कोरबा (ट्रैक सिटी) औद्योगिक नगरी कोरबा को बाल्को से जोड़ने वाले मुख्य मार्ग पर स्थित डेंगुरनाला पुल इस समय बेहद जर्जर और खस्ताहाल स्थिति में पहुंच चुका है। प्रतिदिन हजारों छोटे-बड़े वाहनों और कोयला-राखड़ से लदे भारी ट्रेलरों की आवाजाही झेलने वाले इस पुल पर बड़े-बड़े गड्ढे उभर आए हैं। सड़क की उखड़ी गिट्टी और गड्ढों के कारण यह मार्ग अब सफर के लायक नहीं बचा है, जिससे आए दिन दुपहिया वाहन चालक फिसलकर चोटिल हो रहे हैं।
हादसों को न्योता देते गहरे गड्ढे
पुल के ऊपर और उसके पहुंच मार्ग पर बने जानलेवा गड्ढों की वजह से वाहनों का संतुलन बिगड़ रहा है। विशेषकर रात के अंधेरे में स्थिति और भी भयावह हो जाती है। भारी गाड़ियों के गुजरने के दौरान पुल पर कंपन महसूस होती है, जिससे स्थानीय निवासियों और राहगीरों में किसी बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है।
डस्ट और पानी के छिड़काव से बढ़ी फिसलन
बाल्को और रिंग रोड क्षेत्र में राखड़ (फ्लाई एश) और कोयला परिवहन की वजह से धूल का गुबार उड़ता है। इस डस्ट को दबाने के लिए टैंकरों से पानी का छिड़काव तो किया जाता है, लेकिन डेंगुरनाला पुल की उखड़ी हुई सड़क और गड्ढों में पानी भरने से वह कीचड़ का रूप ले लेता है। इससे पुल के ऊपर अत्यधिक फिसलन पैदा हो रही है, जिसमें ब्रेक लगाने पर गाड़ियां दुर्घटनाग्रस्त हो रही हैं।
प्रशासन और संबंधित विभाग मौन
स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों द्वारा कई बार डेंगुरनाला पुल की मरम्मत और सुदृढ़ीकरण की मांग लोक निर्माण विभाग (PWD) और नगर निगम प्रशासन से की जा चुकी है। इसके बावजूद अब तक केवल कागजी आश्वासन ही मिले हैं। गड्ढों को पाटने के लिए किया जाने वाला पेचवर्क भी पहली ही बारिश या भारी वाहनों के दबाव में उखड़ जाता है।
जनता की मांग: जल्द हो स्थायी सुधार
क्षेत्र के नागरिकों का कहना है कि कोरबा-बाल्को मार्ग जिले की लाइफलाइन में से एक है। अगर जल्द ही डेंगुरनाला पुल की स्थिति को सुधारने के लिए कंक्रीट निर्माण या ठोस मरम्मत कार्य नहीं कराया गया, तो किसी भी दिन कोई बड़ी दुर्घटना घट सकती है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

