कोरबा

जिला स्तरीय एनीमिया मुक्त कोरबा कार्यक्रम का हुआ शुभारंभ

एनीमिया की रोकथाम के लिए बच्चों, गर्भवती-शिशुवती माताओं को दी गयी आयरन की दवाई

 

कोरबा/जिले में बच्चे एवं महिलाओं में खून की कमी दूर करने के लिए जिला स्तरीय एनीमिया मुक्त कोरबा कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। जिला स्तरीय कार्यक्रम का शुभारंभ निगम क्षेत्र के स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल पंपहाउस, आंगनबाडी केन्द्र पंपहाउस एवं आंगनबाडी केन्द्र गेरवाघाट से बच्चों को आयरन सिरप एवं टेबलेट खिलाकर किया गया। इस दौरान सीएमएचओ डॉ. बीबी बोर्डे, जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग एमडी नायक, जिला शिक्षा अधिकारी जी.पी. भारद्वाज, विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी संजय अग्रवाल एवं पंपहाउस स्कूल के प्राचार्य विवेक लाण्डे मौजूद रहे। जिले में छह माह से पांच वर्ष तक के बच्चे, गर्भवती माता, शिशुवती माता एवं छह से 18 वर्ष तक के बालक-बालिकाओं में खून की कमी के ईलाज के लिए जिले में विशेष अभियान चलाया जा रहा हैं। इस अभियान के तहत् छह वर्ष से 18 वर्ष तक के स्कूली बालक-बालिकाओं को प्रति सप्ताह एक आयरन टेबलेट स्कूल में ही प्रदान किया जाएगा। इसके अलावा सभी आंगनबाडी केन्द्रो में छह माह से 59 माह तक के बच्चों को प्रति सप्ताह आयरन सिरप पिलाया जाएगा। गर्भवती, शिशुवती माताओं को प्रतिदिन एक आयरन गोली तथा 11 से 18 वर्ष तक के शाला त्यागी किशोरियों को प्रति सप्ताह एक आयरन गोली खाने के लिए दिया जाएगा। इस अवसर पर सीएमएचओ डॉ. बोर्डे ने सभी हितग्राहियों को इसका लाभ लेने के लिए आंगनबाडी केन्द्रो स्वास्थ्य केन्द्रो और स्कूल परिसरों में जाकर दवाईयां प्राप्त करने तथा इसका नियमित सेवन करने की अपील की।
एनीमिया प्रबंधन के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा एवं महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा विशेष कार्ययोजना बनायी गयी है। इसके अंतर्गत आगामी तीन माह के लिए आयरन दवाई खिलाने और जन समुदाय में एनीमिया के रोकथाम के लिए जागरूकता लाने की योजना बनाई गयी है। कार्य योजना अनुसार जिले के सभी विकासखण्डो में मैदानी अमलो द्वारा एनीमिया नियंत्रण के लिए आयरन फोलिक एसिड दवाई का वितरण किया जाएगा। प्रत्येक मंगलवार एवं शुक्रवार को खून की कमी वाले हितग्राहियों को केन्द्रो के माध्यम से दवाईयों का वितरण किया जाएगा। साथ ही समय-समय पर लक्षित हितग्राहियों के लिए एनीमिया जांच शिविरों का भी आयोजन किया जाएगा। गंभीर व मध्यम एनिमिया वाले हितग्राहियों की पहचान कर उसे स्वास्थ्य सेवाएं हेतु रिफर किया जाएगा। साथ ही हितग्राहियों एवं अभिभावकों को उचित खान-पान एवं दवा सेवन के लिए परामर्श दिया जाएगा।

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