6 साल की बच्ची की हत्या के मामले में विशेष POCSO कोर्ट का फैसला, DNA समेत वैज्ञानिक साक्ष्य बने अभियोजन की बड़ी ताकत
दुर्ग/कोरबा (ट्रैक सिटी)। दुर्ग जिले के मोहन नगर थाना क्षेत्र में छह साल की मासूम बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के मामले में विशेष POCSO कोर्ट ने दोषी उसके सगे चाचा को फांसी की सजा सुनाई है। करीब 17 महीने चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद 10 सितंबर 2026 को आए इस फैसले को मामले की गंभीरता और उपलब्ध वैज्ञानिक साक्ष्यों के मद्देनजर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि मृत्युदंड पर हाईकोर्ट की पुष्टि की न्यायिक प्रक्रिया अभी बाकी है।
कन्या पूजा के बीच गायब हुई मासूम
घटना 6 अप्रैल 2025 की बताई गई है। सुबह करीब 8 बजे छह वर्षीय बच्ची अपनी बुआ-दादी के घर पहुंची थी। घर में कन्या पूजा की तैयारियां चल रही थीं और परिवार की महिलाएं पूजा-पाठ व अन्य कार्यों में व्यस्त थीं। आरोप के मुताबिक, इसी दौरान घर में मौजूद 24 वर्षीय चाचा बच्ची को बहला-फुसलाकर मकान की छत पर बने अधूरे कमरे में ले गया।
पुलिस जांच के अनुसार वहां बच्ची के साथ यौन हिंसा की गई। इसके बाद आरोपी ने उसे मृत समझकर ठिकाने लगाने की कोशिश की। हालांकि उस समय बच्ची की सांसें चल रही थीं।
पड़ोसी की कार में छिपाया
पुलिस के मुताबिक आरोपी ने बच्ची को मोहल्ले में खड़ी पड़ोसी की पुरानी कार में छिपा दिया। जांच में यह बात सामने आई कि आरोपी को कार के खराब दरवाजे की जानकारी थी। पुलिस का आरोप है कि उसने इसी का फायदा उठाकर बच्ची को कार में छिपाया, ताकि जांच की दिशा कार मालिक की ओर मोड़ी जा सके।
दोपहर बाद बच्ची के घर नहीं लौटने पर परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। शाम करीब 4 से 5 बजे के बीच पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने CCTV फुटेज खंगालने के साथ कन्या भोज में मौजूद बच्चों से भी पूछताछ की। जांच में यह महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया कि बच्ची दादी के घर से दूसरे बच्चों के साथ बाहर निकली ही नहीं थी।
खोजबीन का दिखावा, कार के पास बार-बार पहुंचा
पुलिस के अनुसार आरोपी चाचा भी परिवार और पुलिस के साथ बच्ची की तलाश में शामिल रहा। इसी दौरान क्राइम ब्रांच के सिविल ड्रेस में तैनात जवानों ने उसकी गतिविधियों पर नजर रखी। बताया गया कि आरोपी बार-बार उसी पुरानी कार के पास जाकर उसे खोलकर देख रहा था।
इस संदिग्ध गतिविधि ने पुलिस का शक गहरा दिया। कार की तलाशी लेने पर बच्ची अचेत हालत में मिली। उसकी सांसें चल रही थीं। पुलिस ने तत्काल उसे अस्पताल पहुंचाया, लेकिन उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
DNA साक्ष्य बने अहम कड़ी
मेडिकल जांच में बच्ची के शरीर पर चोटों और यौन हिंसा के साक्ष्य सामने आए। पुलिस ने घटनास्थल और आरोपी के कपड़ों से मिले जैविक नमूनों की DNA जांच कराई। जांच में मिले DNA साक्ष्यों का मिलान अभियोजन के लिए महत्वपूर्ण साबित हुआ।
मामले की जांच के लिए 10 सदस्यीय SIT गठित की गई थी। पुलिस ने केवल आरोपी के कथित कबूलनामे पर निर्भर रहने के बजाय DNA, मेडिकल रिपोर्ट, घटनास्थल से मिले साक्ष्य और अन्य वैज्ञानिक जांच को केस का आधार बनाया।
कई गवाह मुकर गए, वैज्ञानिक साक्ष्य बने सहारा
सुनवाई के दौरान कुछ स्थानीय गवाह अपने पूर्व बयानों से मुकर गए। इसके बावजूद अभियोजन पक्ष ने वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर अपना पक्ष मजबूत बनाए रखा। पुलिस ने 9 मई 2025 को न्यायालय में चालान पेश किया। 26 मई 2025 को आरोपी के खिलाफ आरोप तय हुए और 11 जून 2025 से गवाहों के बयान दर्ज किए जाने की प्रक्रिया शुरू हुई।
करीब 17 महीने चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद 2 सितंबर 2026 को विशेष POCSO कोर्ट ने सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रखा। इसके बाद 10 सितंबर 2026 को अदालत ने आरोपी को दुष्कर्म और हत्या के मामले में दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई।
रंजिश के चलते दूसरे पर शक कराने की कोशिश
पुलिस जांच के मुताबिक आरोपी की कार मालिक से पुरानी रंजिश थी। आरोप है कि इसी रंजिश का फायदा उठाकर उसने बच्ची को पड़ोसी की कार में छिपाया, जिससे जांच की दिशा कार मालिक की ओर जा सके।
घटना के बाद इलाके में भारी आक्रोश फैल गया था। कार मालिक के घर और वाहन में तोड़फोड़ तथा आगजनी की घटना सामने आई थी। मोहन नगर थाने के घेराव के दौरान भी तनाव की स्थिति बनी थी।
कानूनी प्रक्रिया में मिली विधिक सहायता
घटना के बाद दुर्ग अधिवक्ता संघ ने आरोपी का केस नहीं लड़ने का निर्णय लिया था। हालांकि न्यायिक प्रक्रिया के तहत आरोपी को कानूनी सहायता उपलब्ध कराई गई और मुकदमा अदालत में चला।
फैसले के बाद भी प्रक्रिया पूरी नहीं: विशेष POCSO कोर्ट द्वारा सुनाई गई फांसी की सजा पर अभी हाईकोर्ट की पुष्टि की न्यायिक प्रक्रिया बाकी है। यानी अदालत का यह फैसला महत्वपूर्ण पड़ाव है, लेकिन मृत्युदंड के अंतिम क्रियान्वयन से पहले निर्धारित उच्च न्यायिक प्रक्रिया पूरी होना आवश्यक है।
बच्चों की सुरक्षा सिर्फ कानून नहीं, सतर्कता भी मांगती है
परिवार में बच्चों की गतिविधियों और उनके आसपास मौजूद लोगों को लेकर सतर्कता जरूरी है।
बच्चों को किसी परिचित व्यक्ति के साथ भी अकेले भेजने से पहले सावधानी बरतना जरूरी है।
किसी बच्चे के अचानक गायब होने पर तत्काल पुलिस को सूचना देना चाहिए।
ऐसे मामलों में शुरुआती जांच, CCTV, DNA और मेडिकल साक्ष्य बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
