कोरबा

शिवाय हॉस्पिटल में 62 वर्षीय महिला की मौत, परिजनों ने इलाज में लापरवाही के लगाए गंभीर आरोप

कोरबा (ट्रैक सिटी)। नया बस स्टैंड टीपी नगर स्थित शिवाय हॉस्पिटल में 62 वर्षीय महिला सविता जायसवाल की इलाज के दौरान मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और ड्यूटी स्टाफ पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि अस्पताल में भर्ती कराने के बाद मरीज को एनआईवी सपोर्ट दिया गया, लेकिन रात के समय मरीज द्वारा बार-बार एनआईवी हटाए जाने के बावजूद उसके पास पर्याप्त निगरानी नहीं रखी गई। हालत बिगड़ने पर वेंटिलेटर लगाया गया और कुछ देर बाद उनकी मौत हो गई। हालांकि, अस्पताल प्रबंधन ने मरीज को गंभीर स्थिति में भर्ती किए जाने की बात कही है और मामले की पूरी रिपोर्ट देखने के बाद ही विस्तृत जानकारी देने की बात कही है।

कमर में दर्द के बाद कराया था अस्पताल में भर्ती

लालूराम कॉलोनी निवासी सुनील जायसवाल की पत्नी सविता जायसवाल को 4 अगस्त की रात कमर में तेज दर्द होने पर परिजन नजदीक स्थित शिवाय हॉस्पिटल लेकर पहुंचे। मृतका की बेटी सोनाली के अनुसार, भर्ती के बाद एक्स-रे और अन्य जांच कराई गई। चिकित्सकों ने रीढ़ की हड्डी में गैप होने की जानकारी दी और मरीज का ऑक्सीजन व ब्लड लेवल कम बताते हुए एनआईवी सपोर्ट पर रखा गया।

सोनाली का आरोप है कि रात के समय उनकी मां एनआईवी सपोर्ट बार-बार निकाल देती थीं, लेकिन ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ और चिकित्सकों ने पर्याप्त निगरानी नहीं रखी। उनका कहना है कि परिवार के सदस्यों को भी मरीज के पास जाने और चिकित्सकों से उचित जानकारी लेने में परेशानी हुई।

बिना जांच क्रिटिकल कंडीशन वाले फॉर्म पर हस्ताक्षर कराने का आरोप

सोनाली ने आरोप लगाया कि उनकी मां को भर्ती कराने के दौरान अस्पताल में पहले खाली फॉर्म पर हस्ताक्षर कराने का प्रयास किया गया। जब परिजनों ने फॉर्म में जानकारी दर्ज करने के बाद हस्ताक्षर कराने की बात कही, तब कथित तौर पर मरीज की स्थिति गंभीर बताने वाले दस्तावेज पर हस्ताक्षर कराए गए।

परिजनों का आरोप है कि यह प्रक्रिया बाद में अस्पताल प्रबंधन को जिम्मेदारी से बचाने के लिए की गई। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

वेंटिलेटर पर रखने के बाद हुई मौत

सोनाली के मुताबिक तीन दिनों तक इलाज चलने के दौरान मां की हालत लगातार बिगड़ती गई। उनका आरोप है कि एनआईवी हटाने के बाद मरीज के पास पर्याप्त समय तक स्टाफ मौजूद नहीं रहता था। स्थिति बिगड़ने पर चिकित्सकों ने उन्हें वेंटिलेटर पर रखा, लेकिन इसके कुछ ही समय बाद उनकी मौत हो गई।

परिजनों ने सवाल उठाया कि यदि मरीज एनआईवी बार-बार निकाल रही थी तो पहले से ही अन्य ऑक्सीजन सपोर्ट की व्यवस्था क्यों नहीं की गई।

चिकित्सकों से मिलने नहीं देने का भी आरोप

मृतका के पुत्र शिवम ने अस्पताल में तैनात बाउंसरों को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि जब वह अपनी मां की स्थिति जानने के लिए इलाज कर रहे चिकित्सकों से मिलना चाहते थे, तो कथित तौर पर बाउंसरों ने उन्हें चिकित्सकों से मिलने नहीं दिया।

शिवम ने सवाल उठाते हुए कहा कि अस्पताल मरीज और परिजनों को इलाज की जानकारी देने की जगह यदि बाउंसरों के माध्यम से बातचीत कराएगा तो यह व्यवस्था कितनी उचित है। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से पूरे मामले में जवाबदेही तय करने की मांग की है।

‘इलाज के नाम पर लूट का धंधा’—प्रदीप जायसवाल

मृतका के जेठ एवं पूर्व अनुविभागीय अधिकारी, जल संसाधन, प्रदीप जायसवाल ने भी अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सविता जायसवाल की मौत इलाज में लापरवाही के कारण हुई है। उनका आरोप है कि अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है और इलाज के नाम पर मरीजों से बड़ी राशि वसूली जा रही है।

7 अगस्त को हुई मौत, 8 अगस्त को अंतिम संस्कार

परिजनों के अनुसार सविता जायसवाल का 7 अगस्त को इलाज के दौरान निधन हुआ। इसके बाद 8 अगस्त 2026 को सुबह 11 बजे मोती सागरपारा मुक्तिधाम में उनका अंतिम संस्कार किया गया।

परिजनों ने कहा कि फिलहाल पूरा परिवार शोक में है, लेकिन वे मामले को लेकर आगे शिकायत और जांच की मांग करने की तैयारी में हैं। बेटी सोनाली ने आरोप लगाया कि अस्पताल ने मरीज को समय पर विशेषज्ञ चिकित्सक के पास रेफर नहीं किया और बाहर से विशेषज्ञ चिकित्सक भी नहीं बुलाए।

बिना लाइसेंस अस्पताल शुरू करने का आरोप

परिजनों ने शिवाय हॉस्पिटल के संचालन को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि 8 मार्च 2026 को टीपी नगर स्थित अस्पताल का उद्घाटन मंत्री के हाथों कराया गया, जबकि उस समय नर्सिंग होम एक्ट के तहत आवश्यक लाइसेंस नहीं लिया गया था।

हालांकि, अस्पताल के लाइसेंस एवं पंजीयन की वास्तविक स्थिति की आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभाग के रिकॉर्ड से ही हो सकेगी। इस संबंध में प्रशासन या स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई आधिकारिक जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई है।

अस्पताल संचालक ने कहा—मरीज गंभीर हालत में आई थीं

मामले में अस्पताल का पक्ष जानने के लिए शिवाय हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ. दिविक मित्तल से संपर्क किया गया। उन्होंने बताया कि सविता जायसवाल का इलाज उन्होंने स्वयं नहीं किया था। उनके अनुसार उपलब्ध जानकारी के आधार पर मरीज गंभीर स्थिति में अस्पताल पहुंची थीं तथा उनके लंग्स और किडनी में इंफेक्शन था।

डॉ. मित्तल ने कहा कि अस्पताल का काम मरीज की जान बचाना है। उन्होंने कहा कि मरीज की पूरी मेडिकल रिपोर्ट देखने के बाद ही मामले की विस्तृत जानकारी दी जा सकती है और फोन पर इसकी पूरी जानकारी देना संभव नहीं है। उन्होंने इसके लिए अस्पताल में आकर रिपोर्ट देखने की बात कही।

फिलहाल मामले में परिजनों के आरोप और अस्पताल प्रबंधन के जवाब के बीच वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। यदि स्वास्थ्य विभाग या प्रशासन द्वारा जांच कराई जाती है तो उससे इलाज की प्रक्रिया, अस्पताल की मान्यता/लाइसेंस, ड्यूटी स्टाफ की भूमिका और मरीज की मृत्यु के वास्तविक कारणों पर स्थिति साफ हो सकती है।

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