कोरबा

आयुर्वेद का चमत्कार,बिना ऑपरेशन ठीक हुआ मोतियाबिंद।

आयुर्वेद में है सभी अंगों की चिकित्सा- डॉ.नागेंद्र शर्मा।

कोरबा (ट्रैक सिटी)/ आयुर्वेद की चिकित्सा पद्धति को लेकर अक्सर यह धारणा है कि इसके परिणाम देर से मिलते हैं या गंभीर बीमारियों का पूर्ण उपचार संभव नहीं लेकिन छत्तीसगढ़ के कोरबा में एक बार फिर आयुर्वेद ने इस धारणा को तोड़ते हुए अद्भुत चमत्कार दिखाया है। यहां मोतियाबिंद से पीड़ित एक ऑटो चालक बिना किसी ऑपरेशन और चीरफाड़ के पूरी तरह स्वस्थ हो गया और उसकी आंखों की रोशनी लौट आई, जिससे उसने न केवल अपनी आजीविका बल्कि जीवन के प्रति भी नई दृष्टि प्राप्त की है।

कोरबा के ऑटो चालक मुन्ना साहू को जब आंखों में मोतियाबिंद की तकलीफ महसूस हुई और धुंधलापन बढ़ने लगा, तो उन्होंने नेत्र विशेषज्ञ से जांच करवाई. जांच में मोतियाबिंद की पुष्टि हुई और डॉक्टरों ने उन्हें ऑपरेशन करवाकर लेंस लगवाने की सलाह दी। मुन्ना साहू के लिए यह एक बड़ी चुनौती थी, क्योंकि आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण ऑपरेशन का खर्च उठाना उनके लिए मुश्किल था। ऐसी स्थिति में उन्होंने आधुनिक चिकित्सा के बजाय आयुर्वेदिक उपचार से एक बार परामर्श लेने का निर्णय लिया। और वे निहारिका कोरबा में प्रसिद्ध आयुर्वेदाचार्य नाड़ीवैद्य डॉ नागेंद्र नारायण शर्मा के पास पहुंचे। डॉ.नागेंद्र शर्मा ने उन्हें आयुर्वेद पर पूर्ण विश्वास रखने को कहा और पूरी तन्मयता से उनका इलाज शुरू किया। चिकित्सक के मार्गदर्शन और आयुर्वेदिक औषधियों के प्रभाव से कुछ ही दिनों में मुन्ना साहू के मोतियाबिंद की समस्या पूरी तरह ठीक हो गई। उनकी आंखों की रोशनी वापस आ गई और वह अब पहले की तरह सामान्य जीवन जी रहे हैं। साथ ही अपना ऑटो भी चला पा रहे हैं। नाड़ीवैद्य डॉ.नागेंद्र नारायण शर्मा ने बताया कि आयुर्वेद में शरीर के प्रत्येक अंग की चिकित्सा का संपूर्ण विवरण दिया गया है।

मोतियाबिंद के इलाज के लिए आयुर्वेदिक पंचकर्म के अंतर्गत अक्षितर्पण प्रक्रिया का प्रयोग किया गया। नाड़ीवैद्य डॉ.नागेंद्र नारायण शर्मा ने अक्षितर्पण के विषय मे बताते हुये कहा कि अक्षितर्पण एक प्राचीन और प्रभावी पंचकर्म चिकित्सा है, जिसमें आंखों के चारों ओर आटे का घेरा बनाकर उसमें शुद्ध घी और खास जड़ी-बूटियों से तैयार तरल पदार्थ को सावधानीपूर्वक कुछ समय के लिए डाला जाता है। यह प्रक्रिया आंखों को पोषण देती है, रक्त संचार में सुधार करती है और कई नेत्र रोगों जैसे मोतियाबिन्द, चश्मे के नंबर बढ़ने-घटने, दूर दृष्टि दोष, निकट दृष्टि दोष आदि में अत्यंत लाभकारी सिद्ध होती है। बिना किसी चीरफाड़ और जटिल ऑपरेशन के मोतियाबिंद जैसे गंभीर नेत्र रोग का ठीक हो जाना, वास्तव में आयुर्वेद की शक्ति का प्रत्यक्ष प्रमाण है। यह उन लोगों के लिए एक उम्मीद की किरण है, जो आधुनिक चिकित्सा के महंगे इलाज या ऑपरेशन से घबराते हैं या आर्थिक रूप से सक्षम नहीं हैं। कोरबा का यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद आज भी उतनी ही प्रासंगिक और प्रभावी है, जो कठिन से कठिन रोगों में भी चमत्कारिक परिणाम दे सकती है।

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