कोरबा (ट्रैक सिटी)। कोरबा में मानिकपुर ओपन कास्ट खदान के विस्तार को लेकर आज पर्यावरण जनसुनवाई आयोजित की गई। जनसुनवाई में करीब 500 लोग शामिल हुए। खदान की क्षमता 5 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 7 लाख मीट्रिक टन किए जाने का प्रस्ताव है। जनसुनवाई के दौरान लोगों ने खदान विस्तार के पक्ष और विपक्ष में अपनी बातें रखीं। वहीं प्रभावित ग्रामीणों ने पुराने विस्थापन और लंबित मामलों का निराकरण पहले करने की मांग उठाई। जनसुनवाई में लिखित रूप से 27 आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं, जबकि मौखिक आपत्तियों की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की गई है, जिसे रिकॉर्ड का हिस्सा बनाया जाएगा।
कोरबा में मानिकपुर ओपन कास्ट खदान के विस्तार की प्रस्तावित प्रक्रिया को लेकर पर्यावरण जनसुनवाई हुई। जनसुनवाई में बड़ी संख्या में ग्रामीण, प्रभावित परिवार और क्षेत्र के लोग मौजूद रहे।
प्रस्ताव के मुताबिक मानिकपुर खदान की उत्पादन क्षमता को 5 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 7 लाख मीट्रिक टन किया जाना है। इसी को लेकर लोगों से सुझाव और आपत्तियां ली गईं।
जनसुनवाई में कुछ लोगों ने खदान विस्तार का समर्थन करते हुए इसे क्षेत्र के विकास और रोजगार से जोड़कर देखा, तो वहीं कई लोगों ने पर्यावरण और विस्थापन से जुड़े मुद्दे उठाए।
जयसिंह अग्रवाल, पूर्व मंत्री, छत्तीसगढ़ शासन
पूर्व राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि वे विकास के विरोध में नहीं हैं, लेकिन प्रभावित परिवारों के अधिकारों की अनदेखी कर विकास नहीं होना चाहिए। उन्होंने जनसुनवाई को महज औपचारिकता नहीं बनाने और लंबित मामलों के समाधान के लिए ठोस कार्ययोजना सामने रखने की मांग की।
वहीं, प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि नए विस्तार से पहले पुराने विस्थापन से जुड़े लंबित मामलों का निराकरण किया जाना चाहिए।
जनसुनवाई के दौरान पर्याप्त समय नहीं दिए जाने की शिकायत भी कुछ लोगों ने की। हालांकि प्रशासन का कहना है कि जनसुनवाई सुबह 11 बजे शुरू हुई और सभी लोगों को अपनी बात रखने का अवसर दिया गया।
देवेंद्र पटेल, एडिशनल कलेक्टर, कोरबा
जनसुनवाई में कुल 27 लिखित आपत्तियां प्राप्त हुई हैं। इसके अलावा लोगों द्वारा मौखिक रूप से रखी गई आपत्तियों और सुझावों की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की गई है। प्रशासन के मुताबिक मौखिक आपत्तियों को भी दर्ज कर आगे की प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा।
इधर छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना ने पर्यावरण संरक्षण मंडल के क्षेत्रीय अधिकारी को पत्र सौंपकर 13 मांगें रखी हैं। संगठन और प्रभावित ग्रामीणों की प्रमुख मांग है कि मानिकपुर खदान के प्रस्तावित विस्तार से पहले पुराने विस्थापन और पुनर्वास से जुड़े लंबित मामलों का समाधान किया जाए।
मानिकपुर खदान विस्तार को लेकर हुई इस जनसुनवाई में जहां विकास और रोजगार के पक्ष में आवाजें उठीं, वहीं प्रभावित परिवारों ने विस्थापन, पर्यावरण और लंबित मामलों को लेकर अपनी चिंताएं सामने रखीं। अब जनसुनवाई में दर्ज लिखित और मौखिक आपत्तियों को प्रक्रिया में शामिल कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

