कोरबा (ट्रैक सिटी)। कोरबा शहर विकास की तेज रफ्तार के साथ लगातार विस्तार की ओर बढ़ रहा है। शहर की आबादी बढ़ने के साथ रोजाना होने वाली आवाजाही और दोपहिया-चारपहिया वाहनों की संख्या में भी लगातार इजाफा हो रहा है। विकास की यह तस्वीर जहां शहर की बदलती जरूरतों और बढ़ती आर्थिक गतिविधियों को दर्शाती है, वहीं सड़कों पर बढ़ता यातायात दबाव अब गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है।
शहर की प्रमुख सड़कों के साथ उपनगरीय क्षेत्रों में भी दिन के व्यस्त समय में यातायात का दबाव स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। कई स्थानों पर वाहन चालकों को जाम और धीमी रफ्तार का सामना करना पड़ता है। आने वाले वर्षों में यदि इसी गति से वाहनों की संख्या बढ़ती रही तो वर्तमान सड़क व्यवस्था पर दबाव और अधिक बढ़ना तय है।
वैकल्पिक मार्गों की तलाश जरूरी
शहर में यातायात का दबाव कम करने के लिए केवल प्रमुख सड़कों को चौड़ा करना ही स्थायी समाधान नहीं हो सकता। इसके साथ ही वैकल्पिक मार्गों, लिंक रोड और नए संपर्क मार्गों का विकास जरूरी है। शहर के अलग-अलग हिस्सों को आपस में जोड़ने वाले ऐसे मार्ग तैयार किए जाने चाहिए, जिससे मुख्य सड़कों पर वाहनों का दबाव विभाजित हो सके।
विशेषकर औद्योगिक क्षेत्रों, बाजारों, आवासीय क्षेत्रों और उपनगरीय इलाकों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी विकसित करने की जरूरत है। भविष्य की आबादी और वाहन संख्या को ध्यान में रखकर अभी से यातायात का मास्टर प्लान तैयार किया जाना समय की मांग है।
सड़क पर अतिक्रमण भी बड़ी वजह
यातायात की समस्या के लिए केवल वाहनों की बढ़ती संख्या को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। शहर के कई बाजार क्षेत्रों में दुकानदारों द्वारा दुकानों के सामने सामान फैलाकर रखने, सड़क तक चबूतरे बढ़ाने और अस्थायी कब्जे करने से सड़क की वास्तविक चौड़ाई कम हो जाती है। इसके अलावा दुकानों के सामने लगाए जाने वाले बड़े और अवैध पोस्टर-बैनर भी आवागमन में बाधा बनते हैं।
कई स्थानों पर सड़क और फुटपाथ का उपयोग दुकान के विस्तार के रूप में किया जा रहा है। इससे पैदल चलने वालों को भी सड़क पर उतरना पड़ता है और वाहनों के लिए उपलब्ध जगह और कम हो जाती है। परिणामस्वरूप व्यस्त समय में यातायात व्यवस्था और ज्यादा प्रभावित होती है।
सिर्फ कार्रवाई नहीं, स्थायी व्यवस्था की जरूरत
प्रशासन और नगर निगम द्वारा समय-समय पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाती है, लेकिन कार्रवाई के बाद दोबारा कब्जे की स्थिति बनने से समस्या जस की तस रह जाती है। जरूरत इस बात की है कि सड़क की सीमा स्पष्ट करने, फुटपाथ खाली रखने, दुकानों के सामने सामान रखने की सीमा तय करने और अवैध पोस्टर-बैनर पर स्थायी नियंत्रण की व्यवस्था बनाई जाए।
कोरबा के तेजी से बढ़ते शहरी स्वरूप को देखते हुए अब यातायात व्यवस्था को तत्कालीन समस्या के बजाय भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित करने की आवश्यकता है। सड़कें शहर की जीवनरेखा हैं। यदि विकास की रफ्तार के साथ यातायात प्रबंधन और सड़क नेटवर्क का विस्तार नहीं किया गया तो आने वाले समय में बढ़ता ट्रैफिक शहर के विकास की रफ्तार पर ही ब्रेक लगा सकता है।

