ठेकेदार टिकट काट रहा, निगम की रसीद बुक में वसूली; बेतरतीब पार्किंग रोकने की जिम्मेदारी किसकी?
कोरबा (ट्रैक सिटी)। शहर की बढ़ती पार्किंग समस्या से निजात दिलाने के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर तैयार की गई समृद्धि मल्टीलेवल पार्किंग अब सवालों के घेरे में है। सुविधा का लोकार्पण हो चुका है, निजी ठेकेदार के माध्यम से संचालन भी शुरू है और वाहनों से बाकायदा रसीद काटकर पार्किंग शुल्क लिया जा रहा है। इसके बावजूद शहर की सड़कों पर बेतरतीब खड़े वाहनों की समस्या जस की तस दिखाई देती है।
सवाल सीधा है—जब करोड़ों रुपए खर्च कर पार्किंग बनाई गई है और इसे संचालन के लिए ठेके पर भी दिया गया है, तो शहर की सड़कों से वाहनों को मल्टीलेवल पार्किंग तक पहुंचाने की व्यवस्था आखिर कौन करेगा?

रसीद पर निगम का नाम, संचालन ठेकेदार के हाथ
मल्टीलेवल पार्किंग में पार्किंग शुल्क की वसूली बाकायदा रसीद बुक के माध्यम से की जा रही है। जानकारी के मुताबिक ठेकेदार द्वारा वाहन चालकों को दी जा रही रसीद पर ‘समृद्धि मल्टीलेवल पार्किंग नगर पालिका निगम कोरबा’ अंकित है।
यहीं से व्यवस्था की पारदर्शिता को लेकर कई सवाल खड़े होते हैं।
यदि पार्किंग का संचालन निजी ठेकेदार को दिया गया है तो रसीद व्यवस्था किस नियम के तहत संचालित हो रही है? पार्किंग शुल्क की दरें क्या हैं? निगम द्वारा निर्धारित दरों का बोर्ड परिसर में प्रमुखता से क्यों नहीं लगाया गया? ठेकेदार को संचालन की कौन-कौन सी जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं? और निगम इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी किस तरह कर रहा है?
इन सवालों का स्पष्ट जवाब सामने आना जरूरी है।
ठेका दिया, लेकिन पार्किंग में वाहन आएंगे कैसे?
मल्टीलेवल पार्किंग बनाने का सबसे बड़ा उद्देश्य शहर की सड़कों पर होने वाली अव्यवस्थित पार्किंग को कम करना है। लेकिन जमीनी स्थिति यह सवाल खड़ा कर रही है कि सड़क पर खड़े वाहन अपने आप मल्टीलेवल पार्किंग में नहीं पहुंचेंगे।
इसके लिए निगम को ठेकेदार के साथ मिलकर स्पष्ट रणनीति बनानी होगी। प्रमुख बाजारों और व्यस्त मार्गों पर सूचना बोर्ड, दिशा संकेतक, पार्किंग की जानकारी और सड़क किनारे वाहन खड़े करने वालों को वैकल्पिक पार्किंग स्थल तक पहुंचाने की व्यवस्था जरूरी है।
यदि यह सब नहीं होता है तो मल्टीलेवल पार्किंग अपने उद्देश्य से भटककर महज टिकट काटने और शुल्क वसूली की सुविधा बनकर रह सकती है।
निगम की भूमिका सिर्फ ठेका देने तक?
सबसे अहम सवाल नगर निगम की भूमिका को लेकर है।
क्या निगम ने ठेका देते समय यह शर्त रखी है कि ठेकेदार को पार्किंग की क्षमता का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना होगा? क्या आसपास के क्षेत्रों में अवैध या बेतरतीब पार्किंग रोकने की जिम्मेदारी किसी अधिकारी या एजेंसी को दी गई है? यदि लोग सड़क पर ही वाहन खड़ा करते हैं तो उन्हें मल्टीलेवल पार्किंग तक लाने के लिए क्या कार्रवाई की जाएगी?
सिर्फ ठेका देने और टिकट कटवाने से शहर की पार्किंग समस्या खत्म नहीं होगी।
निगम को यह सुनिश्चित करना होगा कि जिस उद्देश्य से पार्किंग का निर्माण हुआ है, वह उद्देश्य जमीन पर दिखाई भी दे।
ठेकेदार को घाटा हुआ तो?
इस पूरी व्यवस्था में भविष्य को लेकर भी एक बड़ा सवाल है। यदि पार्किंग में पर्याप्त वाहन नहीं आते और ठेकेदार को आर्थिक नुकसान होने लगता है तो क्या होगा?
क्या ठेकेदार ऐसी स्थिति में ठेका छोड़ सकता है? यदि वह संचालन से पीछे हटता है तो निगम की वैकल्पिक व्यवस्था क्या होगी? क्या करोड़ों रुपए से बनी यह सुविधा फिर से संचालन के संकट में फंस जाएगी?
सार्वजनिक धन से तैयार की गई ऐसी महत्वपूर्ण सुविधा के लिए निगम के पास स्पष्ट दीर्घकालीन संचालन योजना होना जरूरी है।
दरें सार्वजनिक करना भी जरूरी
पार्किंग में वाहन खड़ा करने वाले नागरिकों के लिए शुल्क की निर्धारित दरों की स्पष्ट जानकारी उपलब्ध होना बेहद जरूरी है। परिसर में प्रमुख स्थानों पर दोपहिया और चारपहिया वाहनों की पार्किंग दर, समयावधि और अन्य शुल्कों की सूची प्रदर्शित की जानी चाहिए।
इससे वाहन चालकों को पता रहेगा कि उनसे कितना शुल्क लिया जाना है और किसी तरह की मनमानी की संभावना भी कम होगी।
करोड़ों की सुविधा का हिसाब उपयोगिता से
मल्टीलेवल पार्किंग शहर के लिए जरूरी सुविधा है। इसमें कोई दो राय नहीं कि व्यवस्थित पार्किंग से बाजार क्षेत्रों में यातायात का दबाव कम किया जा सकता है। लेकिन करोड़ों रुपए की लागत से बनी परियोजना की सफलता सिर्फ इसके निर्माण और उद्घाटन से तय नहीं होगी।
सफलता तब मानी जाएगी, जब सड़क किनारे बेतरतीब खड़े वाहनों की संख्या घटे, पार्किंग स्थल में पर्याप्त वाहन पहुंचें, नागरिकों को सुविधा मिले और यातायात व्यवस्था में वास्तविक सुधार दिखाई दे।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है—
करोड़ों की मल्टीलेवल पार्किंग बन गई, ठेका भी हो गया, टिकट भी कटने लगे… लेकिन शहर की सड़कों से वाहन मल्टीलेवल पार्किंग तक पहुंचेंगे कैसे?
अब नगर निगम को यह स्पष्ट करना होगा कि ठेके की शर्तें क्या हैं, ठेकेदार की जिम्मेदारी कितनी है, निर्धारित पार्किंग शुल्क क्या है और सड़क पर बेतरतीब खड़े वाहनों को मल्टीलेवल पार्किंग में शिफ्ट कराने की ठोस व्यवस्था क्या बनाई गई है।
