कोरबा (ट्रैक सिटी)। दुर्ग–रायपुर–आरंग बायपास एनएचएआई परियोजना के लिए एनटीपीसी कोरबा से भेजी जा रही फ्लाई ऐश के परिवहन में गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। निर्धारित डिस्पोजल साइट तक पहुंचने के बजाय फ्लाई ऐश को रास्ते में अन्य स्थान पर, सरकारी जमीन पर डंप किए जाने के मामले ने पर्यावरणीय अनुपालन के साथ-साथ एनटीपीसी, एनएचएआई और परिवहन एजेंसी की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामले में पर्यावरण विभाग ने कार्रवाई करते हुए एनटीपीसी प्रबंधन पर 90 लाख रुपए की पेनाल्टी लगाई है। वहीं, एनटीपीसी कोरबा प्रबंधन ने फ्लाई ऐश परिवहन में लगी संबंधित एजेंसी को अनधिकृत स्थान पर डंप की गई राख को तत्काल उठाकर निर्धारित डिस्पोजल साइट पर पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।
छुरीखुर्द के पास पकड़ी गई थी करीब 200 टन राख
बताया गया है कि पिछले दिनों छुरीखुर्द के पास चार ट्रकों में करीब 200 टन फ्लाई ऐश को सरकारी जमीन पर डंप किया जा रहा था। रात में इसकी जानकारी मिलने पर पर्यावरण विभाग की टीम मौके पर पहुंची और कार्रवाई की। विभाग की कार्रवाई के बाद एनटीपीसी पर 90 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया।
यह मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि फ्लाई ऐश को एनएचएआई की सड़क परियोजना में उपयोग के लिए निर्धारित स्थल तक पहुंचाया जाना था। इसके बजाय राख को बीच रास्ते में ही अन्य स्थान पर डंप कर दिया गया।
NTPC ने एजेंसी को दिए तत्काल राख हटाने के निर्देश
मामला सामने आने के बाद एनटीपीसी कोरबा प्रबंधन ने संबंधित एजेंसी को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि अनधिकृत स्थान पर डंप की गई पूरी फ्लाई ऐश को तत्काल वहां से उठाया जाए और उसे निर्धारित डिस्पोजल साइट तक पहुंचाकर नियमों के अनुसार निस्तारित किया जाए।
प्रबंधन ने यह भी स्पष्ट किया है कि निर्धारित स्थल के अलावा किसी अन्य स्थान पर फ्लाई ऐश डंप किया जाना स्वीकार्य नहीं है। इस उल्लंघन के कारण राख को दोबारा उठाने, निर्धारित स्थल तक परिवहन करने और आवश्यक कार्रवाई में होने वाला पूरा खर्च संबंधित एजेंसी को ही वहन करना होगा।
इसके अलावा नियमों के उल्लंघन के कारण यदि कोई जुर्माना अथवा अन्य आर्थिक दायित्व उत्पन्न होता है, तो उसकी जिम्मेदारी भी संबंधित एजेंसी पर डाली गई है। यह जानकारी एनटीपीसी प्रबंधन के जनसंपर्क अधिकारी द्वारा की गई हैं।
एक तरफ NTPC पर जुर्माना, दूसरी तरफ एजेंसी पर जिम्मेदारी
मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि पर्यावरण विभाग ने कार्रवाई करते हुए एनटीपीसी को जिम्मेदार मानकर 90 लाख रुपए की पेनाल्टी लगाई, जबकि एनटीपीसी प्रबंधन की ओर से कहा जा रहा है कि फ्लाई ऐश की ट्रांसपोर्टिंग उसकी जिम्मेदारी में नहीं है और परिवहन का जिम्मा एनएचएआई को दिया गया है।
एनटीपीसी के एजीएम शशि शेखर का कहना है कि ट्रांसपोर्टिंग एनटीपीसी की जिम्मेदारी में नहीं है। उन्होंने कहा कि एनटीपीसी ने एनएचएआई को जिम्मा दे दिया है और इस घटना में एनटीपीसी का कोई हाथ नहीं है।
हालांकि, जुर्माने के भुगतान और कंपनी को हुए आर्थिक नुकसान की जिम्मेदारी किसकी होगी, इस सवाल पर उनकी ओर से कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया।
पर्यावरण विभाग का तर्क—राख की जिम्मेदारी NTPC की
वहीं क्षेत्रीय पर्यावरण संरक्षण अधिकारी श्री प्रसन्ना के अनुसार विभाग राख लेने वाली एजेंसी या ट्रांसपोर्टर को नहीं, बल्कि एनटीपीसी प्रबंधन को जानता है। उनके अनुसार एनटीपीसी से निकलने वाली फ्लाई ऐश का उचित निस्तारण सुनिश्चित करना और उसे निर्धारित स्थल तक पहुंचाना कंपनी की जिम्मेदारी है।
इसी आधार पर प्रथम दृष्टि में एनटीपीसी को जिम्मेदार मानते हुए कार्रवाई की गई है।
इस स्थिति ने जिम्मेदारी की पूरी श्रृंखला को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—राख एनटीपीसी से निकलती है, परिवहन एजेंसी करती है, उपयोग एनएचएआई परियोजना में होना है और बीच रास्ते में सरकारी जमीन पर डंपिंग हो जाती है, तो जवाबदेही आखिर किसकी है?
NHAI की निगरानी और भुगतान व्यवस्था भी जांच के दायरे में
अब मामले में एनएचएआई की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। सड़क निर्माण में निर्धारित मात्रा में फ्लाई ऐश का उपयोग होना है तो यह सुनिश्चित करने की व्यवस्था क्या है कि एनटीपीसी से जितनी राख रवाना हुई, उतनी ही राख निर्धारित स्थल तक पहुंची?
यदि चार ट्रकों में करीब 200 टन राख रास्ते में ही डंप की जा सकती है, तो यह जानना जरूरी हो जाता है कि गंतव्य स्थल पर पहुंचने वाली राख की मात्रा का सत्यापन कैसे किया जाता है।
ट्रांसपोर्टरों को भुगतान किस आधार पर किया जा रहा है? क्या प्रत्येक वाहन के लोडिंग पॉइंट से लेकर अंतिम गंतव्य तक पहुंचने का रिकॉर्ड रखा जा रहा है? क्या वाहन की आवाजाही और वास्तविक डिलीवरी की निगरानी की जा रही है? क्या निर्धारित स्थल पर पहुंची राख और परियोजना में वास्तविक उपयोग की मात्रा का मिलान किया जाता है?
इन सवालों के जवाब सामने आना जरूरी है, क्योंकि मामला केवल पर्यावरणीय उल्लंघन का नहीं, बल्कि राख के परिवहन और उसके उपयोग से जुड़ी निगरानी एवं भुगतान व्यवस्था की पारदर्शिता से भी जुड़ा हुआ है।
90 लाख के जुर्माने के बाद असली परीक्षा जवाबदेही की
एनटीपीसी प्रबंधन द्वारा संबंधित एजेंसी को अनधिकृत स्थान से राख हटाने के निर्देश देना तत्काल सुधारात्मक कदम है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि इस स्थिति के लिए जिम्मेदार कौन था और उसके खिलाफ क्या कार्रवाई होगी।
क्या परिवहन एजेंसी ने निर्धारित शर्तों का उल्लंघन किया? क्या एनएचएआई की ओर से पर्याप्त निगरानी नहीं हुई? क्या एनटीपीसी से राख रवाना होने के बाद उसके अंतिम गंतव्य तक पहुंचने की पुष्टि की गई? और यदि पर्यावरण विभाग द्वारा लगाया गया 90 लाख रुपए का जुर्माना एनटीपीसी को भुगतना पड़ता है, तो क्या यह राशि संबंधित एजेंसी से वसूल की जाएगी?
फिलहाल एनटीपीसी ने एजेंसी पर अनधिकृत डंपिंग की जिम्मेदारी डालते हुए राख तत्काल हटाने और उससे जुड़े खर्च तथा संभावित आर्थिक दायित्व एजेंसी द्वारा वहन किए जाने की बात कही है। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि सरकारी जमीन से राख कब तक हटती है, निर्धारित स्थल तक कितनी मात्रा पहुंचती है और इस पूरे प्रकरण में जिम्मेदारी तय करने के लिए एनटीपीसी व एनएचएआई की ओर से आगे क्या कार्रवाई की जाती है।
फ्लाई ऐश के पर्यावरणीय प्रबंधन में सिर्फ राख को उठाकर निर्धारित स्थल तक पहुंचाना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि उसकी पूरी ट्रैकिंग, मात्रा का सत्यापन और जिम्मेदारी तय करने की पारदर्शी व्यवस्था भी जरूरी है।
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