रायपुर/कोरबा(ट्रैक सिटी)। बारिश की हर बूंद को सहेजने और उसे धरती के भीतर पहुंचाकर भविष्य के लिए जल सुरक्षित करने की दिशा में छत्तीसगढ़ ने राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। जल शक्ति मंत्रालय के ‘जल संचय जन भागीदारी’ (JSJB) अभियान के तीसरे चरण में छत्तीसगढ़ ने देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। इतना ही नहीं, प्रदेश के पांच जिले देश के टॉप-10 जिलों में शामिल हुए हैं।
नई दिल्ली के सुषमा स्वराज भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित जल शक्ति मंत्रालय के विभागीय शिखर सम्मेलन में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण के लिए किए जा रहे नवाचारों और जनभागीदारी आधारित प्रयासों को राष्ट्रीय मंच पर साझा किया। सम्मेलन के ‘कैच द रेन’ सत्र में उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने वर्षा जल संचयन, भू-जल पुनर्भरण और पेयजल स्रोतों के संरक्षण से जुड़े कार्यों की जानकारी दी। सम्मेलन में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल सहित विभिन्न राज्यों के जल संसाधन मंत्री एवं वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
सरकारी योजना नहीं, जनअभियान बना जल संरक्षण
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने जल संरक्षण को केवल सरकारी योजनाओं अथवा जल संरचनाओं के निर्माण तक सीमित नहीं रखा है। किसानों, ग्राम पंचायतों, जल सखियों, जल मित्रों और स्थानीय समुदायों को अभियान से जोड़कर इसे जनअभियान का स्वरूप दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वे किसान परिवार से आते हैं और खेती तथा ग्रामीण जीवन में पानी के महत्व को करीब से समझते हैं। किसान के लिए पानी उसकी फसल, परिवार, आजीविका और भविष्य से सीधे जुड़ा है। इसी सोच के साथ राज्य में जल संरक्षण की योजनाओं के केंद्र में किसान और गांव को रखा गया है।
कोरिया का ‘5 प्रतिशत मॉडल’ बना आकर्षण का केंद्र
राष्ट्रीय सम्मेलन में मुख्यमंत्री साय ने कोरिया जिले से शुरू हुए ‘5 प्रतिशत मॉडल’ का विशेष उल्लेख किया। इस मॉडल में किसान अपनी कृषि भूमि का लगभग पांच प्रतिशत हिस्सा भू-जल पुनर्भरण और वर्षा जल संचयन के लिए स्वेच्छा से उपलब्ध करा रहे हैं।
इस भूमि पर ऐसी जल संरचनाएं विकसित की जा रही हैं, जिससे बारिश का पानी खेत से बहकर बाहर जाने के बजाय उसी क्षेत्र में एकत्र हो और धीरे-धीरे जमीन के भीतर पहुंचे। इस पहल की खासियत यह है कि किसान केवल योजना के लाभार्थी नहीं, बल्कि जल संरक्षण के सक्रिय भागीदार बन रहे हैं।
पंचायतों, स्थानीय समुदायों और विभिन्न विभागों के समन्वय से संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है। इनकी जियो-टैगिंग, नियमित मॉनिटरिंग और प्रगति की समीक्षा भी अभियान का हिस्सा है। जल सखी, जल मित्र, किसान और पंचायत प्रतिनिधि गांव-गांव में इस मुहिम को आगे बढ़ा रहे हैं।
JSJB 3.0 में छत्तीसगढ़ प्रथम, आंकड़ों में भी बड़ी छलांग
जल संचय जन भागीदारी अभियान के तीसरे चरण में छत्तीसगढ़ ने देश में पहला स्थान हासिल किया है। इससे पहले भी राज्य का प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा है।
JSJB 1.0: 4,05,561 जल संरचनाएं दर्ज की गईं और छत्तीसगढ़ देश में दूसरे स्थान पर रहा।
JSJB 2.0: 24,07,456 जल संरचनाएं दर्ज हुईं, जिनमें 23,07,768 का कार्य पूर्ण हो चुका है। इस चरण में भी राज्य दूसरे स्थान पर रहा।
JSJB 3.0: 79,775 जल संरचनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 77,719 का कार्य पूरा हो चुका है। इस चरण में छत्तीसगढ़ देश में प्रथम रहा।
इन प्रयासों का उद्देश्य बारिश के पानी को बहकर बाहर जाने से रोकना, स्थानीय स्तर पर उसका संचयन करना और अधिक से अधिक पानी को जमीन के भीतर पहुंचाना है।
छत्तीसगढ़ के पांच जिले टॉप-10 में
राज्य की उपलब्धि के साथ प्रदेश के जिलों ने भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। सूरजपुर, महासमुंद, बालोद, बलौदाबाजार-भाटापारा और कबीरधाम देश के शीर्ष 10 जिलों में शामिल हुए हैं।
इन जिलों में ग्राम पंचायत और स्थानीय समुदायों को जोड़कर वर्षा जल संचयन तथा भू-जल पुनर्भरण के कार्यों को गति दी गई है। स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार जल संरचनाओं का निर्माण और जनभागीदारी इस मॉडल की प्रमुख विशेषता रही है।
पानी की कमी वाले ब्लॉक 26 से घटकर 19
राज्य में जल संरक्षण के प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आने का दावा किया गया है। छत्तीसगढ़ में पानी की कमी वाले ब्लॉकों की संख्या 26 से घटकर 19 रह गई है। वहीं, पांच क्रिटिकल ब्लॉकों के भी सामान्य श्रेणी में आने का अनुमान जताया गया है।
पुराने जल स्रोतों के संरक्षण, भू-जल पुनर्भरण, जल संरचनाओं की मैपिंग और नियमित निगरानी के माध्यम से भू-जल स्थिति सुधारने पर जोर दिया जा रहा है।
‘जहां जल गिरे, वहीं सहेजें’ पर फोकस
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘कैच द रेन—जहां जल गिरे, वहीं सहेजें’ संदेश को राज्य में स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप लागू किया जा रहा है। लक्ष्य है कि बारिश का अधिकतम पानी गांव और खेत की सीमा के भीतर ही रोक लिया जाए।
इससे भू-जल पुनर्भरण के साथ सिंचाई और पेयजल के लिए पानी की उपलब्धता बेहतर होने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ अपने जल संरक्षण के अनुभव और सफल मॉडलों को देश के अन्य राज्यों के साथ साझा करने के लिए तैयार है।
हर राज्य का अपना ‘कैच द रेन प्लान’ बनाने का सुझाव
मुख्यमंत्री साय ने सम्मेलन में सुझाव दिया कि प्रत्येक राज्य अपनी भौगोलिक परिस्थितियों, वर्षा के स्वरूप, भू-जल स्थिति और स्थानीय आवश्यकताओं के आधार पर अलग ‘कैच द रेन प्लान’ तैयार करे।
उन्होंने बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों को प्रोत्साहित करने के लिए ‘स्टेट वाटर अवार्ड्स’ शुरू करने, BISAG-N के माध्यम से जल संरचनाओं की मैपिंग मजबूत करने तथा मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हर तीन महीने में अभियान की समीक्षा करने का सुझाव दिया।
दो करोड़ नई जल संरचनाओं का राष्ट्रीय लक्ष्य
देश में 31 मई 2027 तक दो करोड़ नई जल संरचनाएं बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। ऐसे में छत्तीसगढ़ का जनभागीदारी आधारित मॉडल राष्ट्रीय लक्ष्य को पूरा करने में उपयोगी साबित हो सकता है।
खेतों और गांवों में बारिश का पानी रोकने से भू-जल स्तर में सुधार के साथ सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ सकती है। इससे खेती की मानसून पर निर्भरता कम करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
छत्तीसगढ़ की पहल यह संदेश देती है कि जल संरक्षण केवल सरकारी विभागों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सरकार, किसान, पंचायत और समाज की साझा जिम्मेदारी है। खेत का पांच प्रतिशत हिस्सा जल संरक्षण के लिए छोड़ने जैसी पहल आने वाले वर्षों में जल सुरक्षा की दिशा में बड़ा बदलाव ला सकती है।
यदि चाहें तो इसे मैं ट्रैक सिटी के फ्रंट पेज की शैली में और ज्यादा प्रभावशाली हेडिंग, सबहेडिंग और ‘आंकड़ों का बॉक्स’ के साथ भी तैयार कर सकता हूं।
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