रायपुर/कोरबा (ट्रैक सिटी)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन और उनके सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर छत्तीसगढ़ में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक ‘सेवा संकल्प अभियान’ आयोजित किया जा रहा है। अभियान की शुरुआत 17 सितंबर की शाम ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम से होगी। राज्य के सभी 33 जिलों में कार्यक्रम आयोजित किए जाने की जानकारी सामने आई है।
इसी कार्यक्रम को लेकर छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया के माध्यम से सवाल उठाए हैं। बघेल ने कहा है कि भारतीय जनता पार्टी अपने नेता का जन्मदिन मनाती है, इस पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। उनका सवाल कार्यक्रम में सरकारी मशीनरी की कथित भागीदारी और संभावित सरकारी खर्च को लेकर है।
मुख्यमंत्री की बैठक से विभाग और कलेक्टर तक तैयारी क्यों?
बघेल ने सवाल किया कि यदि प्रधानमंत्री के जन्मदिन और भाजपा के कार्यक्रम का आयोजन पार्टी स्तर पर किया जा रहा है तो मुख्यमंत्री स्तर पर बैठकें क्यों हो रही हैं और विभाग प्रमुखों तथा कलेक्टरों के माध्यम से कार्यक्रम की तैयारियां क्यों कराई जा रही हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह सरकारी कार्यक्रम है? अगर यह सरकारी कार्यक्रम है तो इसके लिए होने वाले खर्च का प्रावधान किस बजट मद से किया गया है?
दीया, बाती और तेल का खर्च कौन उठाएगा?
पूर्व मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से दीयों, बाती और तेल की व्यवस्था को लेकर सवाल किया है। उनके अनुसार, यदि इतने बड़े स्तर पर दीप प्रज्वलन के लिए सरकारी संसाधनों का उपयोग किया जा रहा है तो इसकी खरीद और भुगतान का पूरा हिसाब सार्वजनिक होना चाहिए।
बघेल ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि छत्तीसगढ़ में डेढ़ करोड़ से अधिक, रायपुर शहर में करीब 25 लाख और रायपुर जिले में करीब 31 लाख दीये जलाने का लक्ष्य रखा गया है। इन आंकड़ों के संदर्भ में उन्होंने पूछा कि दीया-बाती कौन खरीद रहा है और तेल की व्यवस्था कौन करेगा।
विधानसभा में हिसाब मांगने की बात
भूपेश बघेल ने अपने सवालों के साथ यह भी कहा है कि विभागों के सचिव और कलेक्टर खर्च का हिसाब तैयार रखें। उन्होंने संकेत दिया कि यदि जरूरत पड़ी तो विधानसभा में संबंधित विभागों से खर्च का हिसाब मांगा जाएगा।
उनका मूल सवाल यही है कि यदि कार्यक्रम राजनीतिक दल का है तो सरकारी मशीनरी की इसमें भूमिका क्यों है और यदि यह सरकारी कार्यक्रम है तो दीयों, बाती और तेल सहित आयोजन पर होने वाला खर्च किस मद से किया जा रहा है।
सवाल खर्च का ही नहीं, जवाबदेही का भी
‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम को सरकार की ओर से ‘सेवा संकल्प अभियान’ और जनभागीदारी से जोड़ा जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी 17 सितंबर की शाम 7 बजे लोगों से अपने घरों में दीप जलाने की अपील की है।
ऐसे में अब बघेल के सवालों के केंद्र में सरकारी संसाधनों और सरकारी धन के इस्तेमाल की पारदर्शिता है। यदि आयोजन में सरकारी राशि खर्च की गई है तो उसका बजट मद, स्वीकृति, खरीद प्रक्रिया और वास्तविक व्यय सार्वजनिक होने पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कार्यक्रम में सरकारी धन का कितना और किस रूप में उपयोग हुआ।

