बिना सूचना जेसीबी से खोदे गए गड्ढे, हर दुकान के सामने पेड़ लगाने की तैयारी से व्यापारी नाराज; पार्किंग, आवागमन और बिजली सुरक्षा पर उठाए सवाल
कोरबा (ट्रैक सिटी)। नगर पालिक निगम कोरबा द्वारा महानदी कॉम्प्लेक्स परिसर के सामने पौधारोपण की तैयारी को लेकर विवाद गहरा गया है। निगम की टीम ने बिना पूर्व सूचना और बिना व्यवसायियों से चर्चा किए जेसीबी मशीन से गड्ढों की खुदाई शुरू कर दी, जिसके बाद व्यापारियों ने इसका विरोध दर्ज कराया। आरोप है कि विरोध के बावजूद अधिकारियों ने काम नहीं रोका और अपनी कार्रवाई जारी रखी।
व्यवसायियों का कहना है कि महानदी कॉम्प्लेक्स के सामने पहले से ही बड़े-बड़े पेड़ मौजूद हैं। इन पेड़ों की शाखाएं कई बार बिजली के तारों से टकराने के कारण शॉर्ट सर्किट जैसी घटनाओं का कारण बनती रही हैं। इसके अलावा वाहन पार्किंग और ग्राहकों के आवागमन में भी काफी दिक्कत होती है। ऐसे में नई कतार में पेड़ लगाने का निर्णय उनकी समझ से परे है।
12×16 की दुकान, सामने एक पेड़
व्यापारियों के अनुसार निगम अधिकारियों ने लगभग हर 10 फीट की दूरी पर गड्ढे खोदे हैं। चूंकि अधिकांश दुकानों का आकार लगभग 12×16 फीट है, इसलिए लगभग हर दुकान के सामने एक पेड़ लगाने की योजना बनाई गई है। व्यवसायियों का कहना है कि इससे दुकानों की दृश्यता प्रभावित होगी, ग्राहकों के आने-जाने में बाधा आएगी और भविष्य में पार्किंग की समस्या और गंभीर हो जाएगी।
“जंगल काटकर सड़कें बन रही हैं, यहां दुकानों के सामने जंगल बसाने की तैयारी”
व्यापारियों ने निगम की कार्यशैली पर तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि एक ओर विकास कार्यों के नाम पर जंगलों की कटाई कर सड़कें बनाई जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर व्यावसायिक परिसर के सामने घने पौधारोपण की योजना बनाई जा रही है। उनका कहना है कि पर्यावरण संरक्षण आवश्यक है, लेकिन उसके लिए उपयुक्त स्थानों का चयन होना चाहिए, न कि ऐसे स्थान जहां लोगों के रोजगार और सार्वजनिक सुविधा पर असर पड़े।
बिना सहमति शुरू हुई खुदाई
व्यवसायियों का आरोप है कि निगम प्रशासन ने न तो किसी प्रकार की बैठक आयोजित की और न ही व्यापारियों को विश्वास में लिया। सीधे जेसीबी मशीन से खुदाई शुरू कर दी गई। उनका कहना है कि यदि पहले चर्चा होती तो कोई व्यवहारिक समाधान निकाला जा सकता था।
अधिकारियों पर ‘तुगलकी फरमान’ का आरोप
स्थानीय व्यापारियों ने निगम आयुक्त के निर्देशों को “तुगलकी फरमान” बताते हुए कहा कि बिना स्थानीय परिस्थितियों का आकलन किए हर 10 फीट पर गड्ढे खोदने का आदेश व्यावहारिक नहीं है। उनका आरोप है कि प्रशासन व्यवसायियों की समस्याओं और सुरक्षा संबंधी चिंताओं की अनदेखी कर रहा है।
जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर भी सवाल
इस पूरे मामले में क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों की चुप्पी भी चर्चा का विषय बनी हुई है। व्यापारियों का कहना है कि उनकी समस्याओं को लेकर अब तक किसी जनप्रतिनिधि ने खुलकर पक्ष नहीं रखा है। इससे व्यवसायियों में नाराजगी बढ़ रही है।
व्यापारियों की मांग
व्यवसायियों ने निगम प्रशासन से मांग की है कि पौधारोपण योजना पर पुनर्विचार किया जाए, पहले से मौजूद पेड़ों की स्थिति का तकनीकी मूल्यांकन कराया जाए तथा पार्किंग और आवागमन को प्रभावित किए बिना वैकल्पिक स्थानों पर पौधारोपण किया जाए। उनका कहना है कि पर्यावरण संरक्षण और जनसुविधा दोनों के बीच संतुलन बनाना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
(यदि निगम प्रशासन का पक्ष प्राप्त होता है, तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)

