कोरबा

अस्पताल में भ्रूण मिलने से हड़कंप, जांच से पहले हटाने पर उठे सवाल

कोरबा (ट्रैक सिटी)। पुराने कोरबा शहर स्थित रानी धनराज कुंवर देवी अस्पताल में सोमवार की दोपहर को उस समय हड़कंप मच गया, जब अस्पताल के बाथरूम में सफाई कर्मचारियों को एक मानव भ्रूण मिला। घटना की सूचना अस्पताल के सुपरवाइजर को दिए जाने के बाद भ्रूण को घटनास्थल से हटा दिया गया। पुलिस और एफएसएल टीम के मौके पर पहुंचने से पहले ही भ्रूण को हटाए जाने की जानकारी सामने आने के बाद जांच टीम ने नाराजगी जताई। फिलहाल पुलिस ने भ्रूण को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम और आगे की जांच की कार्रवाई शुरू कर दी है।

सफाई कर्मचारी ने देखा भ्रूण, सुपरवाइजर को दी जानकारी
जानकारी के अनुसार, अस्पताल में सफाई का काम कर रहे कर्मचारियों को बाथरूम से बहुत ज्यादा बदबू आने पर वहां जाकर देखने पर में मानव भ्रूण दिखाई दिया। सफाई कर्मचारी चिन्ना ने तत्काल इसकी जानकारी अस्पताल के सुपरवाइजर पवन साहू को दी। इसके बाद, बताया जा रहा है कि सुपरवाइजर के कहने पर सफाई कर्मचारी चिन्ना ने भ्रूण को बाथरूम से उठाकर प्लास्टिक के बैग में भरकर एक बॉक्स में बंद करके अस्पताल के छत पर रख दिया था।

इसके बाद पुलिस को घटना की सूचना दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस टीम के साथ एफएसएल की टीम भी मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की।

जांच टीम के पहुंचने से पहले हटाया गया भ्रूण
मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह सामने आई कि पुलिस और एफएसएल टीम के पहुंचने से पहले ही भ्रूण को घटनास्थल से हटा दिया गया था। घटनास्थल पर पहुंची जांच टीम ने इस स्थिति को लेकर नाराजगी जताई। किसी संदिग्ध या संवेदनशील घटना में घटनास्थल को यथास्थिति में सुरक्षित रखना जांच के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है, ताकि वहां मौजूद परिस्थितियों और संभावित साक्ष्यों की जांच की जा सके।

ऐसे में भ्रूण को पहले ही हटाए जाने से घटनास्थल की मूल स्थिति प्रभावित होने की बात सामने आ रही है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि भ्रूण को किस परिस्थिति में बाथरूम में छोड़ा गया और उसे हटाने का निर्णय किन परिस्थितियों में लिया गया।

अस्पताल की सीसीटीवी व्यवस्था भी जांच के घेरे में
घटना के बाद अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था और सीसीटीवी कैमरों को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि अस्पताल परिसर में लगे कुछ कैमरे व्यवस्थित स्थिति में नहीं थे। ऐसे में अस्पताल में आने-जाने वाले लोगों की गतिविधियों की निगरानी और घटना से जुड़े संभावित सुराग जुटाना जांच टीम के लिए चुनौती हो सकता है।
पुलिस के लिए यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि घटना से पहले और बाद में अस्पताल परिसर में कौन-कौन लोग मौजूद थे। यदि सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध है तो उसके आधार पर भी घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने का प्रयास किया जा सकता है।

अस्पताल प्रबंधन से भी मांगा गया पक्ष
घटना को लेकर अस्पताल के प्रमुख डॉक्टर अतीक सिद्दीकी से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया। उनसे भ्रूण मिलने, घटनास्थल से उसे हटाए जाने और अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े सवाल किए गए। हालांकि, बातचीत के दौरान वे घटना को लेकर स्पष्ट जवाब देने के बजाय गोल-मोल जवाब देते नजर आए।
इसके बाद उन्होंने ड्यूटी समय में पारिवारिक कार्य का हवाला दिया और अस्पताल परिसर से चले गए। अस्पताल प्रबंधन का विस्तृत और स्पष्ट पक्ष सामने नहीं आ सका है। ऐसे में घटना को लेकर अस्पताल प्रबंधन की भूमिका और घटनास्थल से भ्रूण हटाए जाने के निर्णय पर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, इन सभी बिंदुओं पर अंतिम स्थिति पुलिस की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
कई सवालों के जवाब जांच के बाद आएंगे सामने
इतने बड़े अस्पताल परिसर के बाथरूम में मानव भ्रूण मिलने की घटना अपने आप में कई सवाल खड़े करती है। भ्रूण अस्पताल तक कैसे पहुंचा? उसे वहां किसने और कब छोड़ा? क्या अस्पताल में किसी महिला का गर्भपात हुआ था? यदि ऐसा हुआ तो क्या उसकी जानकारी अस्पताल के रिकॉर्ड में दर्ज है? घटनास्थल से भ्रूण को जांच टीम के पहुंचने से पहले क्यों हटाया गया? और अस्पताल के सीसीटीवी कैमरों की वास्तविक स्थिति क्या है?
इन तमाम सवालों के जवाब पुलिस जांच, एफएसएल रिपोर्ट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अस्पताल के रिकॉर्ड की जांच के बाद सामने आने की उम्मीद है।
फिलहाल पुलिस ने भ्रूण को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम एवं आवश्यक जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुलिस और एफएसएल टीम द्वारा घटनास्थल से उपलब्ध साक्ष्यों को जुटाया जा रहा है। मामले की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि अस्पताल के बाथरूम में मानव भ्रूण किन परिस्थितियों में पहुंचा और इस पूरे घटनाक्रम के लिए कौन जिम्मेदार है।

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