बिलासपुर

मरणासन्न कथन पर बिलासपुर रेंज की ऑनलाइन कार्यशाला, विवेचना में त्रुटि रोकने और सजा प्रतिशत बढ़ाने पर जोर

बिलासपुर (ट्रैक सिटी) राम गोपाल गर्ग के मार्गदर्शन में बुधवार को बिलासपुर रेंज स्तर पर “मरणासन्न कथन, कानूनी प्रक्रिया, सावधानियां और विवेचकों के लिए दिशा-निर्देश” विषय पर एक दिवसीय ऑनलाइन कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य गंभीर अपराधों की विवेचना को त्रुटिहीन बनाना तथा न्यायालयों में सजा का प्रतिशत (Conviction Rate) बढ़ाना था।

कार्यक्रम का संचालन भोजराम पटेल ने किया। इस अवसर पर शासकीय अधिवक्ता रजनीकांत ठाकुर को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।
कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए पुलिस महानिरीक्षक श्री गर्ग ने कहा कि अपराध विवेचना के दौरान पीड़ित का मृत्यु पूर्व कथन (Dying Declaration) तथा डीएनए एवं भौतिक साक्ष्यों का सही संकलन अपराधियों को सजा दिलाने की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी प्रक्रियागत त्रुटियों का लाभ आरोपी उठा लेते हैं, इसलिए विवेचकों को कानून सम्मत प्रक्रिया का पूरी गंभीरता से पालन करना चाहिए।

कार्यशाला में शासकीय अधिवक्ता ठाकुर ने भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA), 2023 की धारा 26 के अंतर्गत मरणासन्न कथन की कानूनी मान्यता और उसकी प्रमाणिकता पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कार्यपालिक दंडाधिकारी द्वारा प्रश्नोत्तर प्रारूप में दर्ज किया गया मृत्युकालिक कथन न्यायालय में अत्यंत महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जाता है।
प्रशिक्षण के दौरान विवेचकों को यह भी निर्देशित किया गया कि बयान दर्ज करने से पहले और बाद में डॉक्टर से पीड़ित के मानसिक रूप से स्वस्थ (Fit State of Mind) होने का प्रमाणपत्र लेना अनिवार्य है। प्रमाणपत्र के अभाव में उच्च न्यायालय द्वारा सजा पलटे जाने के मामलों का हवाला देकर अधिकारियों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई।
इसके अलावा अभियोजन अधिकारियों ने विवेचकों को चालान पेश करते समय कॉपी-पेस्ट से बचने, एफएसएल रिपोर्ट में रक्त समूह का मिलान सुनिश्चित कराने, एससी/एसटी एक्ट के मामलों में जातिसूचक शब्दों का स्पष्ट उल्लेख करने तथा गवाहों को कोर्ट में गवाही से पूर्व विधिक तैयारी कराने संबंधी महत्वपूर्ण सुझाव दिए।

कार्यशाला के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें अधिकारियों और कर्मचारियों ने विवेचना के दौरान आने वाली व्यावहारिक समस्याओं को रखा। इस दौरान प्रदर्शों की जब्ती, सैंपलिंग और साक्ष्य संकलन से जुड़ी जटिलताओं का समाधान विशेषज्ञों द्वारा बताया गया।

इस ऑनलाइन कार्यशाला में बिलासपुर रेंज के सभी जिलों से लगभग 200 पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल हुए। कार्यक्रम के समापन पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मुंगेली भोजराम पटेल ने आभार व्यक्त किया। वहीं पुलिस महानिरीक्षक राम गोपाल गर्ग ने सफल आयोजन के लिए प्रशिक्षक रजनीकांत ठाकुर को धन्यवाद देते हुए कहा कि इस प्रशिक्षण से विवेचना एवं साक्ष्य संकलन की गुणवत्ता में निश्चित रूप से सुधार होगा।

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