कोरबा (ट्रैक सिटी) कोरबा जिला प्रशासन जनसंपर्क विभाग के माध्यम से अधिकृत तौर पर जारी की गयी एक जानकारी में बताया गया हैं कि विगत 28 दिसंबर 2024 को एक न्यूज पोर्टल में प्रकाशित समाचार का प्रशासनिक तौर पर उसे भ्रांति एवं अपुस्ट निरूपित करते हुए उसका खंडन किया हैं और कहा हैं कि विगत दिनों राज्य शासन से जारी प्रोटोकॉल का विधिवत परिपालन किया गया हैं यह भी बताया गया हैं कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित केंद्रीय सशक्त कमिटी के सदस्यों के कोरबा प्रवास के दौरान उनकी अगवानी में शासन द्वारा घोषित प्रोटोकॉल का पूरी तरह से परिपालन किया गया हैं साथ ही कार्यालय राज्य शिष्टाचार अधिकारी छत्तीसगढ़ द्वारा जारी पत्र क्रमांक 907/उसं /तारिख/ 2024 के तहत माननीय सदस्य द्वय को वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग का राजकीय अतिथि घोषित किया गया था।
उक्त पत्र के निर्देशों के तहत कलेक्टर/पुलिस अधीक्षक कोरबा को सदस्यों की सुरक्षा एवं कानून व्यवस्था सुनिश्चित करने हेतु निर्देशित किया गया था। प्रतिलिपि क्रमांक 1 के तहत वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को आवास, परिवहन सहित अन्य आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करने हेतु निर्देशित किया गया था।
यह भी बताया गया हैं कि बालको द्वारा 1804 एकड़ भूमि पर वन संरक्षण अधिनियम 1980 के उल्लंघन में किए गए अवैध कब्जे की जांच के लिए माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित केंद्रीय सशक्त कमिटी के सदस्य माननीय श्री चंद्र प्रकाश गोयल भारतीय वन सेवा (सेवानिवृत्त) तथा माननीय श्री सुनील लिमये भारतीय वन सेवा (सेवानिवृत्त) दो दिवसीय कोरबा प्रवास पर (दिनांक 26 दिसंबर तथा 27 दिसंबर 2024) को पहुंचे थे।
पत्र में जारी निर्देशों के अनुसार माननीय सदस्य द्वय के आगमन पर वनमण्डलाधिकारी कोरबा तथा जिला प्रशासन की ओर से अपर कलेक्टर कोरबा द्वारा उन्हें एनटीपीसी विश्राम गृह में उनकी अगवानी कि गयी। जिला प्रशासन द्वारा सुरक्षा एवं कानून संबंधी व्यवस्था सुनिश्चित कि गयी तथा वनमंडलाधिकारी के साथ समन्वय कर आवास तथा परिवहन की व्यवस्था प्रोटोकॉल शाखा द्वारा सुलभ कराई गयी।
उक्त प्रस्तावित बैठक जिसमें कलेक्टर एवं वनमण्डलाधिकारी दोनों उपस्थित होने वाले थे, उक्त बैठक की पूरी तैयारी जिला प्रशासन द्वारा सुनिश्चित की गई थी। बैठक से पहले वनमण्डलाधिकारी कोरबा के माध्यम से माननीय सदस्य द्वय को कलेक्टर के द्वारा अपने चेंबर में आमंत्रित किया गया था। माननीय सदस्य द्वारा सीधे ही मीटिंग कक्ष पहुंचकर यह सार्वजनिक आपत्ति व्यक्त की गई की कलेक्टर क्यों उनकी अगवानी करने नहीं आये।
आपत्ति व्यक्त कर माननीय सदस्य द्वय के द्वारा कलेक्टर को एनटीपीसी गेस्ट हाउस में बैठक हेतु निर्देशित किया गया। विश्राम गृह में पहुंचने के साथ ही माननीय सदस्य को यह अवगत कराया गया कि विभागीय अतिथियों को कलेक्टर द्वारा आगवानी करने के शासन से कोई निर्देश प्राप्त नहीं है, साथ ही जिले में ऐसी कोई परंपरा सुनिश्चीत नहीं रही है।
माननीय सर्वोच्च न्यायालय में उक्त प्रकरण में ओआईसी अपर कलेक्टर कोरबा है तथा उन्होंने एवं वनमण्डलाधिकारी ने महोदय को रिसीव किया तथा पूरे प्रवास के दौरान हुए महोदय के साथ थे।
छत्तीसगढ़ राज्य अतिथि नियम 2003 की श्रेणी चार की कंडिका 6 में यह स्पष्ट है कि विभागीय राज्य अतिथियों के लिए सभी प्रकार के प्रबंध एवं व्यय का वहन राज्य सरकार का संबंधित विभाग करेगा। साथ ही कलेक्टर द्वारा किन अतिथियों कि आगवानी कि जाएगी, इस संबंध में सुस्थापित परम्पराएं एवं निर्देश हैं, जिनका पालन सदैव होता रहा है।
प्रस्तावित मीटिंग में कलेक्टर द्वारा राज्य शासन के पक्ष को पूरी दृढ़ता से रखें जाने हेतु उचित तैयारी की गई थी। कलेक्टर के द्वारा दी गयी वस्तुस्थिति की जानकारी सुनने के बाद बैठक सौहाद्रता पूर्ण माहौल में संपन्न हुई तथा कमेटी के एक माननीय सदस्य द्वारा उक्त प्रकरण में शासन के हित में जिला प्रशासन की तैयारी की प्रशंसा की गई। उक्त बैठक में जिला प्रशासन के द्वारा 1804 एकड़ राजस्व वनभूमि पर बालको के कब्जे को अवैध माने जाने हेतु जिला प्रशासन ने केंद्रीय सशक्त कमेटी के माननीय सदस्य द्वय के समक्ष मजबूती से शासन का पक्ष रखा।
उपरोक्त तथ्यों के अतिरिक्त निजी न्यूज पोर्टल में प्रकाशित समाचार के हेडलाइन तथा अन्य सभी तथ्य मनगढ़ंत दुर्भावना पूर्ण तथा पूर्वाग्रह से ग्रसित है। जिसका जिला प्रशासन कोरबा खंडन करता है।
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