कोरबा

बाल विवाह के खिलाफ 100 दिवसीय अभियान तीन चरणों में धर्मगुरुओं, छात्रों और पंचायतों को दिलाई गई शपथ।

कोरबा (ट्रैक सिटी)/ कोरबा जिले में बाल विवाह के खिलाफ 100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान चलाया गया। भारत सरकार के केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की पहल पर यह अभियान गांवों और कस्बों में केंद्रित रहा। कोरबा लोकसभा क्षेत्र की सांसद ज्योत्सना महंत ने ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। इस मुक्ति रथ ने जिलेभर में भ्रमण किया और दूरस्थ पंचायतों तथा गांवों तक पहुंचा। अभियान से बड़ी संख्या में लोगों को जोड़ा गया।

रथ ने लोगों को बाल विवाह के स्वास्थ्य, शिक्षा और आजीविका पर पड़ने वाले दुष्परिणामों से अवगत कराया, साथ ही इसके कानूनी पहलुओं की जानकारी देते हुए समझाया कि बाल विवाह एक दंडनीय अपराध है। ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान के एक साल पूरे होने पर भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने 4 दिसंबर, 2025 को देशव्यापी ‘100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान’ की घोषणा की थी।

जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के सहयोगी संगठनों ने इस अभियान का नेतृत्व करते हुए देश के 439 जिलों में ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ निकाले। अभियान के दौरान यह संदेश दिया गया कि बाल विवाह कोई सामाजिक कुप्रथा नहीं, बल्कि विवाह की आड़ में बच्चों से बलात्कार है। इसे एक अपराध और कानूनन दंडनीय माना गया। बताया गया कि बाल विवाह किसी भी बच्ची के जीवन की संभावनाओं को खत्म कर देता है और उन्हें कुपोषण, अशिक्षा व गरीबी के दुष्चक्र में धकेल देता है।

तीन चरणों में चला अभियान

यह अभियान तीन चरणों में चला। पहले चरण में शैक्षणिक संस्थानों को जोड़ा गया, जबकि दूसरे चरण में धर्मगुरुओं से अनुरोध किया गया कि वे विवाह संपन्न कराने से पहले आयु की जांच करें और बाल विवाह कराने से इनकार करें। इसके अतिरिक्त, कैटरर्स, सजावट करने वालों, बैंक्वेट हॉल मालिकों और विवाह में सेवाएं देने वाले बैंड व घोड़ी वालों से भी बाल विवाह में अपनी सेवाएं न देने का आग्रह किया गया।

Editor in chief | Website |  + posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button