15 साल पहले जमीन अधिग्रहण के बाद भी नौकरी नहीं मिलने का आरोप, तीन गांवों के ग्रामीणों ने बंद कराया राखड़ डैम का काम
कोरबा (ट्रैक सिटी)। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ताप विद्युत संयंत्र के गोढ़ी राखड़ डैम में शनिवार को उस समय हड़कंप की स्थिति निर्मित हो गई, जब तीन गांवों के ग्रामीणों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर राखड़ डैम का काम बंद करा दिया और मौके पर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया।
ग्रामीणों का कहना है कि करीब 15 वर्ष पूर्व राखड़ डैम के लिए उनकी जमीन का अधिग्रहण किया गया था, लेकिन जमीन अधिग्रहण के इतने वर्षों बाद भी प्रभावित परिवारों को नौकरी नहीं मिल पाई है। लंबे समय से रोजगार की मांग पूरी नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी बनी हुई थी। इसी नाराजगी के चलते ग्रामीणों ने एकजुट होकर राखड़ डैम पहुंचकर काम बंद कराया और धरने पर बैठ गए।
तीन गांवों के ग्रामीण बैठे धरने पर
धरना-प्रदर्शन शुरू होने के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुट गए। ग्रामीणों ने जमीन अधिग्रहण के एवज में रोजगार दिए जाने की मांग प्रमुखता से उठाई। उनका कहना था कि वर्षों पहले परियोजना के लिए जमीन देने के बावजूद प्रभावित परिवार आज भी रोजगार के लिए भटक रहे हैं। ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों से उनकी मांगों का शीघ्र निराकरण करने की मांग की।
एसडीएम मौके पर पहुंचे, समझाइश के बाद धरना समाप्त
ग्रामीणों के धरना-प्रदर्शन की जानकारी मिलने के बाद जिला प्रशासन की ओर से एसडीएम कोरबा मौके पर पहुंचे। उन्होंने धरना स्थल पर ग्रामीणों से चर्चा की और उनकी समस्याओं व मांगों को सुना। एसडीएम ने ग्रामीणों को समझाइश देते हुए उनकी मांगों के संबंध में नियमानुसार कार्रवाई का भरोसा दिलाया।
एसडीएम की समझाइश और अधिकारियों से चर्चा के बाद ग्रामीणों ने अपना धरना-प्रदर्शन समाप्त कर दिया। इसके बाद गोढ़ी राखड़ डैम में उत्पन्न गतिरोध फिलहाल समाप्त हो गया।
15 साल पुराने मामले के समाधान का इंतजार
ग्रामीणों का कहना है कि उनकी मुख्य मांग जमीन अधिग्रहण से प्रभावित परिवारों को रोजगार दिलाने की है। अब प्रशासन की समझाइश के बाद धरना तो समाप्त हो गया है, लेकिन ग्रामीणों की नजर इस बात पर रहेगी कि उनकी वर्षों पुरानी मांग पर कब तक ठोस कार्रवाई होती है। यदि मांगों का समाधान नहीं हुआ तो ग्रामीण आगे फिर आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं।

