कोरबा

कोयला डिस्पैच में आई कमी: डीएसपीएम की मालगाड़ी का एक्सल टूटा, दो दिन तक प्रभावित रहा ट्रैक।

कोरबा(ट्रैक सिटी)। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ताप विद्युत गृह (डीएसपीएम), कोरबा की कोयला आपूर्ति में उपयोग होने वाली 12 वैगन की मालगाड़ी का इंजन एक्सल टूटने से दो दिनों तक रेल ट्रैक प्रभावित रहा। कोरबा रेलवे स्टेशन के मानिकपुर साइडिंग-2 से कोयला लोड लेकर प्लांट की ओर जा रही मालगाड़ी के इंजन में यह तकनीकी खराबी आई। हालांकि, कम गति के कारण बड़ा हादसा टल गया और इंजन के अलावा किसी अन्य हिस्से को नुकसान नहीं पहुंचा। सीएसईबी प्रबंधन द्वारा मरम्मत कार्य पूरा किए जाने के बाद स्थिति सामान्य हो गई है।

जानकारी के अनुसार, घटना दो दिन पूर्व उस समय हुई, जब मालगाड़ी कोयला लेकर प्लांट की ओर जा रही थी। मालगाड़ी को चलाने के लिए सीएसईबी प्रबंधन डबल इंजन का उपयोग करता है। प्रत्यक्षदर्शी ट्रैकमैन के मुताबिक, मालगाड़ी लगभग 20 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही थी। यार्ड से आगे बढ़ते ही अचानक तेज आवाज हुई और मालगाड़ी रुक गई। इसके बाद लोको पायलट ने नीचे उतरकर मौके का निरीक्षण किया। जांच में इंजन के पिछले पहिए के पास लगा एक्सल टूटा हुआ पाया गया। इसके कारण इंजन का पहिया पटरी पर फंस गया और मालगाड़ी आगे नहीं बढ़ सकी।

घटना के बाद ट्रैक पर परिचालन प्रभावित हुआ। रेलवे से जुड़े एक अधिकारी के अनुसार, संबंधित मालगाड़ी और घटना वाला ट्रैक दोनों सीएसईबी प्रबंधन के अधीन हैं। ऐसे में इंजन की मरम्मत की जिम्मेदारी भी सीएसईबी प्रबंधन की थी। टूटे हुए एक्सल को बदलने और इंजन को दुरुस्त करने में तकनीकी कर्मचारियों को करीब ढाई दिन लगे। इस दौरान ट्रैक प्रभावित रहने से कोयला डिस्पैच की प्रक्रिया पर भी असर पड़ा।

बताया गया कि सामान्य स्थिति में जहां प्रतिदिन आठ रैक कोयले का डिस्पैच किया जाता है, वहीं प्रभावित अवधि में छह रैक ही भेजे जा सके। हालांकि, इस तकनीकी खराबी का बिजली संयंत्र के परिचालन पर कोई असर नहीं पड़ा।

डीएसपीएम कोरबा के मुख्य अभियंता संजीव कंसल ने बताया कि संयंत्र में कोयले का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। मालगाड़ी के इंजन का एक्सल टूटने की सूचना मिलने के बाद मरम्मत का कार्य शुरू कराया गया था, जिसे पूरा कर लिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस अवधि में भी प्लांट में कोयले की आपूर्ति सुचारू बनी रही और बिजली उत्पादन तथा संयंत्र के परिचालन में कोई बाधा नहीं आई।

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