कोरबा (ट्रैक सिटी) बालको दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस) ने अपना 13वाँ वार्षिक समारोह अत्यंत उत्साह और उमंग के साथ मनाया गया, जिसमें भारत की सांस्कृतिक विरासत और शैक्षणिक उपलब्धियों का मनमोहक संगम देखने को मिला। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं निदेशक राजेश कुमार उपस्थित रहे। अपने प्रेरणादायी संबोधन में उन्होंने आधुनिक तकनीकी युग में सांस्कृतिक धरोहरों और परंपराओं के संरक्षण की सामूहिक जिम्मेदारी पर जोर दिया।
इस भव्य कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इसके बाद विद्यालय के बच्चों ने मधुर स्वागत गीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में प्रस्तुत सांस्कृतिक प्रदर्शन भारत की विविधता का सुंदर प्रतिबिंब थे। छेरछेरा, हरेली, पोंगल, बिहू और बैसाखी जैसे विभिन्न फसल त्योहारों पर आधारित आकर्षक नृत्य और प्रस्तुतियों ने सभी का मन मोह लिया। पुराणों से प्रेरित नाटक ‘भक्त प्रह्लाद’ दर्शकों की विशेष पसंद रही।

वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए डीपीएस बालको के प्राचार्य कैलाश पवार ने कहा कि हमनें इस वर्ष शैक्षणिक, सांस्कृतिक, खेलकूद और सहगामी गतिविधियों में उत्कृष्ट उपलब्धियाँ हासिल की हैं। हमारी एनसीसी यूनिट का पूर्ण रूप से सक्रिय होना विद्यार्थियों में अनुशासन, नेतृत्व और राष्ट्रभावना को मजबूत कर रहा है। बच्चों ने जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर जो उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है, उसने विद्यालय, अभिभावकों और बालको सभी का सम्मान बढ़ाया है। हमारे सभी शिक्षक विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर समर्पित हैं। हम यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि प्रत्येक बच्चा अपनी प्रतिभा को नई ऊँचाइयों तक पहुँचा सके।
बालको के सीईओ एवं निदेशक श्री कुमार ने कहा कि यह आवश्यक है कि हम सभी न केवल स्वयं में बल्कि अपने नवांकुर बच्चों में भी अनुशासन और मूल्यों के बीज बोएँ। इन नन्हे पौधों का सही पोषण और मार्गदर्शन ही उन्हें श्रेष्ठ नागरिक और गुणवत्तापूर्ण मानव बनने में सहायक होगा। उन्होंने कहा कि बालको डीपीएस का 13वाँ वार्षिक समारोह बालको की शिक्षा, संस्कृति और समग्र विकास के प्रति प्रतिबद्धता का सशक्त प्रतीक है। बच्चों ने जिस आत्मविश्वास, अनुशासन और रचनात्मकता के साथ अपनी प्रस्तुतियाँ दीं, वह विद्यालय के उत्कृष्ट मार्गदर्शन और बालको के सहयोग का परिणाम है। साथ ही सीईओ ने बच्चों से कहा कि आप सभी बड़े सपने देखिए, दृढ़ता से सीखते रहिए और अपनी क्षमताओं पर विश्वास रखिए, क्योंकि भविष्य उन्हीं का होता है जो निरंतर आगे बढ़ते हैं।
राष्ट्रीय एकता और विविधता में एकता का संदेश देते हुए यह रंगारंग शाम, भौगोलिक सीमाओं को मिटाते हुए, सभी के लिए अविस्मरणीय बन गई। समारोह का समापन एक हजार से अधिक उपस्थित दर्शकों द्वारा सामूहिक रूप से गाए गए राष्ट्रीय गान के साथ हुआ।

