कोरबा (ट्रैक सिटी)। सावन माह में शिव पूजन का विशेष महत्व होता है । शिव मंदिरों में शिव भक्त पूजा अर्चना करने के लिए जाते हैं और जलाभिषेक करते हैं। कोरबा जिला मुख्यालय से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर ग्राम कनकी स्थित है। ग्राम कनकी छत्तीसगढ़ में कनकेश्वर धाम के नाम से प्रसिद्ध है। करतला विकासखंड अंतर्गत आने वाले कनकेश्वर धाम में आज रात से सावन के पहले सोमवार में भक्तों का भीड़ उमड़ेगा। बड़ी संख्या में पहुंचे शिवभक्त एवं कावड़ियों के द्वारा शिवलिंग का जलाभिषेक किया जाएगा। वैसे तो शिव की पूजा हमेशा की जाती है पर लोगों का मानना है कि सावन के महीने में शिव के जलाभिषेक करने से मनोकामना जल्दी पूरी होती है।
जानते हैं कनकी धाम के बारे में
मंदिर से जुड़े लोगों का कहना है कि यह मंदिर तेरहवीं शताब्दी का है। पुरातत्व विभाग इसकी पुष्टि नहीं करता परंतु मंदिर की दीवारों और चौखटों पर पुरातात्विक मंदिरों तुमान, पाली जैसे सुंदर उकेरी गई आकृति देखने को मिलती है । मंदिर को छत्तीसगढ़ पुरातत्व विभाग द्वारा एक संरक्षित मंदिर का दर्जा प्राप्त हैं।

कैसे बना यह मंदिर
मंदिर निर्माण के इतिहास के बारे में स्थानीय लोग बताते है की एक काली गाय उफनती नदी को पार कर वन के बीच एक ही स्थान पर स्थित टीले पर प्रतिदिन दूध गिराने जाती थी। 1 दिन ग्वाला उस गाय का पीछा करते हुए उसी स्थान पर पहुंच गया जहां गाय रोज दूध गिरा दी थी । उसने देखा कि गाय यहां टीला पर दूध गिरा रही है ।वह गुस्से से गाय को डंडे से पीटने लगा कि यहां रोज आकर सारा दूध गिरा देती है और उसे घर में दूध नहीं मिल पाता।
ग्वाले ने गुस्से में आकर वहां प्रहार किया जहां पर गाय प्रतिदिन दूध गिरा देती थी। ग्वाले के प्रहार से वहां से कुछ टूटने की आवाज आई उस जगह चावल का टुकड़ा या कनकी का दाना पड़ा हुआ था। वहां से आने के बाद रात को भगवान शिव ग्वाले के सपनों में आए और बोले कि जिस जगह गाय रोज दूध गिर आती है उस जगह पर मैं विराजमान हूं तुम उस जगह जाओ और मेरी पूजा अर्चना करो .ग्वाला वहां पहुंचा और उसकी साफ सफाई करने लगा तो वहां एक शिवलिंग मिला जिसके कारण यहां एक मंदिर बनवाया गया और कनकी चांवल के दाने के आसपास होने के कारण इसे कनकेश्वर महादेव मंदिर कहा गया।
प्रतिवर्ष श्रावण मास एवं शिवरात्रि में यहां भव्य मेला लगता है जहां कोरबा सहित आसपास क्षेत्र एवं दूसरे राज्यों से हजारों की संख्या में महादेव के दर्शन के लिए भक्त आते हैं लोगों की सुरक्षा एवं देखभाल के लिए युवा संगठन कनकेश्वर सेवा समिति हमेशा आगे रहते हैं।
पाली महोत्सव जैसा भव्य आयोजन हो कनकी में भी
कनकी में आए श्रद्धालुओं की देखभाल एवं सुरक्षा के लिए युवा संगठन कनकेश्वर सेवा समिति कार्य करता है। समिति के लोगों का कहना है कि पाली में जैसा जिला प्रशासन भव्य आयोजन करता है वैसा ही कनकी में भी आयोजन करना चाहिए। पुरातत्व महत्व दोनों ही मंदिरों का समान है फिर प्रशासन भेदभाव क्यों करता है या समझ से परे है ?
मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद प्रशासन ने किया था दौरा
कुछ महिने पूर्व ही मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भेंट मुलाकात कार्यक्रम में करतला विकासखंड के ग्राम चिर्रा पहुंचे थे जहां से उन्होंने कनकी को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की बात की थी। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद प्रशासन की टीम ने वहां दौरा भी किया था और आवश्यक जानकारी जुटाई थी।

