कोरबा

“ट्रक में बैठकर आया ‘उड़ने वाला सांप’!”

कोरबा (ट्रैक सिटी)। टीपी नगर स्थित ट्रक स्टैंड में शुक्रवार को उस समय लोगों में कौतूहल पैदा हो गया, जब एक ट्रक चालक की नजर बेहद खूबसूरत और रंग-बिरंगे सांप पर पड़ी। सांप का रंग-रूप सामान्य सांपों से बिल्कुल अलग नजर आने पर चालक अनिल निषाद भी उसकी पहचान नहीं कर सके। उन्होंने तत्काल इसकी सूचना वन विभाग को दी। वन विभाग की सूचना पर RCRS (Reptile Care and Rescuer Society) की टीम मौके पर पहुंची और सांप की पहचान फ्लाइंग स्नेक (Flying Snake) के रूप में की।
फ्लाइंग स्नेक को आम बोलचाल में ‘उड़ने वाला सांप’ कहा जाता है, हालांकि यह वास्तव में पक्षियों की तरह उड़ता नहीं है। यह पेड़ों से छलांग लगाकर हवा में अपने शरीर को चपटा और चौड़ा करते हुए एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक ग्लाइड करता है। शरीर को लहराकर यह हवा में अपनी दिशा को नियंत्रित करता है और अपेक्षाकृत लंबी दूरी तक हवा में सफर कर सकता है।
हाइड्रोलिक मशीन के पास छिपा था सांप
बताया गया कि फ्लाइंग स्नेक एक ट्रक के पीछे लगे हाइड्रोलिक मशीन के पास बैठा हुआ था। यह स्थान रेस्क्यू के लिहाज से काफी चुनौतीपूर्ण था। सांप यदि ट्रक के किसी अन्य हिस्से या मशीनरी के भीतर चला जाता तो उसे सुरक्षित बाहर निकालना मुश्किल हो सकता था। मशीनरी के संचालन की स्थिति में उसके घायल होने का भी खतरा था।

सूचना मिलते ही RCRS के अध्यक्ष अविनाश यादव के साथ मनस, उमेश, सौम्य और अतुल मौके पर पहुंचे। टीम ने आवश्यक सावधानी बरतते हुए सांप को सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू किया।
वन विभाग के अधिकारियों को दी गई जानकारी
RCRS टीम ने मामले की जानकारी कोरबा वनमंडल अधिकारी जितेंद्र उपाध्याय को दी। उनके दिशा-निर्देश तथा उपवन मंडल अधिकारी सूर्यकांत सोनी के मार्गदर्शन में निर्धारित वन्यजीव रेस्क्यू प्रोटोकॉल का पालन करते हुए सांप को सुरक्षित बाहर निकाला गया।
धरमजयगढ़ से कोरबा तक ट्रक के साथ आया?
रेस्क्यू के बाद ट्रक चालक अनिल निषाद से जानकारी ली गई। उन्होंने बताया कि ट्रक सामान लेकर धरमजयगढ़, छाल और घरघोड़ा होते हुए कोरबा पहुंचा था। इस आधार पर संभावना जताई जा रही है कि सांप रास्ते में किसी स्थान से ट्रक पर चढ़ गया होगा और चलते ट्रक के साथ ही सफर करते हुए कोरबा पहुंच गया।
हालांकि सांप वास्तव में ट्रक पर किस स्थान से चढ़ा और उसने कितनी दूरी तय की, यह स्पष्ट नहीं है। इतना जरूर है कि समय रहते चालक की नजर इस असामान्य वन्यजीव पर पड़ गई और सूचना मिलने के बाद रेस्क्यू टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उसे सुरक्षित बचा लिया।
पेड़ों पर रहता है, हवा में करता है ग्लाइड
फ्लाइंग स्नेक Chrysopelea वंश से संबंधित वृक्षवासी सांप हैं। ये अपना अधिकांश समय पेड़ों पर बिताते हैं। पेड़ों के बीच आवाजाही के दौरान ये ऊंचाई से छलांग लगाकर शरीर को चपटा कर लेते हैं। शरीर की विशेष बनावट उन्हें हवा में लिफ्ट हासिल करने और नियंत्रित तरीके से ग्लाइड करने में मदद करती है।
इसी असाधारण क्षमता के कारण फ्लाइंग स्नेक दुनिया के सबसे रोचक वृक्षवासी सांपों में गिना जाता है। भारत में भी Chrysopelea वंश की प्रजातियां पाई जाती हैं। इनके शरीर पर दिखाई देने वाले आकर्षक रंग और पैटर्न इन्हें अन्य सामान्य सांपों से अलग पहचान देते हैं।
सुरक्षित प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया
रेस्क्यू के बाद सांप को सुरक्षित तरीके से उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया। इससे न केवल एक वन्यजीव की जान बची, बल्कि ट्रक की मशीनरी में उसके फंसने या किसी दुर्घटना में घायल होने की आशंका भी टल गई।

वन विभाग एवं RCRS ने लोगों से अपील की है कि शहरी अथवा आवासीय क्षेत्र में कोई भी सांप या अन्य वन्यजीव दिखाई देने पर उसे पकड़ने, छेड़ने या मारने का प्रयास न करें। वन्यजीवों से दूरी बनाए रखें और तत्काल वन विभाग अथवा अधिकृत रेस्क्यू टीम को सूचना दें।
समय पर मिली सूचना वन्यजीव की जान बचाने के साथ-साथ लोगों को भी संभावित खतरे से सुरक्षित रख सकती है। वन्यजीव पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और उनकी सुरक्षा सामूहिक जिम्मेदारी है।

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