रायगढ़(ट्रैक सिटी)। पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर रेंज राम गोपाल गर्ग ने रायगढ़ पुलिस की समीक्षा बैठक लेते हुए कानून व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और नवीन आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बदलते समय की चुनौतियों को देखते हुए पुलिसिंग को अधिक प्रोफेशनल, तकनीक आधारित और परिणाममुखी बनाने की जरूरत है।
मुख्यमंत्री के रायगढ़ प्रवास कार्यक्रम के सफल आयोजन के बाद पुलिस कंट्रोल रूम में आयोजित बैठक में आईजी राम गोपाल गर्ग ने जिले के सभी राजपत्रित अधिकारियों, थाना और चौकी प्रभारियों से अपराधों की स्थिति, विवेचना की गुणवत्ता और लंबित मामलों की समीक्षा की।
आईजी ने कहा कि भारत सरकार द्वारा नवीन आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन को लेकर राज्यों के प्रदर्शन की लगातार समीक्षा की जा रही है। ऐसे में प्रत्येक जिले को अपने कामकाज और डाटा की गुणवत्ता बेहतर बनानी होगी। उन्होंने निर्देश दिए कि सात वर्ष या उससे अधिक सजा वाले अपराधों में 90 दिन और अन्य अपराधों में एफआईआर दर्ज होने के 60 दिन के भीतर विवेचना पूरी कर चालान न्यायालय में प्रस्तुत किया जाए।
उन्होंने लंबित प्रकरणों की श्रेणीवार सूची तैयार कर प्राथमिकता के आधार पर उनका निराकरण करने के निर्देश दिए। सामान्य प्रकृति के अपराधों का अधिकतम आठ दिनों में निराकरण करने और गंभीर मामलों में एसडीओपी के मार्गदर्शन में गुणवत्तापूर्ण जांच सुनिश्चित करने को कहा।
ई-साक्ष्य और डिजिटल पुलिसिंग पर जोर
आईजी राम गोपाल गर्ग ने बैठक में ई-साक्ष्य संकलन, ऑडियो-वीडियोग्राफी, सीसीटीएनएस में समय पर एंट्री और डिजिटल सिग्नेचर के उपयोग को अनिवार्य रूप से लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने मेडिकल अनुरोधों को MedLEaPR पोर्टल के माध्यम से भेजने और न्यायालयीन मामलों में पुलिस कर्मियों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।
उन्होंने कहा कि तकनीक आधारित पुलिसिंग से अपराधों की जांच को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाया जा सकता है। इसलिए सभी अधिकारी डिजिटल माध्यमों का बेहतर उपयोग करें।
संपत्ति संबंधी अपराधों में तत्काल एफआईआर के निर्देश
संपत्ति संबंधी अपराधों को लेकर आईजी ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि चोरी, वाहन चोरी और अन्य मामलों में एफआईआर दर्ज करने में किसी भी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए। थाना प्रभारी स्वयं शिकायतों की निगरानी करें और वैधानिक शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई करें।
उन्होंने चोरी हुए वाहनों की बरामदगी के लिए ‘सशक्त ऐप’ का अधिकतम उपयोग करने, आदतन अपराधियों और गुंडा-बदमाशों पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए। साथ ही जमानत पर बाहर आए अपराधियों द्वारा दोबारा अपराध करने की स्थिति में उनकी जमानत निरस्त कराने के लिए न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत करने को कहा।
एनडीपीएस मामलों में जांच मजबूत करने के निर्देश
आईजी ने फरार आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई तेज करने और चालान पेश होने के बाद वारंट जारी कराने की प्रक्रिया में देरी नहीं करने के निर्देश दिए। उन्होंने शून्य मर्ग दर्ज होने पर संबंधित थाना क्षेत्र को तत्काल सूचना देने और महत्वपूर्ण साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के लिए प्रभावी कदम उठाने को कहा।
एनडीपीएस प्रकरणों की विवेचना को और मजबूत बनाने के लिए अधिकारियों और जांच अधिकारियों के नियमित प्रशिक्षण आयोजित करने के निर्देश भी दिए गए।
एसएसपी शशि मोहन सिंह ने दिया बेहतर पुलिसिंग का भरोसा
बैठक में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने आईजी को भरोसा दिलाया कि रायगढ़ पुलिस उनके निर्देशों का पूरी गंभीरता और प्रतिबद्धता के साथ पालन करेगी। उन्होंने कहा कि जिले में अपराध नियंत्रण, गुणवत्तापूर्ण विवेचना, नवीन कानूनों के क्रियान्वयन और तकनीक आधारित पुलिसिंग को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।
बैठक में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनिल सोनी, डीएसपी उन्नति ठाकुर, डीएसपी उत्तम प्रताप सिंह, डीएसपी सुशांतो बनर्जी, डीएसपी सतीश भार्गव, रक्षित निरीक्षक अमित सिंह सहित जिले के सभी थाना और चौकी प्रभारी मौजूद रहे।
