कोरबा

हंसी-ठहाकों के साथ वीर और श्रृंगार रस में नगरजनों ने गोते लगाए

 मीडिया आज भी बेहद महत्वपूर्ण : पद्मश्री डॉ. सुरेन्द्र दुबे

प्रेस काम्पलेक्स परिसर रविवार रात हंसी-ठहाकों से गूंजता रहा। श्रोतागण श्रृंगार रस की कविताओं और गीत-ग़ज़ल में जहां गोते लगाए वहीं वीर रस की कविताओं में राष्ट्रप्रेम का जज्बा से ओत-प्रोत होते रहे।
कोरबा प्रेस क्लब द्वारा आयोजित पद्मश्री डॉ. सुरेंद्र दुबे का सम्मान समारोह एवं अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का शुभारंभ मां सरस्वती के छाया चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। पद्मश्री डॉ.सुरेंद्र दुबे ने संचालन करते हुए हास-परिहास की एक से बढ़कर एक रचनाएं प्रस्तुत की जिन्हें सुनकर श्रोतागण हंसी-ठहाके लगाते रहे। डॉ. दुबे ने कोरोना काल, सामाजिक कुरीति और राजनीतिक विषयों पर व्यंग्य बाण छोड़े। टाईगर अभी जिंदा है….की रचना ने खूब तालियां बटोरी। महिलाओं की दशा पर मां की परिभाषा… कविता से सवाल प्रस्तुत किया। कौन बनेगा करोड़पति के सवाल-जवाब से लोगों को खूब हंसाया। डॉ. सुरेंद्र दुबे ने धन्य-धन्य है छत्तीसगढ़…. कविता में छत्तीसगढ़ महतारी की महिमा का बखान किया। ये छत्तीसगढ़ की माटी है… कविता के जरिए छत्तीसगढ़ के धर्म, दर्शन, आस्था,लोक कला, गीत-संगीत, राज्य के संत-महापुरुषों-रचनाकारों, साहित्यकारों, देवी-देवताओं, व्यंजनों एवं महान विभूतियों का स्मरण कर श्रोताओं को भाव-विभोर करते हुए खूब तालियां बटोरी।
वीर रस के कवि देवेंद्र परिहार (मुंगेली) ने अपने शब्द बाण छोड़े। लड़कियों के सम्मान में- आंगन की तुलसी है, मंदिर की ज्योति है…. कविता प्रस्तुत की। रानी पद्मावती, पन्ना धाय जैसी वीरांगनाओं को अपनी कविताओं में स्मरण किया। राजनीति पर कटाक्ष करते हुए नारी की महत्ता को हर क्षेत्र में रेखांकित किया। कविता- कठिन तप से हमने सुनी है आजादी की शहनाई….से शहीदों को नमन किया तो वहीं भारत तेरे टुकड़े होंगे कहने वालों को चुनौती देते हुए कहा कि भारत एक है और इसके साथ ही भारत माता के जयकारे से पूरा परिसर गूंज उठा। राष्ट्रध्वज तिरंगा की महत्ता पर कहा कि- तिरंगा कोई आम झंडा नहीं यह जीवन की रेखा है, तिरंगे के नीचे हमने बढ़ते भारत को देखा है….। जाति-धर्म का भेद मिटाते हुए कहा कि- तिरंगा में मुझे मेरा राम और रहमान दिखता है, मेरी पूजा-प्रार्थना और अजान दिखता है….।
इसी कड़ी में श्रृंगार रस की कवयित्री कोरबा निवासी किरण सोनी ने कविताओं से समा बांधा। गीत लाल-गुलाबी-केसरिया रंगों की हो जाऊं….. की प्रस्तुति से खूब तालियां बटोरी। कवयित्री नंदिनी तिवारी नैनी ने गीत-गजल प्रस्तुत किया। कोई मस्ताना कमल कहते हैं, कोई मुश्किल का हल कहते हैं…..। कैसी यह मोहब्बत है जो सोने नहीं देती, आंखों में हंसी ख्वाब बोने नहीं देती….जैसे गीत-गजल से वाहवाही लूटी। नंदिनी तिवारी ने बालिकाओं के साथ दुष्कर्म की बढ़ती घटनाओं के लिए उनके पहनावे और पश्चिमी सभ्यता को जिम्मेदार बताने वालों को जवाब दिया कि-यह सारा दोष नजरों का है। कवि डॉ. सुरेंद्र दुबे को आयोजन के मुख्य अतिथि हाजी अखलाक खान ने स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। कोरबा प्रेस क्लब परिवार की ओर से वरिष्ठ पत्रकार किशोर शर्मा, प्रेस क्लब के संरक्षक कमलेश यादव कोषाध्यक्ष रंजन प्रसाद ने डॉ.सुरेंद्र दुबे को, छेदीलाल अग्रवाल, हरिराम चौरसिया व नरेंद्र रात्रे ने देवेंद्र परिहार, उपाध्यक्ष रामेश्वर ठाकुर एवं रंजन प्रसाद ने कवयित्री नंदिनी तिवारी नैनी तथा रमेश पाल और रमेश राठौर ने किरण सोनी को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।
कार्यक्रम के सह प्रायोजक मार डारे मया म सहित वालीवुड व छालीवुड फिल्मों के डायरेक्टर अधिवक्ता गजेन्द्र श्रीवास्तव, सुन्नी मुस्लिम जमात कोरबा के अध्यक्ष हाजी अखलाक खान व एनकेएच के डायरेक्टर डॉ. शोभराज चंदानी को स्मृति भेंट कर सम्मानित किया गया। आयोजन में प्रेस क्लब सचिव मनोज ठाकुर, कवि एवं साहित्य भवन समिति कोरबा के अध्यक्ष दिलीप अग्रवाल, उपाध्यक्ष कृष्ण कुमार चंद्रा, सचिव मुकेश चतुर्वेदी, श्रीमती अंजना ठाकुर, दीपक ठाकुर, हीरामणि वैष्णव के अलावा बड़ी संख्या में नगर के काव्य प्रेमी श्रोता जन उपस्थित रहे। आयोजन को सफल बनाने में कोरबा प्रेस क्लब के समस्त पदाधिकारियों एवं सदस्यों का सहयोग रहा।
पद्मश्री डॉ.सुरेंद्र दुबे ने आयोजन कराने के लिए कोरबा प्रेस क्लब को साधुवाद दिया। उन्होंने कहा कि अखबार आज भी विश्वसनीय और शाश्वत हैं। बदलते जमाने में प्रिंट मीडिया के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया ने काफी तेजी से वृद्धि की।

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