कोरबा

मानिकपुर जनसुनवाई स्थगित: श्रेय की राजनीति पर कांग्रेस का पलटवार

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कोरबा (ट्रैक सिटी)। मानिकपुर ओपन कास्ट परियोजना के विस्तार को लेकर 21 अगस्त को प्रस्तावित पर्यावरणीय जनसुनवाई स्थगित होने के बाद अब इसे लेकर राजनीतिक श्रेय की होड़ शुरू हो गई है। जिला कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश कुमार राठौर ने मंत्री एवं क्षेत्रीय विधायक लखनलाल देवांगन के 18 अगस्त के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मानिकपुर के प्रभावित ग्रामीण पूरे घटनाक्रम के प्रत्यक्ष गवाह हैं और वे जानते हैं कि उनकी आवाज किसने उठाई और किसने उन्हें निराश किया।
राठौर के अनुसार, 22 जुलाई को जनसुनवाई की अधिसूचना जारी होने के बाद प्रभावित आठ गांवों के ग्रामीण अपनी मांगों को लेकर मंत्री देवांगन से मिले थे। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि क्षेत्रीय विधायक एवं मंत्री होने के नाते वे उनकी समस्याओं को एसईसीएल प्रबंधन और प्रशासन के समक्ष मजबूती से रखेंगे। कांग्रेस का आरोप है कि ग्रामीणों को अपेक्षित सहयोग नहीं मिला।
राठौर ने सवाल उठाया कि यदि बाद में मंत्री की पहल से जनसुनवाई स्थगित हुई, तो 22 जुलाई से 17 अगस्त के बीच उनके द्वारा की गई ठोस पहल, पत्राचार और बैठकों का विवरण सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा है।
जयसिंह अग्रवाल की भूमिका का दावा
राठौर ने कहा कि पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने प्रभावित ग्रामीणों की समस्याओं को एसईसीएल के सीएमडी सहित संबंधित अधिकारियों के समक्ष उठाया। ग्रामीणों की लगातार लामबंदी और पत्राचार के बाद मामला प्रशासन के समक्ष गंभीरता से पहुंचा। इसके बाद कलेक्टर ने ग्रामीणों की मांगों और परिस्थितियों को देखते हुए जनसुनवाई स्थगित करने का निर्णय लिया, जिसका प्रकाशन 17 अगस्त को हुआ।
उन्होंने बरबसपुर में प्रस्तावित शराब दुकान और बालको प्रबंधन द्वारा लघु व्यवसायियों को हटाने के नोटिस के मामलों का भी उल्लेख किया। राठौर का आरोप है कि इन मामलों में भी पहले प्रभावित लोगों को अपेक्षित सहयोग नहीं मिला, जबकि बाद में जनदबाव और प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद समाधान की स्थिति बनी।
राठौर ने कहा कि बरबसपुर, बालको और अब मानिकपुर—तीनों मामलों में जनता की समस्या निर्णायक मोड़ पर पहुंचने के बाद राजनीतिक हस्तक्षेप का दावा सामने आया।
उन्होंने कहा कि यदि मंत्री को वास्तव में ग्रामीणों की चिंता है तो उन्हें श्रेय की राजनीति छोड़कर प्रभावित लोगों के बीच जाना चाहिए और उनकी लंबित मांगों के समाधान की लिखित गारंटी दिलानी चाहिए। राठौर ने कहा कि जनहित के संघर्ष का श्रेय बयान जारी करने से नहीं, बल्कि संकट के समय जनता के साथ खड़े होने से मिलता है।

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