कोरबा (ट्रैक सिटी)/ शिक्षा को जन-आंदोलन का स्वरूप देने और समाज के शिक्षित नागरिकों को सरकारी स्कूलों से जोड़ने की पहल के तहत शनिवार को “सभापति की पाठशाला” अभियान का शुभारंभ किया गया। इस अभियान के अंतर्गत नगर पालिका निगम के सभापति नूतन सिंह ठाकुर सुबह शासकीय माध्यमिक शाला सीतामणी पहुंचे, जहां उन्होंने छात्र-छात्राओं के बीच समय बिताया और उन्हें विभिन्न विषयों की जानकारी देते हुए पढ़ाया। शिक्षा दान की मुहिम से जुड़ते हुए एम.आई.सी. सदस्य उर्वशी राठौर, सीतामढ़ी की पार्षद राधा बाई, मोतीसागर पारा की पार्षद रुबिदेवी सागर ने भी बच्चों से सामान्य ज्ञान और खेल कला आदि की जानकारी साझा किया।

इस अवसर पर नूतन सिंह ठाकुर ने कहा कि समाज के प्रत्येक शिक्षित नागरिक को सप्ताह में कम से कम एक या दो दिन शासकीय विद्यालयों में जाकर बच्चों के बीच समय बिताना चाहिए। सामान्य ज्ञान, प्राथमिक शिक्षा, खेल, कला, नैतिक शिक्षा एवं व्यक्तित्व विकास जैसे विषयों के माध्यम से बच्चों का मार्गदर्शन किया जा सकता है। उनका मानना है कि समाज के सामूहिक प्रयास से ही बच्चों के सपनों को नई उड़ान मिल सकती है।
उन्होंने कहा कि यदि समाज का हर शिक्षित व्यक्ति थोड़ा-सा समय निकालकर सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को पढ़ाने का संकल्प ले, तो इससे न केवल शिक्षा का स्तर बेहतर होगा बल्कि समाज को शिक्षित, अनुशासित, नशामुक्त और अपराधमुक्त बनाने की दिशा में भी सकारात्मक बदलाव आएगा। निर्धन और जरूरतमंद बच्चों को योग्य, गुणवान और सक्षम नागरिक बनाने से बड़ा समाजसेवा का कार्य और कोई नहीं हो सकता।
सभापति ने सभी शिक्षित नागरिकों से इस मुहिम से जुड़ने की अपील करते हुए कहा कि शुभ सावन माह के अवसर पर शुरू किए गए इस अभियान को जनभागीदारी से सफल बनाया जाए। उन्होंने इच्छुक लोगों से सप्ताह में एक-दो दिन अपने आसपास के शासकीय विद्यालयों में जाकर बच्चों को पढ़ाने का आग्रह किया।
इस अभियान के तहत सीतामढ़ी मिडिल स्कूल के कक्षा सातवीं और आठवीं में सामान्य ज्ञान, अंग्रेजी, गणित का प्रश्नोत्तर हल कराया गया तथा सफल प्रतिभाशाली बच्चे सौम्य श्रीवास, खेमराज दास, प्रभा सारथी, यक्ष कर्ष, अंकुशा तांती को पुरस्कृत किया गया। स्कूल के समस्याओं की जानकारी लेकर उसे शीघ्र हल करने अधिकारियों को अवगत कराया।
शाला विकास समिति की अध्यक्ष प्रमिला सागर, एवं पार्षद उर्वशी राठौर, राधा बाई, उपस्थित शिक्षकों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे शिक्षा और सामाजिक जागरूकता की दिशा में एक प्रेरणादायी कदम बताया।

