रायगढ़

सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों की ठगी का मास्टरमाइंड गिरफ्तार, फर्जी अंकसूची गिरोह का खुलासा।

कोरबा/रायगढ़ (ट्रैक सिटी)। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के निर्देशन में चलाए जा रहे “ऑपरेशन क्लीन हंट” थाके तहत सिटी कोतवाली पुलिस ने सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर फर्जी अंकसूचियों के जरिए लाखों रुपये की ठगी करने वाले मुख्य आरोपी विनोद कुमार राठौर (47) को कोरबा से गिरफ्तार कर बड़ी सफलता हासिल की है। लंबे समय से फरार चल रहे आरोपी को कोरबा से हिरासत में लेकर रायगढ़ लाया गया, जहां पूछताछ के बाद उसे धोखाधड़ी, कूटरचना और फर्जी दस्तावेजों के उपयोग से जुड़े मामले में गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया। इस मामले में इससे पहले दो अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।

पुलिस के अनुसार, वर्ष 2023 में भारतीय डाक विभाग द्वारा ग्रामीण डाक सेवकों की भर्ती प्रक्रिया के दौरान सक्ती निवासी नरेंद्र कुमार और जांजगीर-चांपा निवासी सोनम साहू ने आवेदन के साथ कक्षा 10वीं की फर्जी अंकसूचियां प्रस्तुत की थीं। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर दोनों का चयन रायगढ़ डाक संभाग के बर्रा और सुलेसा शाखा में ग्रामीण डाक सेवक (डाकपाल) पद के लिए हुआ था।

नियुक्ति से पहले दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान संबंधित अंकसूचियों की जांच तमिलनाडु बोर्ड से कराई गई, जिसमें स्पष्ट हुआ कि दोनों अंकसूचियां पूरी तरह फर्जी हैं और बोर्ड द्वारा कभी जारी ही नहीं की गईं। इसके बाद अधीक्षक डाकघर रायगढ़ की शिकायत पर सिटी कोतवाली थाना में धोखाधड़ी, कूटरचना एवं अन्य धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू की गई।

जांच के दौरान गिरफ्तार दोनों अभ्यर्थियों ने पुलिस को बताया कि उनकी पहचान कोरबा निवासी विनोद कुमार राठौर से हुई थी। आरोपी ने सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर तीन से साढ़े तीन लाख रुपये की मांग की थी। नरेंद्र कुमार ने आरोपी को ₹3.50 लाख का भुगतान किया, जबकि सोनम साहू ने नियुक्ति मिलने के बाद राशि देने की बात कही थी। आरोपी ने दोनों को फर्जी अंकसूचियां उपलब्ध कराईं, जिनका उपयोग भर्ती प्रक्रिया में किया गया। फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद दोनों की नियुक्तियां निरस्त कर दी गईं।

पुलिस जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी विनोद कुमार राठौर घटना के बाद से फरार था और लगातार ठिकाने बदलकर पुलिस से बचने का प्रयास कर रहा था। जांच के दौरान यह भी पता चला कि वर्ष 2013 में नकली नोट प्रकरण में उसे 10 वर्ष की सजा हो चुकी है। जेल से रिहा होने के बाद वह फिर से सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर लोगों से ठगी करने में सक्रिय हो गया था।

पुलिस को सूचना मिली कि आरोपी कोरबा में छिपा हुआ है। इसके बाद सिटी कोतवाली पुलिस की टीम ने योजनाबद्ध कार्रवाई करते हुए उसे कोरबा के शिवाजी नगर क्षेत्र से गिरफ्तार कर रायगढ़ लाया। पूछताछ में आरोपी ने फर्जी अंकसूचियां उपलब्ध कराकर नौकरी दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी करना स्वीकार किया।

इस कार्रवाई में थाना प्रभारी निरीक्षक सुखनंदन पटेल, उप निरीक्षक ऐनु देवांगन, सहायक उप निरीक्षक कोसो सिंह जगत, प्रधान आरक्षक मनोज मरावी तथा आरक्षक मुरली मनोहर पटेल की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

एसएसपी शशि मोहन सिंह ने कहा कि फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से सरकारी नौकरियां हासिल करने का प्रयास करने वालों तथा ऐसे गिरोहों के खिलाफ रायगढ़ पुलिस की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

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