कोरबा

5 वर्षीय मासूम की मौत पर निगम ने दी ₹1 लाख की सहायता, आवारा कुत्तों के नियंत्रण अभियान पर उठे सवाल

कोरबा (ट्रैक सिटी)/ नगर पालिक निगम क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 34 स्थित ग्राम दादर में आवारा कुत्तों के हमले में 5 वर्षीय मासूम बालक की दर्दनाक मौत के बाद नगर निगम प्रशासन ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर गहरी संवेदनाएं व्यक्त की। इस दौरान नगर निगम की ओर से आर्थिक सहायता स्वरूप ₹1 लाख का चेक परिजनों को सौंपा गया।

निगम की ओर से कहा गया कि यह घटना अत्यंत दुखद एवं दुर्भाग्यपूर्ण है। दिवंगत बालक की आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हुए शोकाकुल परिवार को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की कामना की गई। साथ ही आश्वासन दिया गया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर आवश्यक एवं प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।

निगम का दावा बनाम जमीनी हकीकत

नगर निगम लंबे समय से पशु जन्म नियंत्रण (Animal Birth Control-ABC) कार्यक्रम के तहत आवारा कुत्तों की धरपकड़, नसबंदी, एंटी-रेबीज टीकाकरण और चिन्हांकन (ईयर टैगिंग) का अभियान चलाने का दावा करता रहा है। निगम के अनुसार इस अभियान का उद्देश्य आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित करना, रेबीज संक्रमण की रोकथाम करना तथा कुत्तों के आक्रामक व्यवहार को कम करना है। अभियान के तहत नसबंदी और टीकाकरण के बाद कुत्तों को नियमानुसार उसी क्षेत्र में छोड़ा जाता है।

इसके बावजूद शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में आवारा कुत्तों के झुंड खुलेआम घूमते दिखाई देते हैं। कई वार्डों से लगातार हमलों और आतंक की शिकायतें सामने आती रही हैं, जिससे निगम के अभियान की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

अब उठ रहे हैं कई सवाल

ग्राम दादर की घटना के बाद नागरिकों के बीच कई सवाल चर्चा का विषय बन गए हैं—

यदि निगम लगातार नसबंदी और टीकाकरण अभियान चला रहा है, तो आवारा कुत्तों की संख्या अब भी इतनी अधिक क्यों है?

क्या अभियान सभी वार्डों और ग्रामीण क्षेत्रों तक प्रभावी ढंग से पहुंच पा रहा है?

जिन क्षेत्रों से लगातार शिकायतें मिल रही हैं, वहां विशेष अभियान क्यों नहीं चलाया गया?

अभियान की निगरानी और परिणामों का स्वतंत्र मूल्यांकन क्यों नहीं किया जा रहा?

केवल मुआवजा नहीं, स्थायी समाधान जरूरी

पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता देना संवेदनशील कदम है, लेकिन यह घटना बताती है कि आवारा कुत्तों की समस्या का स्थायी समाधान अभी भी दूर है। विशेषज्ञों के अनुसार केवल नसबंदी और टीकाकरण ही नहीं, बल्कि ठोस कचरा प्रबंधन, नियमित निगरानी, शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई, संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान और जनजागरूकता जैसे उपायों को भी समान गंभीरता से लागू करना होगा।

ग्राम दादर की यह दर्दनाक घटना नगर निगम के लिए एक चेतावनी है कि पशु जन्म नियंत्रण और टीकाकरण अभियान की वास्तविक स्थिति की समीक्षा कर उसे अधिक प्रभावी बनाया जाए, ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े।

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