कोरबा

खरीफ से पहले प्रशासन अलर्ट, उड़नदस्ता दल की कार्यवाही तेज- उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 के तहत होगी सख्त कार्रवाई।

कोरबा (ट्रैक सिटी)/ खरीफ 2026 सीजन को ध्यान में रखते हुए किसानों को बीज, उर्वरक एवं कीटनाशक की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु कोरबा जिले में प्रशासन पहले से ही सक्रिय हो गया है। जिला एवं विकासखण्ड स्तर पर उड़नदस्ता दल का गठन किया गया है। यह दल पूरे जिले में उर्वरक, बीज एवं कीटनाशक विक्रय केंद्रों का सतत निरीक्षण कर रहा है तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर संबंधित विक्रेता के विरुद्ध बीज अधिनियम 1966, उर्वरक (नियंत्रण) आदेश 1985 और कीटनाशक अधिनियम 1968 के तहत तत्काल कार्रवाई की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।

उड़नदस्ता दल द्वारा रकबे से अधिक उर्वरक क्रय करने वाले किसानों का भौतिक सत्यापन किया जा रहा है। साथ ही उर्वरक की जमाखोरी, कालाबाजारी एवं गलत दर पर विक्रय की शिकायतों पर मौके पर जाकर निरीक्षण कर आवश्यक कार्यवाही की जा रही है। विक्रेताओं के लाइसेंस, स्टॉक एवं वितरण व्यवस्था की नियमित जांच की जा रही है, तथा भौतिक स्टॉक और पीओएस एंट्री में पाए जा रहे अंतर पर कठोर कार्रवाई की जा रही है।

किसानों से अपील की गई है कि वे सभी कृषि इनपुट केवल अधिकृत विक्रेताओं से निर्धारित दर पर खरीदें तथा पक्का बिल अवश्य प्राप्त करें। किसी भी अनियमितता की जानकारी तुरंत ब्लॉक एवं जिला स्तर पर उपलब्ध कराएं, जिससे समय रहते कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

इसी क्रम में उड़नदस्ता दल ने आज 06 अप्रैल 2026 को पाली विकासखण्ड के तीन उर्वरक विक्रय केंद्रों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान गंभीर अनियमितता पाए जाने पर उमेश खाद भण्डार, पाली पर 21 दिनों का विक्रय प्रतिबंध लगाया गया है। वहीं न्यू शिव खाद भण्डार, पाली तथा द्वारिका प्रसाद जायसवाल, पाली को अनियमितताओं पर नोटिस जारी किया गया है। इन विक्रेताओं की पुनः जांच एक सप्ताह बाद की जाएगी।

उप संचालक कृषि ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई उर्वरक विक्रेता वास्तविक किसानों को उर्वरक बिक्री न कर पीओएस में फर्जी विक्रय दर्शाता है तथा गोदाम में भौतिक स्टॉक में अंतर पाया जाता है, तो उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 के अंतर्गत कड़ी कार्रवाई से नहीं बच सकेगा। इसी प्रकार निर्धारित शासकीय दर से अधिक मूल्य पर उर्वरक बेचने तथा कालाबाजारी करने पर भी कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

जिले के उर्वरक नियंत्रण हेतु गठित जिला एवं ब्लॉक स्तरीय उड़नदस्ता दल द्वारा युद्धस्तर पर कार्रवाई प्रारंभ की गई है। उप संचालक कृषि ने सभी उर्वरक विक्रेताओं से भौतिक स्टॉक एवं पीओएस एंट्री की शुद्धता बनाए रखने की अपील की है ताकि जिले में किसी भी प्रकार की अनियमितता उजागर न हो और किसानों को आवश्यक कृषि सामग्रियों की उपलब्धता बिना व्यवधान सुनिश्चित की जा सके।

 

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