कोरबा

मातृछाया के चार शिशु को मिले माता-पिता व परिवार

कोरबा/ट्रैक सिटी न्यूज : मंगलवार को निहारिका स्थित गणेश वाटिका में मातृछाया के चार शिशु को अपना घर मिला। अन्य अन्य के निःसंतान दंपति ने नियमों के अनुरूप उसे गोद लिया है। खुशी के इस क्षण में वहां मौजूद हर किसी ने अब तक बेसहारा रहे शिशु को माता-पिता व परिवार का आश्रय मिलने पर संतोष जाहिर किया और शिशु के उज्ज्वल भविष्य एवं सुखी जीवन की कामना की गई।

विधिवत गोदभराई की रस्म

मंगलवार को मातृछाया के चार शिशु को अपना घर मिला। अन्य-अन्य राज्य के निःसंतान दंपति ने नियमों के अनुरूप उसे गोद लिया है। खुशी के इस क्षण में वहां मौजूद हर किसी ने अब तक बेसहारा रहे शिशु को माता-पिता व परिवार का आश्रय मिलने पर संतोष जाहिर किया और शिशु के उज्ज्वल एवं सुखी जीवन की कामना की। विधिवत गोदभराई की रस्म निभाते हुए दंपति को शिशु सौंप दिया गया।

सेवा भारती की ओर से संचालित मातृछाया (विशेषीकृत दत्तक ग्रहण) में मंगलवार को निहारिका स्थित गणेश वाटिका परिसर में चार शिशु दत्तक ग्रहण अधिनियम के तहत अन्य राज्य के दंपति को गोद दिया गया। कार्यक्रम में दंपति की विधिवत गोदभराई की रस्म भी अदा कर शिशु प्रदान किया गया। मातृछाया में सामाजिक एवं अन्य कारणों से त्यागे गए नवजात शिशुओं का पालन-पोषण किया जाता है। इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ शासन के राज्यसव मंत्री जय सिंह अग्रवाल बतौर मुख्य अतिथि मौजूद रहे।

विशिष्ट अतिथियों में महापौर राजकिशोर प्रशाद, सभापति श्याम सुंदर सोनी, अग्रवाल सभा व उद्योग संघ के अध्यक्ष श्रीकांत बुधिया, राजा मोदी, पी के भाटिया, सेवा भारती के सचिव सुनील जैन, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संघचालक किशोर बुटोलिया। महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी एम डी नायक, बाल कल्याण समिति के सदस्य बिता चक्रवर्ती, चन्द्रबाला शुक्ला। जिला बाल संरक्षण अधिकारी दयादास महंत समेत अन्य उपस्थित थे, जिन्होंने इस पल को साक्षी बनाते हुए शिशु के लिए एक नए घर-परिवार में स्वागत के साथ सुखी भविष्य का आशीर्वाद प्रदान किया।

निःसंतान दंपतियों को वात्सल्य सुख

ऐसे शिशु, जिनकी आयु शून्य से पाँच वर्ष तक की हो, उन्हें उनकी देखरेख और विकास के लिए समर्पित कार्यकर्ता पारिवारिक वातावरण प्रदान कर पोषित होने योगदान देते हैं। जहां एक ओर इन शिशुओं को एक स्नेह भरे परिवार की जरूरत होती है, दूसरी ओर कई निःसंतान दंपती को भी, जिनकी कोई संतान नहीं, उन्हें वात्सल्य प्रेम प्रदान करने नन्हा शिशु चाहिए होता है। ऐसे दंपतियों को एक प्रक्रिया के माध्यम से सेवा भारती मातृछाया से नन्हे शिशु गोद दिए जाते हैं। कार्यक्रम का संचालन अभिषेक शर्मा द्वारा किया गया इस अवसर पर कोरबा शहर के गणमान्य नागरिक व सेवा भारती समिति के सदस्य उपस्थित रहे।

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