कोरबा

SECL समेत कोल इंडिया की खदानों में अब हर साल होगी कर्मचारियों की मेडिकल जांच, लेबर कोड के तहत बदलाव की तैयारी।

कोरबा (ट्रैक सिटी)। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) समेत कोल इंडिया लिमिटेड की अनुषंगी कंपनियों की खदानों में कार्यरत कोयला कर्मचारियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण बदलाव की तैयारी की जा रही है। खदानों में ब्लास्टिंग के दौरान उड़ने वाली कोयले की धूल के बीच काम करने वाले कर्मचारियों की अब हर पांच साल के बजाय प्रतिवर्ष मेडिकल जांच कराने का प्रस्ताव है। इससे गंभीर बीमारियों की समय रहते पहचान करने और कर्मचारियों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।

वर्तमान व्यवस्था के तहत कोयला कर्मियों की प्रत्येक पांच साल में चिकित्सा जांच का प्रावधान है। अब प्रस्तावित लेबर कोड के संभावित क्रियान्वयन को ध्यान में रखते हुए कोल इंडिया प्रबंधन स्वास्थ्य और सुरक्षा संबंधी व्यवस्था में बदलाव की तैयारी कर रहा है। प्रबंधन ने प्रस्तावित प्रावधानों को प्रस्तुति के माध्यम से सुरक्षा सलाहकार समिति की बैठक में यूनियन प्रतिनिधियों के समक्ष रखा है।

प्रस्तावित व्यवस्था में महिला कर्मचारियों की मेडिकल जांच महिला चिकित्सक अथवा महिला परिचारिका की मौजूदगी में कराने का प्रावधान भी शामिल है। इसके अलावा बचाव दल के प्रशिक्षित कर्मचारियों को भी सालाना मेडिकल जांच की सुविधा देने का प्रस्ताव है। कर्मचारियों के स्वास्थ्य संबंधी रिकॉर्ड को सुरक्षित और व्यवस्थित रखने के लिए CIL-MedEx डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किया जा रहा है। इसके माध्यम से चिकित्सा जांच, स्वास्थ्य अभिलेख और व्यावसायिक स्वास्थ्य निगरानी को डिजिटल स्वरूप दिया जाएगा।

प्रस्तावित श्रम व्यवस्था में दैनिक कार्यावधि आठ घंटे और साप्ताहिक अधिकतम कार्यावधि 48 घंटे रखने की बात कही गई है। इसके तहत सप्ताह में अधिकतम छह दिन काम लेने का प्रावधान प्रस्तावित है। वहीं, ओवरटाइम की अधिकतम सीमा एक तिमाही में 144 घंटे निर्धारित करने का प्रस्ताव है।

सालाना छुट्टी की पात्रता के नियमों में भी बदलाव प्रस्तावित है। वर्तमान व्यवस्था में भूमिगत खदानों के कर्मचारियों के लिए 190 दिन और अन्य कर्मचारियों के लिए 240 दिन की उपस्थिति के आधार पर पात्रता निर्धारित होती है। नई व्यवस्था में दोनों श्रेणियों के कर्मचारियों के लिए 180 दिन की उपस्थिति को आधार बनाने का प्रस्ताव है।

मेडिकल कॉलेज कोरबा के छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. शशिकांत भास्कर ने बताया कि खदानों और कोल बेल्ट क्षेत्रों में लंबे समय तक कोयले की धूल के संपर्क में रहने से सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। विशेषकर 50 वर्ष की आयु के बाद कर्मचारियों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। नियमित स्वास्थ्य जांच, आवश्यक परीक्षण और चिकित्सकीय परामर्श से बीमारियों की समय पर पहचान और बचाव में मदद मिल सकती है। निमोनिया से बचाव के लिए चिकित्सकीय सलाह के अनुसार टीकाकरण भी उपयोगी है।

प्रस्तावित व्यवस्था लागू होने पर SECL समेत कोल इंडिया की अनुषंगी कंपनियों में कार्यरत कर्मचारियों की स्वास्थ्य निगरानी को मजबूती मिल सकती है। हालांकि, सालाना मेडिकल जांच सहित अन्य प्रस्तावित प्रावधानों के अंतिम क्रियान्वयन की आधिकारिक पुष्टि के बाद ही इन्हें लागू व्यवस्था माना जा सकेगा।

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