पुरानी बस्ती में आज भी जीवंत हैं राजघराने की विरासत और प्राचीन धार्मिक परंपराएं
कोरबा (ट्रैक सिटी)। छत्तीसगढ़ की ऊर्जा नगरी कोरबा आज बिजली उत्पादन और औद्योगिक विकास के लिए पूरे देश में अपनी पहचान रखती है। विशाल विद्युत संयंत्रों, कोयला खदानों और औद्योगिक गतिविधियों के कारण कोरबा का नाम देश के प्रमुख ऊर्जा उत्पादन केंद्रों में शामिल है। लेकिन आधुनिक विकास की इस पहचान के पीछे शहर का एक ऐतिहासिक अतीत भी है, जिसकी जड़ें पुरानी बस्ती से जुड़ी हुई हैं। कभी छोटे से कस्बे के रूप में पहचाना जाने वाला कोरबा समय के साथ औद्योगिक नगरी में तब्दील हो गया, लेकिन पुरानी बस्ती आज भी शहर के इतिहास, राजपरिवार की विरासत और धार्मिक आस्था की महत्वपूर्ण पहचान बनी हुई है।
पुरानी बस्ती में आज भी मौजूद हैं इतिहास के निशान
कोरबा की पुरानी बस्ती को शहर के ऐतिहासिक विकास से जोड़कर देखा जाता है। यहां राजघराने से संबंधित पुराने भवन और महल अतीत की याद दिलाते हैं। ब्रिटिश शासन काल के दौर से जुड़ी रियासती विरासत की छाप इस क्षेत्र में आज भी देखने को मिलती है। समय के साथ कोरबा का विस्तार हुआ और औद्योगिक विकास ने शहर का स्वरूप बदल दिया, लेकिन पुरानी बस्ती ने अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को काफी हद तक संजोकर रखा है।
इसी ऐतिहासिक क्षेत्र में स्थित रानी गेट धार्मिक आस्था और परंपरा का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, वर्तमान में जहां मां दुर्गा का मंदिर स्थित है, वहां पहले किले का मुख्य प्रवेश द्वार हुआ करता था। समय के साथ इस स्थान का स्वरूप बदलता गया और यह देवी आराधना के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित हो गया।
रानी गेट पर 45 वर्षों से हो रही मां दुर्गा की आराधना
पुरानी बस्ती स्थित रानी गेट में मां दुर्गा की पूजा-अर्चना की परंपरा पिछले 45 वर्षों से चली आ रही है। नवरात्रि के दौरान यहां विशेष धार्मिक आयोजन किए जाते हैं। श्रद्धालु माता के दर्शन कर पूजा-अर्चना करते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। नवरात्रि के नौ दिनों तक क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण बना रहता है।
यहां धार्मिक आयोजनों के साथ रावण दहन का कार्यक्रम भी आयोजित किया जाता है। इस आयोजन में स्थानीय लोगों की भागीदारी रहती है। इस तरह रानी गेट केवल देवी आराधना का केंद्र नहीं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक और सामाजिक परंपराओं से जुड़ा स्थल भी है। पीढ़ियों से चली आ रही धार्मिक गतिविधियों ने इस स्थान को पुरानी बस्ती की विशिष्ट पहचान प्रदान की है।
मां महामाया माई मंदिर में भी श्रद्धालुओं की गहरी आस्था
पुरानी बस्ती में मां महामाया माई का मंदिर भी श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। मंदिर में मां महामाया माई के साथ कंकालिन माता और कोसगाई माता की प्रतिमाएं भी विराजमान हैं। श्रद्धालु इन देवी स्वरूपों के दर्शन कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं। स्थानीय लोगों की धार्मिक मान्यताओं में इस मंदिर का विशेष स्थान है।
नवरात्रि के अवसर पर मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। यहां श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना के साथ माता के दरबार में पहुंचते हैं। धार्मिक परंपराओं और श्रद्धालुओं की आस्था के कारण यह मंदिर पुरानी बस्ती के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है।
मनोकामना ज्योति कलश प्रज्वलन और जवारा विसर्जन की परंपरा
मां महामाया माई मंदिर में नवरात्रि के दौरान मनोकामना ज्योति कलश प्रज्वलित कराने की परंपरा भी प्रचलित है। श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं के साथ ज्योति कलश स्थापित कराते हैं और पूरे नौ दिनों तक माता की आराधना करते हैं। नवरात्रि के दौरान मंदिर में धार्मिक अनुष्ठान और पूजा-पाठ का सिलसिला जारी रहता है।
नवरात्रि के नौवें दिन यहां जवारा विसर्जन का विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालु भक्तिभाव के साथ जवारा विसर्जन की परंपरा निभाते हैं। इस अवसर पर धार्मिक वातावरण के बीच माता के जयकारे गूंजते हैं। जवारा विसर्जन नवरात्रि की पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें श्रद्धालु अपनी आस्था और परंपराओं के अनुरूप भाग लेते हैं।
औद्योगिक विकास के साथ ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण भी जरूरी
कोरबा की पहचान आज ऊर्जा उत्पादन और औद्योगिक विकास के कारण देशभर में है, लेकिन पुरानी बस्ती जैसे ऐतिहासिक क्षेत्र शहर के अतीत की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। रानी गेट, मां महामाया माई मंदिर और यहां से जुड़ी धार्मिक परंपराएं कोरबा की सांस्कृतिक विरासत को सामने लाती हैं।
शहर के विकास के साथ ऐसी ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहरों का संरक्षण भी आवश्यक है, ताकि आने वाली पीढ़ियां कोरबा के पुराने स्वरूप, राजघराने से जुड़ी विरासत और वर्षों से चली आ रही धार्मिक परंपराओं से परिचित हो सकें। आधुनिक ऊर्जा नगरी की पहचान के बीच पुरानी बस्ती आज भी याद दिलाती है कि किसी शहर की वास्तविक पहचान केवल उसके औद्योगिक विकास से नहीं, बल्कि उसके इतिहास, संस्कृति और जनआस्था से भी बनती है।

