( अभिनव कदम उठाते हुये निगम ने अपने 05 प्रमुख उद्यानों को संचालन संधारण हेतु दिया है बैंकों को )
( उद्यानों में बैंकों के ब्रांडिंग बोर्ड दे रहे स्वच्छता व पर्यावरण संरक्षण का संदेश )
कोरबा (ट्रैक सिटी)/ नगर पालिक निगम कोरबा की ’’ इको-स्टेप ’’ बैंकर्स ग्रीन एप्रोच योजना से निगम के गार्डन ’’ ग्रीन हट ’’ बन रहे हैं, इन उद्यानों में तपती गर्मी के बीच ’’ ठंडे सुकून ’’ की तलाश में लोगों की भारी भीड़ जुट रही है, लोग सपरिवार घनी हरीतिमा व आक्सीजन से भरपूर वातातवरण में समय बिता रहे हैं, वाकिंग कर रहे हैं, योगा प्राणायाम कर स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं, वहीं इन उद्यानों में बैंकों द्वारा स्थापित ब्रांडिंग बोर्ड जहाॅं एक ओर स्वच्छता व पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते नजर आ रहे हैं, तो वहीं दूसरी ओर हरे भरे पेड़-पौधों व ठंडी घांस से आच्छादित उद्यान अपनी जीवन्तता प्रस्तुत कर रहे हंै, वर्तमान में इसका ताजा उदाहरण बना है, घंटाघर निहारिका मार्ग पर स्थित निगम का स्मृति उद्यान।
प्रभारी सचिव व महापौर ने किया था इको-स्टेप योजना का शुभारंभ- नगर निगम कोरबा की इस अभिनव योजना ’’ इको-स्टेप ’’ बैंकर्स ग्रीन एप्रोच का शुभारंभ 04 दिसम्बर 2025 को छत्तीसगढ़ शासन के प्रमुख सचिव एवं कोरबा जिला के प्रभारी सचिव रोहित यादव एवं महापौर श्रीमती संजूदेवी राजपूत के द्वारा किया गया था, इस योजना के तहत निगम के उद्यानोंके संधारण, संरक्षण व संचालन आदि की महती जिम्मेदारी विभिन्न बैंकों को दी गई थी, जिसके तहत यह प्रावधान रखा गया था कि बैंकर्स अपने सी.एस.आर. मद से इन उद्यानों कें संधारण संरक्षण व वहाॅं पर बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने का कार्य करेंगे तथा इसके बदले में वे उद्यानों में अपने ब्रांडिंग बोर्ड स्थापित कर अपनी ब्रांडिंग करेंगे तथा साफ-सफाई, स्वच्छता व पर्यावरण का संदेश भी इनके माध्यम से देंगे।
इन 05 उद्यानों को संधारण हेतु दिया गया था बैंकों को – नगर पालिक निगम कोरबा द्वारा अपने जिन प्रमुख 05 उद्यानों के संचालन, संधारण व संरक्षण हेतु विभिन्न 05 बैंकों को दिया गया था, उनमें एच.डी.एफ.सी. बैंक को स्मृति उद्यान, महाराष्ट्रा बैंक को पुष्पलता उद्यान, इंडियन ओवरसीज बैंक को साडा कालोनी शिव मंदिर उद्यान, आई.डी.एफ.सी. बैंक को महाराणा प्रताप उद्यान तथा स्टेट बैंक आफ इंडिया को रविशंकर नगर उद्यान की जिम्मेदारी दी गई है।
आयुक्त आशुतोष पाण्डेय ने अपनी पदस्थापना के समय से ही एक ओर जहाॅं शहर की स्वच्छता, साफ-सफाई, यातायात व्यवस्था, शहर सौदंर्यीकरण, अवैध कब्जों को दूर करने व शहर को व्यवस्थित करने की दिशा में धरातलीय स्तर पर ठोस कार्य प्रारंभ कराया था, वहीं दूसरी ओर शहर में हरीतिमा बिखेरने, ग्रीन कारिडोर तैयार करने, सड़क डिवाईडर व रोड साईट में पौधों को रोपण करने, उद्यानों को ग्रीन हट का स्वरूप देते हुये पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सुनियोजित कार्ययोजना के तहत कार्यवाही प्रारंभ कराई थी, आज एक ओर जहाॅ सम्पूर्ण शहर में इसके सकारात्मक परिणाम दृष्टिगोचर हो रहे हैं, हरीतिमा बिखर रही है, वहीं दूसरी ओर निगम के प्रमुख उद्यान ’’ ग्रीन हट ’’ का स्वरूप धारण कर रहे हैं। बुजुर्ग हो या जवान, बच्चे हो या महिलाएं सभी जन उद्यानों के बदले स्वरूप का लुत्फ उठा रहे हैं, परिणाम स्वरूप आज इन उद्यानों में तपती गर्मी के बीच ठंडे-ठंडे सुकून के लिये हरीतिमा युक्त वातावरण का लाभ उठाने के लिये सुबह-शाम लोगों की भीड़ जुट रही है, उद्यान गुलजार हो रहे हैं।
निगम को हो रही 50 लाख रू. की वार्षिक बचत-निगम द्वारा इन उद्यानों के संधारण, संरक्षण व संचालन हेतु प्रतिवर्ष 50 लाख रूपये का व्यय किया जाता था, अब इन उद्यानों की जिम्मेदारी बैंकों केा दिये जाने से निगम को प्रतिवर्ष लगभग 50 लाख रूपये की बचत हो रही है, तो वहीं दूसरी ओर उद्यानों की व्यवस्थाएं सुधरी हैं।

