जांजगीर-चांपा(ट्रैक सिटी)। साइबर ठगी के एक मामले में जांजगीर-चांपा पुलिस ने पंजाब से एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर टेलीकॉम अथॉरिटी, पुलिस और सीबीआई अधिकारी बनकर मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर 32 लाख रुपए की ठगी करने का आरोप है। पुलिस के मुताबिक, पीड़ित को 24 घंटे से अधिक समय तक डिजिटल अरेस्ट के नाम पर भयभीत रखा गया और पुलिस से सेटिंग कराने के नाम पर रकम अलग-अलग खातों में जमा कराई गई।
मामला साइबर थाना जांजगीर में अपराध क्रमांक 649/2025 के तहत धारा 318(4), 3(5) बीएनएस और 66डी आईटी एक्ट के तहत दर्ज किया गया था। गिरफ्तार आरोपी की पहचान शरणप्रीत सिंह उर्फ सन्नी सिंह (27), निवासी ग्राम बल्लोवाल, मेडिकल के पास, थाना जोधा, जिला लुधियाना, पंजाब के रूप में हुई है।
पुलिस के अनुसार, जांजगीर निवासी तुषारकर देवांगन ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके मोबाइल नंबर पर एक व्यक्ति ने टेलीकॉम अथॉरिटी अधिकारी बनकर फोन किया। फोन करने वाले ने बताया कि उनका मोबाइल नंबर मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में इस्तेमाल हुआ है और कोलाबा पुलिस स्टेशन में उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज है। इसके बाद कथित तौर पर सीबीआई अधिकारी बनकर फोन किया गया और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में डिजिटल अरेस्ट किए जाने की बात कही गई।
पीड़ित बुजुर्ग होने के कारण आरोपियों की बातों से डर गए। आरोपियों ने इसी भय का फायदा उठाते हुए पुलिस से सेटिंग कराने और गिरफ्तारी से बचाने के नाम पर उनसे 32 लाख रुपए की ठगी कर ली। इस दौरान अलग-अलग मोबाइल नंबरों से पुलिस, सीबीआई और टेलीकॉम अथॉरिटी के अधिकारी बनकर लगातार कॉल किए गए। कुछ समय बाद जब सभी मोबाइल नंबर बंद हो गए, तब पीड़ित ने अपने परिजनों को घटना की जानकारी दी और उन्हें ठगी का एहसास हुआ।
मामला दर्ज होने के बाद साइबर थाना पुलिस ने ठगी की रकम जिन बैंक खातों में पहुंची, उनकी तकनीकी जांच शुरू की। जांच में रकम का एक हिस्सा इक्विटास बैंक के खाते में जाना पाया गया। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस टीम गठित कर पंजाब रवाना की गई। पुलिस ने वहां आरोपी शरणप्रीत सिंह को अभिरक्षा में लेकर पूछताछ की। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में आरोपी ने अपराध स्वीकार किया और अपने खाते में ठगी की रकम प्राप्त होने की बात बताई।
आरोपी की निशानदेही और पेश करने पर पुलिस ने बैंक खाते से लिंक मोबाइल नंबर, आधार कार्ड, पैन कार्ड और घटना में इस्तेमाल मोबाइल हैंडसेट को गवाहों के समक्ष विधिवत जब्त किया। पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष पेश किया गया।
जांजगीर-चांपा पुलिस के अनुसार, साइबर जागृति अभियान के तहत साइबर ठगी के मामलों में लगातार कार्रवाई की जा रही है। पुलिस ने बताया कि पिछले दो महीनों में साइबर ठगी और उससे जुड़े मामलों में 17 आरोपियों की गिरफ्तारी की जा चुकी है।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ नाम की कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है। पुलिस या कोई जांच एजेंसी फोन या वीडियो कॉल के जरिए किसी व्यक्ति को डिजिटल अरेस्ट नहीं करती। यदि कोई व्यक्ति मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग्स सप्लाई या किसी अन्य अपराध का डर दिखाकर खुद को सीबीआई, पुलिस, टेलीकॉम अथॉरिटी, एयरपोर्ट, नेवी या किसी अन्य विभाग का अधिकारी बताकर पैसे मांगता है अथवा पैसे नहीं देने पर गिरफ्तारी की धमकी देता है, तो ऐसे झांसे में न आएं। तत्काल इसकी सूचना पुलिस को दें और साइबर ठगी से संबंधित मामलों में सतर्क रहे।
इस कार्रवाई में निरीक्षक भास्कर शर्मा, निरीक्षक अशोक वैष्णव, उप निरीक्षक विवेक सिंह, प्रधान आरक्षक मनोज तिग्गा, हेड कांस्टेबल विवेक सिंह और आरक्षक शाहबाज का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
