कोरबा (ट्रैक सिटी)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे सेवा संकल्प अभियान के तहत शिक्षा विभाग द्वारा जरूरतमंद विद्यार्थियों के लिए पुस्तक एवं शैक्षणिक सामग्री जुटाने के उद्देश्य से शिक्षा दान रथ संचालित किया जा रहा है। अभियान के बीच शिक्षकों से 200 रुपये सहयोग राशि लेने संबंधी संदेश सामने आने के बाद मामला चर्चा में आ गया है। हालांकि शिक्षा विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि शिक्षकों से 200 रुपये लेने के संबंध में कोई आदेश जारी नहीं किया गया है।

मामले की शुरुआत पाली विकासखंड के नुनेरा संकुल से जुड़े शिक्षकों के बीच प्रसारित एक संदेश से हुई। संदेश में संस्था के शिक्षकों से शिक्षा दान के नाम पर 200 रुपये लेने की बात कही गई। इसी तरह पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड के सिंघिया संकुल से जुड़े टीचर्स व्हाट्सएप ग्रुप में 24 सितंबर को प्रसारित संदेश में प्रत्येक संस्था के प्रत्येक शिक्षक से 200 रुपये दान स्वरूप देने की बात लिखी गई थी।

संदेश में बताया गया था कि इस राशि से गरीब एवं अनाथ बच्चों के लिए कॉपी, पानी की बोतल, कंपास और टिफिन जैसी सामग्री खरीदी जाएगी। साथ ही संस्था प्रमुखों से अपने और अधीनस्थ शिक्षकों की राशि बैठक में लेकर आने की बात भी कही गई थी।
विभाग ने कहा- ऐसा कोई आदेश नहीं
मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि शिक्षा दान रथ के लिए शिक्षकों से 200 रुपये सहयोग राशि लेने का कोई अधिकृत आदेश जारी नहीं किया गया है। यानी व्हाट्सएप ग्रुप में प्रसारित संदेश विभागीय आदेश नहीं था।
वहीं, बिना अधिकृत आदेश के इस तरह की सूचना शिक्षकों के बीच प्रसारित किए जाने को विभाग ने गंभीरता से लिया है। मामले में संबंधित संकुल शैक्षिक समन्वयक को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
एक ही अभियान, दो तरह की तस्वीर
एक ओर शिक्षा दान रथ के माध्यम से जनभागीदारी से पुस्तक एवं सामग्री जुटाने की पहल को सकारात्मक कदम माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर शिक्षकों से निश्चित राशि लिए जाने का संदेश सामने आने से अभियान की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे। विभागीय स्पष्टीकरण के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि 200 रुपये की राशि लेने संबंधी कोई आधिकारिक निर्देश नहीं था।
अब कारण बताओ नोटिस के जवाब के बाद यह स्पष्ट होगा कि शिक्षकों के बीच 200 रुपये सहयोग राशि से संबंधित संदेश किस स्तर से और किस आधार पर प्रसारित किया गया था।
फिलहाल विभाग ने शिक्षकों से 200 रुपये लेने संबंधी किसी भी अधिकृत आदेश से इनकार कर दिया है और संबंधित संकुल शैक्षिक समन्वयक से जवाब तलब किया है।

