कोरबा

महापौर का 16 माह का रिपोर्ट कार्ड: विकास के दावे, विपक्ष का पलटवार—’हकीकत दावों से अलग, जनता अब भी मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान’

कोरबा (ट्रैक सिटी)। नगर पालिक निगम कोरबा की महापौर श्रीमती संजू देवी राजपूत ने बुधवार को पंचवटी विश्रामगृह में आयोजित पत्रकार वार्ता में नई नगर सरकार के 16 माह के कार्यकाल का रिपोर्ट कार्ड प्रस्तुत करते हुए शहर में हुए विकास कार्यों और आगामी योजनाओं की जानकारी दी। वहीं, पत्रकार वार्ता के कुछ ही समय बाद कांग्रेस के विपक्षी पार्षदों ने संयुक्त बयान जारी कर महापौर के अधिकांश दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिन योजनाओं को वर्तमान नगर सरकार अपनी उपलब्धि बता रही है, उनमें से अधिकांश पूर्व कांग्रेस सरकार और तत्कालीन महापौर के कार्यकाल में स्वीकृत अथवा प्रारंभ की गई थीं।
महापौर संजू देवी राजपूत ने बताया कि पिछले 16 महीनों में नगर निगम ने शहर के समग्र विकास के लिए कुल 434 विकास कार्यों की योजना बनाई है। इनमें 76 कार्य पूर्ण हो चुके हैं, 149 कार्य प्रगति पर हैं, जबकि 209 नए कार्यों को शीघ्र प्रारंभ किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि हसदेव नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए लगभग 165 करोड़ रुपये की लागत से सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का निर्माण कराया जा रहा है, जिसे अगस्त 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस परियोजना के माध्यम से उपचारित जल एनटीपीसी को उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे नगर निगम को स्थायी आय का स्रोत भी प्राप्त होगा। इसके साथ ही 32 करोड़ रुपये की लागत से नए जल शोधन संयंत्र का निर्माण भी जारी है।
महापौर ने कहा कि शहर में सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक बनाने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री ई-बस सेवा के तहत 40 आधुनिक ई-बसें शुरू की गई हैं तथा विभिन्न स्थानों पर फास्ट ई-चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए गए हैं। स्वच्छता के क्षेत्र में कोरबा ने राष्ट्रीय स्तर पर 8वां स्थान प्राप्त किया है। शहर में 80 ई-रिक्शा के माध्यम से डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण किया जा रहा है तथा बायोगैस परियोजना के लिए एमओयू भी किया गया है।
खेल सुविधाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि कोरबा में पहली बार राइफल शूटिंग अकादमी की शुरुआत की गई है। वहीं प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के तहत लक्ष्य से अधिक 4027 आवास स्वीकृत कराकर नगर निगम ने प्रदेश में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है।
महापौर ने बताया कि कोसाबाड़ी से घंटाघर, सीएसईबी चौक होते हुए सुनालिया पावर हाउस तक लगभग 22 करोड़ रुपये की लागत से सड़क डामरीकरण कार्य जल्द शुरू होगा। साथ ही नगर निगम स्ट्रीट लाइट, पेयजल और स्वच्छता संबंधी शिकायतों का 24 घंटे के भीतर निराकरण सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य कर रहा है।
विपक्ष का पलटवार—’पुरानी योजनाओं का श्रेय लेने की कोशिश’
महापौर की पत्रकार वार्ता के बाद कांग्रेस के विपक्षी पार्षदों ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि नगर सरकार अपनी उपलब्धियों का जो दावा कर रही है, वह वास्तविकता से मेल नहीं खाता। उनका आरोप है कि जिन योजनाओं का उल्लेख रिपोर्ट कार्ड में किया गया है, उनमें से अधिकांश योजनाएं पूर्व कांग्रेस सरकार और तत्कालीन महापौर के कार्यकाल में स्वीकृत या प्रारंभ हो चुकी थीं।
विपक्षी पार्षदों ने कहा कि सिटी बस सेंटर की घोषणा लोकसभा चुनाव से पहले ही हो चुकी थी, जबकि सीवरेज परियोजना का टेंडर भी कांग्रेस शासनकाल में अंतिम चरण तक पहुंच चुका था। ऐसे में इन योजनाओं का श्रेय वर्तमान सरकार द्वारा लेना उचित नहीं है।
पानी, सफाई और शुल्क वृद्धि पर सरकार को घेरा
कांग्रेस पार्षदों ने आरोप लगाया कि कांग्रेस शासनकाल में घरेलू नल कनेक्शन निशुल्क उपलब्ध कराए जाते थे, जबकि वर्तमान में इसके लिए 3,500 से 7,500 रुपये तक की राशि वसूली जा रही है। वहीं 60 रुपये का पानी बिल बढ़ाकर 200 रुपये कर दिया गया है, जिससे आम नागरिकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा है।
सफाई व्यवस्था को लेकर भी विपक्ष ने सवाल उठाते हुए कहा कि नगर निगम ने सफाई का ठेका पहले की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक राशि में दिया है, लेकिन इसके बावजूद शहर की स्वच्छता व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा। उनका कहना है कि राष्ट्रीय स्वच्छता रैंकिंग का दावा किया जा रहा है, जबकि कई वार्डों में आज भी गंदगी और अव्यवस्था की स्थिति बनी हुई है।
सड़कों की बदहाली और विकास में भेदभाव का आरोप
कांग्रेस पार्षदों ने कहा कि कोरबा-कटघोरा, चांपा और कुसमुंडा मार्ग सहित शहर की कई प्रमुख सड़कें जर्जर स्थिति में हैं, जिससे आए दिन सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं। उन्होंने सड़क निर्माण कार्यों में गुणवत्ता सुनिश्चित करने और शीघ्र सुधार की मांग की।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस कार्यकाल में निर्मित उद्यानों और सामुदायिक भवनों का निजीकरण कर दिया गया है, जिससे आम नागरिकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ा है। विपक्ष का आरोप है कि विकास कार्यों में समानता नहीं बरती जा रही और कुछ वार्डों में करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, जबकि कई वार्ड विकास से पूरी तरह वंचित हैं।
पुरानी सिटी बसें, बिजली व्यवस्था और बढ़े बिलों पर भी सवाल
कांग्रेस पार्षदों ने कहा कि पुरानी सिटी बसें कंडम हालत में खड़ी हैं, इसके बावजूद नई ई-बस योजना शुरू की जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि पहले पुरानी बसों का उपयोग सुनिश्चित क्यों नहीं किया गया और जनता के धन का इस प्रकार उपयोग क्यों किया जा रहा है।
बिजली व्यवस्था को लेकर विपक्ष ने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय 400 यूनिट तक बिजली मुफ्त देने की योजना लागू थी, जबकि वर्तमान सरकार ने इसे 100 यूनिट तक सीमित कर दिया। साथ ही बिजली दरों में दो बार वृद्धि कर आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला गया है। उनका आरोप है कि हल्की हवा या बारिश होते ही शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बाधित हो जाती है, लेकिन व्यवस्था सुधारने की दिशा में कोई प्रभावी पहल नहीं की जा रही।
जनता के मुद्दों पर ध्यान देने की मांग
कांग्रेस पार्षदों ने कहा कि नगर निगम और सरकार को केवल उपलब्धियों के प्रचार तक सीमित रहने के बजाय सड़क, पेयजल, सफाई, बिजली और सभी वार्डों में समान विकास जैसे मूलभूत मुद्दों पर गंभीरता से काम करना चाहिए। उनका दावा है कि शहर की वास्तविक स्थिति सरकारी दावों से अलग है और आम जनता आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रही है।
इस प्रकार, महापौर द्वारा प्रस्तुत 16 माह का विकास रिपोर्ट कार्ड और उस पर विपक्ष की तीखी प्रतिक्रिया ने नगर निगम की कार्यशैली, विकास कार्यों के दावों तथा शहर की वास्तविक स्थिति को लेकर नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विकास योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर पर आम नागरिकों तक किस प्रकार पहुंचता है और विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों का नगर सरकार किस तरह जवाब देती है।

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