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कोरबा

मात्र 05%मंहगाई भत्ता से शिक्षक संवर्ग मे आक्रोश- ओमप्रकाश बघेल

 

कोरबा/ 1 मई यानी मजदूर दिवस के दिन राज्य सरकार द्वारा 5% डीए की घोषणा की गई है जो आपके खबरों के मुताबिक कर्मचारियों के लिए बहुत बड़ा तोहफा है लेकिन सच्चाई इसके परे हैं , इस संबंध में मैं आपको बताना चाहूंगा कि डीए यानी महंगाई भत्ता वेतन का वह अभिन्न अंग है जो उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर केंद्र सरकार द्वारा हमेशा से कर्मचारियों को 1 जनवरी और 1 जुलाई को दिया जाता है , इसके लिए यह भी परिपाटी रही है कि केंद्र के साथ राज्य भी अपने कर्मचारियों को उसी अनुपात में महंगाई भत्ता देते आ रहा है लेकिन विगत कुछ समय से इस पर भी शासन -प्रशासन की नजर लग गई है । अब तक यह भी परंपरा रही है कि जब केंद्र की घोषणा के बाद राज्य सरकार घोषणा करती है तो उसी तिथि से महंगाई भत्ता को लागू किया जाता है जिस तिथि से केंद्र ने देने की घोषणा की होती है लेकिन अब एक अद्भुत और नई परिपाटी चल रही है जिसमें राज्य के कर्मचारी केंद्र से डीए में 12% पिछड़ गए हैं , जी हां , एक दो नहीं बल्कि 12% महंगाई भत्ता में पीछे होना अपने आप में कितना बड़ा धोखा है उसे आप आसानी से समझ सकते हैं । साथ ही विगत कुछ समय से जिस तारीख से DA की घोषणा हो रही है उसी तारीख से DA दिया जा रहा है यानी केंद्रीय कर्मचारियों को जिस तिथि से दिया गया गई उस दिनांक से हक देने की परंपरा को भी बंद कर दिया गया है जिससे सीधे तौर पर हजारों रुपए का एरियर्स का नुकसान राज्य के कर्मचारियों को हो रहा है । अगर आप इसकी सीधे गणना करेंगे तो जिस समय से (यानी विगत 3 सालों से) एक-एक कर्मचारी लाखों रुपए के नुकसान में है जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती क्योंकि सरकार एरियर्स राशि दे ही नहीं रही है । आर्थिक नुकसान की मार झेलने के बावजूद जब आप अपनी खबरों में हेडिंग में तोहफा शब्द लिखते हैं तो राज्य कर्मचारियों को ऐसा लगता है जैसे आप भी हमें तमाचा मार रहे हैं यह तो उसी प्रकार की बात हो गई कि कर्मचारियों का 3 महीने का वेतन रोक दिया जाए और दिवाली के समय उनके वेतन का भुगतान कर दिया जाए पर यह कहा जाए कि कर्मचारियों को बहुत बड़ी सौगात मिली। यह सौगात नहीं बल्कि कर्मचारियों का मूलभूत हक है जिसे छीना जा रहा है और जिस के विरोध में कर्मचारी मुखर है । हो सके तो अगली बार कम से कम महंगाई भत्ता को सौगात का नाम मत दीजिएगा आपसे विनम्र अनुरोध है क्योंकि यह सौगात नहीं बल्कि बढ़ती मंहगाई के बीच अपने रहन सहन एवं मूलभूत सुविधाओं को पूरा करने के लिए कर्मचारियों को राहत है जो की कर्मचारियों का हक है जो फिलहाल तो छीना जा रहा है ।

 

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