कोरबा

गौठान में बछड़े की मौत का मामला: अब ठेकेदार ने जिम्मेदार अधिकारी पर एफआईआर की मांग की

कोरबा (ट्रैक सिटी) खरमोरा गौठान में बछड़े की मौत के मामले में नया मोड़ सामने आ गया है। सफाई ठेकेदार के खिलाफ शिकायत करने के बाद अब नगर निगम की पोल खुल गई है। निगम के जिम्मेदार अधिकारी अपनी लापरवाही छिपाने के लिए ठेकेदार पर ठीकरा फोड़ रहे हैं। जबकि हकीकत यह है कि मृत बछड़े की देखरेख का जिम्मा निगम के ही अधिकारियों का था, लेकिन अब बेगुनाह ठेकेदार को फंसाने की साज़िश रची जा रही है।

दरअसल 13 अगस्त 2025 को गौठान में एक बछड़े की मौत के बाद निगम अधिकारी अनिरुद्ध प्रताप सिंह ने ठेकेदार रशीद खान पर आरोप लगाया कि नियुक्त कर्मियों की लापरवाही से यह घटना हुई। मगर रशीद खान ने इस आरोप को पूरी तरह झूठा और मनगढ़ंत बताते हुए थाना सिविल लाइन में निगम अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने आवेदन दे दिया है।

रशीद खान का कहना है कि उन्हें सिर्फ सफाई कार्य हेतु लेबर सप्लाई का ठेका दिया गया है, न कि गौठान या मवेशियों की देखभाल का। “मेरा काम केवल सफाई कर्मियों की उपलब्धता तक सीमित है, पशुओं की देखभाल और चारे-पानी की जिम्मेदारी पूरी तरह निगम की है। इसके बावजूद मेरे खिलाफ झूठी रिपोर्ट दर्ज कराई गई, जो न केवल गलत है बल्कि मेरी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने वाली है,” खान ने कहा।

उन्होंने साफ किया कि निगम ने गौठान में दो इंचार्ज कर्मचारियों की नियुक्ति कर रखी है, जिनका दायित्व है कि पशुओं की देखभाल और भोजन-पानी की पूरी व्यवस्था हो। लेकिन जब उनकी लापरवाही उजागर हुई तो ठेकेदार पर आरोप थोपकर निगम अधिकारी अपनी गर्दन बचाने की कोशिश कर रहे हैं।

ठेकेदार ने आवेदन में निगम अधिकारी अनिरुद्ध प्रताप सिंह के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 291 के तहत अपराध दर्ज करने की मांग की है। साथ ही अपने खिलाफ दर्ज कराई गई झूठी रिपोर्ट को लेकर भी पृथक से एफआईआर दर्ज करने की गुहार लगाई है।

रशीद खान ने इस आवेदन की प्रतिलिपि कलेक्टर, आयुक्त और पुलिस अधीक्षक कोरबा को भी भेजी है ताकि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और असली दोषियों पर कार्रवाई हो।

इस मामले में सभापति नूतनसिंह ठाकुर ने पहले ही कह रखा था कि घटना में निगम अधिकारी जिम्मेदार हों या फिर कोई और उस पर पशु क्रूरता अधिनियम के तहत कार्रवाई होनी चाहिए।

इस घटना ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि पुलिस इस मामले में निष्पक्ष जांच करती है या निगम के दबाव में किसी निर्दोष को फंसाया जाता है।

Editor in chief | Website |  + posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button