रायपुर

सरकारी विभागों पर हजारों करोड़ का बिजली बिल बकाया, फिर गरीबों की जेब पर वसूली का बोझ क्यों?

 

रायपुर/कोरबा (ट्रैक सिटी)। छत्तीसगढ़ में बिजली बिल की वसूली को लेकर भाजपा सरकार की नीति पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रदेश कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि एक तरफ सरकारी विभागों पर बिजली कंपनी का बकाया लगातार बढ़ता जा रहा है और दूसरी तरफ आम गरीब, किसान, मजदूर, छोटे व्यापारी और मध्यमवर्गीय परिवारों से बिजली बिल की वसूली में सख्ती की जा रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार मार्च 2026 तक सरकारी विभागों पर लगभग ₹2,883.42 करोड़ का बिजली बिल बकाया था। जून 2026 तक की अनुमानित मांग जोड़ने पर यह राशि ₹3,432.64 करोड़ से अधिक होने की रिपोर्ट सामने आई है। सरकारी विभागों के बिजली कनेक्शनों की संख्या भी 1.65 लाख से अधिक बताई गई है।

प्रदेश कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सरकार के अपने विभाग बिजली कंपनी के हजारों करोड़ रुपये के बकायादार हैं, तब आम जनता पर वसूली का दबाव क्यों? 2025-26 में सरकारी विभागों ने लगभग ₹1,252 करोड़ की बिजली खपत की, लेकिन भुगतान केवल ₹814 करोड़ के आसपास हुआ, यानी लगभग ₹438 करोड़ की राशि बकाया रह गई।

प्रदेश कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि यह स्थिति सरकार की वित्तीय और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है। बिजली कंपनी को चलाने के लिए सरकार आम उपभोक्ताओं से समय पर भुगतान की अपेक्षा करती है, लेकिन सरकारी विभाग स्वयं समय पर भुगतान नहीं करते तो यह दोहरा मापदंड क्यों? गरीब से वसूली और सरकारी विभागों को छूट क्यों?

प्रदेश कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि कांग्रेस का स्पष्ट सवाल है कि जिस गरीब परिवार का बिजली बिल कुछ हजार रुपये बकाया होने पर कनेक्शन काटने की कार्रवाई की जाती है, उसके मुकाबले करोड़ों-अरबों रुपये के सरकारी बकाये पर इतनी सख्ती क्यों नहीं दिखाई जाती?

प्रदेश कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि क्या सरकार के विभागों के लिए अलग नियम और आम जनता के लिए अलग नियम हैं? सरकार ने सरकारी विभागों के पुराने बकाये को चार समान किस्तों में चुकाने की व्यवस्था की है। रिपोर्ट के अनुसार 30 जून 2026 तक के बकाये का भुगतान जुलाई-सितंबर 2026, अक्टूबर-दिसंबर 2026, जनवरी-मार्च 2027 और अप्रैल-जून 2027 की चार तिमाही किस्तों में किया जाना है। आम उपभोक्ताओं को भी किश्त की सुविधा दी जाये।

 

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