि के पास इस समस्या का हल जरुर होगा, वह ब्रह्माओं के ज्ञाता हैं, वे ही आपकी विजय के उपाय बता सकते हैं। श्रीरामजी वकदाल्भ्य ऋषि के आश्रम में गए उन्हें सारा वृतांत सुनाया. भगवान राम की इस परेशानी से पार पाने के लिए मुनि श्री ने उन्हें फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की विजया एकादशी का उपवास करने को कहा।

ऋषि वकदाल्भ्य ने कहा कि इस उपवास के लिए दशमी के दिन स्वर्ण, चांदी, तांबे या मिट्टी का एक कलश बनाएं। उस कलश को जल से भरकर तथा उस पर पंच पल्लव रखकर उसे वेदिका पर स्थापित करें। उस कलश के नीचे सतनजा (सात प्रकार के अनाज) और ऊपर जौ रखें। उस पर भगवान श्री विष्णु जी की स्वर्ण की प्रतिमा स्थापित करें। एकादशी के दिन स्नानादि से निवृत्त होकर धूप, दीप, नैवेद्य, नारियल आदि से भगवान श्रीहरि का पूजन करें। सारा दिन भक्तिपूर्वक कलश के सामने व्यतीत करें और रात को भी उसी तरह बैठे रहकर जागरण करें। द्वादशी के दिन नदी या तालाब के किनारे स्नान आदि से निवृत्त होकर उस कलश को ब्राह्मण को दे दें। यदि आप इस व्रत को सेनापतियों के साथ करेंगे तो अवश्य ही विजयश्री आपका वरण करेगी। श्रीराम ने विजया एकादशी का व्रत किया और इसके प्रभाव से राक्षसों के ऊपर विजय प्राप्त की। ब्रह्माजी ने नारदजी से कहा था जो साधक इस व्रत का माहात्म्य श्रवण करता है या पढ़ता है उसे वाजपेय यज्ञ के फल की प्राप्ति होती है।

*नाड़ीवैद्य पंडित डॉ.नागेंद्र नारायण शर्मा*

Editor in chief | Website |  + posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button