रायपुर/कोरबा (ट्रैक सिटी)। छत्तीसगढ़ में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता को लेकर चल रहे विवाद के बीच बुधवार को शिक्षक संगठनों और शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के बीच महत्वपूर्ण बैठक हुई। करीब आधे घंटे चली इस बैठक में कार्यरत शिक्षकों के लिए विभागीय स्तर पर TET आयोजित करने पर सहमति बनी है। शिक्षा मंत्री ने संबंधित अधिकारियों को विभागीय TET की प्रक्रिया तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
प्रस्तावित विभागीय TET सामान्य शिक्षक पात्रता परीक्षा से अलग होगी और इसमें केवल वर्तमान में कार्यरत शिक्षक ही शामिल हो सकेंगे। हालांकि, शिक्षक संगठनों ने स्पष्ट किया है कि उनकी मूल मांग अभी भी शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से पूरी तरह मुक्त करने की है।
25 अगस्त के आंदोलन के बाद हुई चर्चा
शिक्षक संगठनों के अनुसार, TET की अनिवार्यता सहित विभिन्न मांगों को लेकर 25 अगस्त को प्रदेशभर में आंदोलन किया गया था। आंदोलन के बाद सरकार की ओर से शिक्षक प्रतिनिधियों को चर्चा के लिए बुलाया गया। बुधवार दोपहर करीब 3 बजे शिक्षक नेताओं ने शिक्षा मंत्री से मुलाकात की।
बैठक में शिक्षक संघर्ष मोर्चा के प्रांतीय संचालक एवं संयुक्त शिक्षक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष केदार जैन, शालेय शिक्षक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष वीरेंद्र दुबे, टीचर्स एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष संजय शर्मा सहित विभिन्न शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
विभागीय TET की प्रक्रिया तैयार करने के निर्देश
बैठक के दौरान शिक्षक संगठनों ने TET को लेकर अपनी आपत्तियां और मांगें शिक्षा मंत्री के समक्ष रखीं। चर्चा के बाद शिक्षा मंत्री ने कार्यरत शिक्षकों के लिए विभागीय TET आयोजित करने पर सहमति जताई तथा अधिकारियों को इसकी प्रक्रिया तैयार करने के निर्देश दिए।
शिक्षक संगठनों ने इसे आंदोलन के बाद हुई सकारात्मक पहल बताया है। हालांकि संगठनों का कहना है कि विभागीय TET की व्यवस्था स्वीकार किए जाने के बावजूद उनकी प्रमुख मांग पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।
प्रांतीय अध्यक्ष केदार जैन ने कहा कि 25 अगस्त के आंदोलन का सार्थक असर हुआ है और इसी के बाद सरकार ने शिक्षक संगठनों को चर्चा के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि विभागीय TET को लेकर मिले आश्वासन का संगठन स्वागत करता है, लेकिन शिक्षकों को TET से पूरी तरह मुक्त रखा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षकों की अन्य मांगों पर भी शिक्षा मंत्री ने आगे सार्थक चर्चा का भरोसा दिया है।
सेवा, वेतन और पदोन्नति के मुद्दों पर भी चर्चा
बैठक केवल TET तक सीमित नहीं रही। शिक्षक संगठनों ने सेवा शर्तों, वेतन, पेंशन, पदोन्नति तथा भर्ती नियमों से जुड़े मुद्दे भी शिक्षा मंत्री के सामने रखे। संगठनों ने इन मांगों पर सरकार से आगे भी ठोस निर्णय लेने की अपेक्षा जताई है।
मोर्चा की पांच प्रमुख मांगें
1. TET से पूर्ण मुक्ति:
शिक्षक संगठनों की मांग है कि कार्यरत शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता से पूरी तरह मुक्त किया जाए। संगठनों का कहना है कि सेवा सुरक्षा और पदोन्नति के मामलों में TET की अनिवार्यता को समाप्त किया जाना चाहिए।
2. पूर्व सेवा का पेंशन लाभ:
शिक्षकों की पूर्व सेवा अवधि को जोड़कर पेंशन तथा अन्य सेवा संबंधी लाभ प्रदान किए जाने की मांग की गई है।
3. केंद्रीय वेतनमान का लाभ:
शिक्षकों को केंद्रीय वेतनमान के समान लाभ देने तथा वेतन विसंगतियों को दूर करने की मांग संगठनों ने रखी है।
4. भर्ती एवं पदोन्नति नियमों में संशोधन:
13 फरवरी 2026 को जारी भर्ती एवं पदोन्नति नियमों में शिक्षकों के हितों को ध्यान में रखते हुए आवश्यक संशोधन करने की मांग की गई है।
5. B.Ed. ब्रिज कोर्स:
शिक्षकों की सेवा एवं पदोन्नति से जुड़ी पात्रता पूरी करने के लिए ब्रिज कोर्स के माध्यम से B.Ed. की व्यवस्था करने की मांग भी प्रमुखता से रखी गई है।
आश्वासन से राहत, लेकिन संघर्ष जारी रखने के संकेत
बैठक के बाद शिक्षक संगठनों ने विभागीय TET को लेकर बनी सहमति का स्वागत किया है। हालांकि संगठनों ने यह भी स्पष्ट किया कि TET से पूर्ण मुक्ति समेत अन्य मांगों पर सरकार से चर्चा जारी रहेगी।
ऐसे में बुधवार की बैठक को सरकार और शिक्षक संगठनों के बीच संवाद की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि विभागीय TET की प्रक्रिया कब तक तैयार होती है और शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से पूर्ण छूट सहित अन्य मांगों पर सरकार क्या निर्णय लेती है।
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