रायपुर/कोरबा (ट्रैक सिटी)। छत्तीसगढ़ भाजपा में प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष किरण सिंह देव सड़क हादसे में घायल होने के बाद उपचाराधीन हैं और उनकी संगठनात्मक सक्रियता फिलहाल सीमित है। ऐसे में पार्टी संगठन की जिम्मेदारी संभालने के लिए कार्यकारी अध्यक्ष अथवा नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम को लेकर अटकलों का दौर शुरू हो गया है।
इसी बीच केंद्रीय राज्य मंत्री और बिलासपुर सांसद तोखन साहू के दिल्ली बुलाए जाने की खबर ने इन चर्चाओं को और हवा दे दी है। राजनीतिक गलियारों में इसे भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के साथ संभावित संगठनात्मक जिम्मेदारी को लेकर चर्चा से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, भाजपा की ओर से अभी तक तोखन साहू को कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
तोखन साहू का नाम क्यों चर्चा में?
तोखन साहू वर्तमान में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री हैं और बिलासपुर लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। पार्टी के भीतर उनके नाम की चर्चा के पीछे उनका संसदीय अनुभव, संगठनात्मक स्वीकार्यता और छत्तीसगढ़ के OBC समीकरण को प्रमुख कारण माना जा रहा है।
दिलचस्प बात यह है कि खुद तोखन साहू ने अटकलों के बीच कहा है कि वे पार्टी के छोटे से कार्यकर्ता हैं और पार्टी जो जिम्मेदारी देगी, उसे निभाएंगे। उनके इस बयान को राजनीतिक जानकार केंद्रीय नेतृत्व के निर्णय को स्वीकार करने की उनकी तैयारी के संकेत के रूप में देख रहे हैं।
OBC समीकरण साधने की रणनीति?
छत्तीसगढ़ की राजनीति में पिछड़ा वर्ग एक महत्वपूर्ण राजनीतिक आधार है। ऐसे में यदि भाजपा केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू को संगठन की कमान सौंपती है, तो इसे सामाजिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण संदेश के तौर पर देखा जा सकता है।
साहू समाज की प्रदेश में मजबूत सामाजिक मौजूदगी है। ऐसे में तोखन साहू को प्रदेश संगठन में बड़ी जिम्मेदारी देने से भाजपा के लिए OBC प्रतिनिधित्व को मजबूत करने का राजनीतिक लाभ मिल सकता है।
बिलासपुर संभाग पर भी नजर
तोखन साहू के नाम की चर्चा का एक दूसरा महत्वपूर्ण पहलू बिलासपुर संभाग है। भाजपा का बस्तर और सरगुजा में मजबूत संगठनात्मक आधार माना जाता है, जबकि बिलासपुर संभाग में पार्टी के सामने अपनी पकड़ और मजबूत करने की राजनीतिक संभावना बनी हुई है।
बिलासपुर लोकसभा सीट से सांसद और केंद्र में मंत्री होने के कारण तोखन साहू को प्रदेश संगठन की जिम्मेदारी मिलती है तो पार्टी को इस क्षेत्र में संगठनात्मक विस्तार का लाभ मिल सकता है।
रेस में कई दिग्गज
हालांकि मुकाबला सिर्फ तोखन साहू तक सीमित नहीं माना जा रहा। भाजपा के भीतर पूर्व विधायक शिवरतन शर्मा, कुरुद विधायक अजय चंद्राकर, राजनांदगांव सांसद संतोष पांडेय और रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल के नामों की भी चर्चा है।
ऐसे में अंतिम फैसला भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व ही करेगा। फिलहाल तोखन साहू का अचानक दिल्ली बुलाया जाना और उसके बाद उनके नाम की चर्चा ने प्रदेश भाजपा की राजनीति का तापमान जरूर बढ़ा दिया है।
किरण देव की सक्रियता पर बनी नजर
किरण सिंह देव जुलाई में सड़क हादसे में घायल हुए थे। हादसे के बाद उन्हें पहले झांसी मेडिकल कॉलेज और फिर बेहतर उपचार के लिए दिल्ली के मेदांता अस्पताल रेफर किया गया था। उनकी रीढ़ की हड्डी में चोट की पुष्टि की गई थी।
हालांकि उपचार के दौरान भी वे राजनीतिक गतिविधियों से पूरी तरह अलग नहीं हुए हैं। 30 अगस्त को मेदांता अस्पताल में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम को सुना।
अभी फैसला बाकी
कार्यकारी अध्यक्ष या नया प्रदेश अध्यक्ष?
भाजपा के भीतर फिलहाल यही सबसे बड़ा सवाल है। यदि किरण सिंह देव के स्वस्थ होने तक संगठनात्मक गतिविधियों के लिए अंतरिम व्यवस्था की जाती है तो कार्यकारी अध्यक्ष की नियुक्ति हो सकती है। वहीं केंद्रीय नेतृत्व यदि व्यापक संगठनात्मक बदलाव का फैसला करता है तो नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति भी संभव है।
फिलहाल तोखन साहू का नाम सबसे अधिक चर्चा में है, लेकिन इसे अभी राजनीतिक अटकल ही माना जाना चाहिए। अंतिम निर्णय भाजपा केंद्रीय नेतृत्व के हाथ में है।

