कोरबा

खरमोरा में TCR विक्रम धान का बेहतर प्रदर्शन, कम लागत में अधिक उपज की उम्मीद

किसान ने नहीं किया कीटनाशकों का छिड़काव, बीज निगम ने 115 से 120 दिन में पकने वाली किस्म को बताया उपयोगी

कोरबा (ट्रैक सिटी)। धान की खेती में बढ़ती लागत और सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता किसानों के सामने बड़ी चुनौती है। ऐसे में कोरबा जिले के ग्राम खरमोरा में किसान जगत सिंह कुशवाहा के खेत में लगाई गई TCR विक्रम धान की किस्म चर्चा में है। किसान का कहना है कि फसल में किसी प्रकार की बीमारी नहीं लगी और कीटनाशक व फफूंदीनाशक दवाओं का छिड़काव भी नहीं करना पड़ा। वहीं, कृषि विभाग और छत्तीसगढ़ राज्य बीज विकास निगम के अधिकारियों ने इस किस्म को कम अवधि में तैयार होने वाली धान की किस्म बताया है।

 

किसान जगत सिंह कुशवाहा के अनुसार, उन्होंने 2 जुलाई को बीज की बुआई की थी और 28 जुलाई को रोपाई कराई। फसल में गोबर खाद के साथ यूरिया और अन्य उर्वरकों का उपयोग किया। किसान ने बताया कि धान की बालियां चमकदार हैं और दाने का आकार मध्यम है। फसल में कीटनाशकों का प्रयोग नहीं करना पड़ा, जिससे दवाओं पर होने वाले खर्च की बचत हुई है। उन्होंने अगले वर्ष भी इसी किस्म की खेती करने की बात कही।

115 से 120 दिन में तैयार होने का दावा

ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी संजय पटेल ने बताया कि TCR विक्रम धान की किस्म इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित की गई है। उनके मुताबिक, यह किस्म लगभग 115 से 120 दिनों में पककर कटाई के लिए तैयार हो सकती है। इसमें सूखे की स्थिति सहन करने और कम पानी में बेहतर प्रदर्शन करने की क्षमता बताई गई है। खरमोरा के किसान के लगभग डेढ़ एकड़ के खेत में कीटों की उपस्थिति आर्थिक क्षति स्तर से नीचे रहने के कारण कीटनाशक और फफूंदीनाशक दवाओं के छिड़काव की आवश्यकता नहीं पड़ी। हालांकि, वास्तविक उपज का आकलन कटाई के बाद ही किया जा सकेगा।

बीज निगम ने जताई विस्तार की उम्मीद

छत्तीसगढ़ राज्य बीज विकास निगम के बीज प्रबंधक सी.पी. मिश्रा ने बताया कि पिछले वर्ष पोड़ी-उपरोड़ा और पाली विकासखंड के कुछ किसानों ने इस किस्म की खेती शुरू की थी। उनके द्वारा उत्पादित बीज के आधार पर इस वर्ष जिले के पांचों विकासखंडों में इसका विस्तार किया गया है। कृषि विभाग की राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (एनएफएसएम) योजना के तहत भी किसानों को बीज उपलब्ध कराया गया है।

मिश्रा के अनुसार, किसान के खेत में डेढ़ एकड़ में 35 से 40 क्विंटल उत्पादन मिलने का अनुमान है। इसके आधार पर उन्होंने प्रति हेक्टेयर लगभग 60 से 70 क्विंटल उपज की संभावना जताई। यह फिलहाल अनुमान है, वास्तविक उत्पादन की पुष्टि कटाई और उपज के आकलन के बाद ही होगी।

कृषि चौपालों के माध्यम से प्रचार-प्रसार

कृषि विभाग गांवों में कृषि चौपाल आयोजित कर किसानों को उन्नत किस्मों और वैज्ञानिक खेती की जानकारी दे रहा है। अधिकारियों का कहना है कि बीज का चयन स्थानीय जलवायु, खेत की स्थिति, सिंचाई की उपलब्धता और प्रमाणित उपज संबंधी आंकड़ों के आधार पर करना चाहिए। बीज निगम ने किसानों से सहकारी समितियों, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों और निगम के अधिकृत विक्रय केंद्रों से बीज की उपलब्धता एवं कीमत की जानकारी लेने की अपील की है।

खरमोरा में TCR विक्रम धान की फसल का प्रदर्शन किसानों के लिए उत्साहजनक है। हालांकि, इस किस्म की वास्तविक उत्पादकता, रोग प्रतिरोधक क्षमता और कम पानी में प्रदर्शन का आकलन कटाई के बाद प्राप्त आंकड़ों तथा वैज्ञानिक परीक्षणों के आधार पर करना महत्वपूर्ण होगा।

Editor in chief | Website | + posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button