कोरबा/कटघोरा

करैत सांप के डसने से 3 साल के मासूम की मौत, परिवार में पसरा मातम

कोरबा/कटघोरा(ट्रैक सिटी)। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के कटघोरा क्षेत्र से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। कटघोरा की पुरानी बस्ती स्थित खालेपारा में रात के समय घर के अंदर सो रहे 3 वर्षीय मासूम की जहरीले करैत सांप के काटने से मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है, जबकि परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

जानकारी के अनुसार, कटघोरा मुख्य बाजार में खरीद-बिक्री का काम करने वाले विजय राज का 3 वर्षीय बेटा वाशु राज मंगलवार देर रात अपने घर के पूजा कक्ष में दादी और बहन के साथ सो रहा था। रात के दौरान एक जहरीला करैत सांप कमरे में घुस आया और बिस्तर पर सो रहे मासूम को डस लिया। सांप के काटते ही वाशु दर्द से जोर-जोर से रोने लगा। बच्चे की आवाज सुनकर दादी की नींद खुली। उन्होंने बिस्तर पर देखा तो वहां एक बड़ा करैत सांप मौजूद था। इससे पहले कि परिवार के लोग कुछ कर पाते, सांप अंधेरे का फायदा उठाकर घर के भीतर कहीं गायब हो गया।

घटना की जानकारी मिलते ही परिजनों ने स्नेक रेस्क्यू टीम को सूचना दी। रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची और काफी देर तक घर और आसपास के इलाके में सांप की तलाश करती रही, लेकिन उसका कोई पता नहीं चल सका। इधर, परिजन गंभीर हालत में मासूम को तत्काल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कटघोरा लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद बच्चे की हालत नाजुक देखते हुए उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया। लेकिन जहरीले करैत के जहर के तेजी से शरीर में फैल जाने के कारण इलाज के दौरान मासूम वाशु ने दम तोड़ दिया।

बताया जा रहा है कि विजय राज के दो बच्चे थे, जिनमें एक बेटा और एक बेटी शामिल हैं। इस हादसे में इकलौते बेटे की मौत से परिवार पूरी तरह टूट गया है। घर में मातम पसरा हुआ है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। घटना की जानकारी मिलने के बाद आसपास के लोग भी बड़ी संख्या में परिवार को सांत्वना देने पहुंच रहे हैं। बारिश के मौसम में करैत सहित अन्य जहरीले सांपों के रिहायशी इलाकों में निकलने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। ऐसे में विशेषज्ञ लोगों से रात के समय घर के दरवाजे और खिड़कियां बंद रखने, सोने से पहले बिस्तर की जांच करने तथा घर के आसपास साफ-सफाई बनाए रखने की अपील करते हैं। सांप के काटने की स्थिति में किसी भी तरह के घरेलू उपचार के बजाय मरीज को तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाना ही सबसे सुरक्षित उपाय माना जाता है।

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