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महिला समूहों का गौठान में 30 लाख रूपये से अधिक का टर्नओवर, लगभग 12 लाख रूपये फायदा भी कमाया

पांच एकड़ रकबे में चटौद गौठान, लगभग 40 महिलाओं को मिला रोजगार

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TRACK CITY NEWS रायपुर जिले के आरंग जनपद क्षेत्र के चटौद ग्राम पंचायत में पांच एकड़ रकबे में सुसज्जित गौठान बनाया गया है। चार स्व-सहायता समूहों की लगभग 40 महिलाएं इस गौठान में वर्मी कम्पोस्ट बनाने, केचुआ उत्पादन, सब्जी उत्पादन, मुर्गी पालन, मशरूम उत्पादन के साथ-साथ हल्दी पाउडर बनाने के काम में लगी है। बीते साल इन महिलाओं ने अपनी मेहनत से 30 लाख रूपये से अधिक का व्यवसाय किया है और लगभग 12 लाख रूपये से अधिक का शुद्ध लाभ कमाया है। गौठान में काम कर रहें सीता महिला संगठन की अध्यक्ष श्रीमती गीता वर्मा ने बताया कि गौठान और गौधन न्याय योजना से गांवों में ही महिलाओं को रोजगार मिल रहा है। अपनी मेहनत से महिलाएं गौठानों में काम करके अतिरिक्त आमदनी भी पा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों में बढ़ोत्तरी हुई है। श्रीमती वर्मा ने बताया कि गौठानों से हो रही आय का उपयोग महिलाएं घरेलू जरूरतों की पूर्ति के साथ-साथ बच्चों की पढ़ाई-लिखाई में भी कर रही है।

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ग्राम पंचायत के चटौद के गौठान में चार महिला समूह सीता महिला संगठन, किरण स्व-सहायता समूह, एकता स्व-सहायता समूह और कल्याण स्व-सहायता समूह द्वारा आजीविका मूलक काम किए जा रहें है। गौठान में गोबर खरीदी का काम प्रतिदिन किया जाता है। गौठान में दो रूपये किलो की दर से अभी तक 7 हजार 670 क्विंटल गोबर की खरीदी की जा चुकी है। इसमें से 7 हजार 210 क्विंटल गोबर से 2 हजार 647 क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट बनाया गया है। बनाये गये वर्मी कम्पोस्ट में से 2 हजार 280 क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट किसानों और अन्य शासकीय संस्थाओं को बेंचकर महिलाओं को लगभग 23 लाख रूपये मिले है। 120 क्विंटल गोबर से 60 क्विंटल सुपर कम्पोस्ट भी गौठान में ही बनाया गया है। वर्मी कम्पोस्ट और सुपर कम्पोस्ट को बेंचकर महिला समूहों को लगभग 9 लाख रूपये का शुद्ध लाभ हुआ है। क्षेत्र में गौठान के वर्मी कम्पोस्ट की मांग बढ़ गई है। महिला समूह के सदस्य अब जैविक कीटनाशन भी बनाने लगी है। गौठान में उत्पादित केचुओं की मांग भी पूरे आरंग विकासखण्ड में है। आरंग विकासखण्ड के दूसरे गौठानों में केचुआ चटौद गौठान से ही दिए गये है। सीता महिला संगठन की 20 सदस्य चटौद गौठान में वर्मी कम्पोस्ट के साथ-साथ केचुआ उत्पादन के काम में भी लगी है। इन महिलाओं को कृषि विज्ञान केन्द्र रायपुर और कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा समय-समय पर प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन भी दिया जाता है। संगठन की महिलाओं कोे बीते साल केचुआ बेंचकर ही तीन लाख रूपये की आमदनी हुई है। गौठान में मुर्गी पालन का काम किरण स्व-सहायता समूह द्वारा किया जा रहा है। समूह ने अभी तक मुर्गी पालन से लगभग 50 हजार रूपये का लाभ कमा लिया है। एकता स्व-सहायता समूह ने गौठान की बाड़ी में सब्जी उगाकर लगभग 10 हजार रूपये की आय अर्जित की है। कल्याण स्व-सहायता समूह की महिलाएं गौठान में मशरूम उत्पादन और हल्दी पाउडर बनाने के काम में लगी है। इससे इन महिलाओं को लगभग 10 हजार रूपये की आमदनी हो चुकी है। गौठान में आने वाले पशुओं की स्वास्थ्य जांच, नश्ल सुधार एवं टेगिंग का काम भी पशुधन विकास विभाग द्वारा गौठान में ही किया जा रहा है। गौठान में पशुओं के लिए चारागाह भी बनाया गया है।

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