कोरबा। कोरबा वनमंडल के करतला वन परिक्षेत्र अंतर्गत बीट लबेद के ग्राम सजापानी में मंगलवार सुबह हाथियों के झुंड के बीच एक नन्हे हाथी का जन्म हुआ। मादा हाथी द्वारा शावक को जन्म दिए जाने की सूचना मिलते ही वन विभाग का मैदानी अमला सतर्क हो गया। हाथियों के कुनबे और नवजात शावक की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी गई है। वन विभाग की ओर से आसपास के गांवों में लगातार मुनादी कराकर ग्रामीणों को जंगल की ओर नहीं जाने तथा हाथियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की समझाइश दी जा रही है। वहीं, हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए ड्रोन कैमरे की सहायता भी ली जा रही है।
वन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम सजापानी क्षेत्र में मंगलवार सुबह लगभग छह बजे मादा हाथी द्वारा शावक को जन्म दिए जाने की सूचना मिली। प्रातःकालीन गश्त और हाथी ड्यूटी पर तैनात वन कर्मचारियों को सबसे पहले इसकी जानकारी मिली। सूचना मिलने के बाद विभागीय अमला तत्काल सक्रिय हुआ और मौके की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा संबंधी उपाय शुरू किए गए। वन विभाग का कहना है कि इस समय सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य हाथियों के कुनबे को बिना किसी बाधा के प्राकृतिक वातावरण में रहने देना तथा ग्रामीणों को संभावित खतरे से बचाना है।
सुबह गश्त के दौरान मिली शावक के जन्म की जानकारी
करतला वन परिक्षेत्र के बीट लबेद स्थित ग्राम सजापानी के आसपास का जंगल हाथियों की आवाजाही वाला क्षेत्र है। मंगलवार सुबह नियमित गश्त और हाथी ड्यूटी के दौरान वन विभाग के कर्मचारियों को हाथियों के झुंड में एक नवजात शावक दिखाई देने की सूचना मिली। इसके बाद विभागीय स्तर पर स्थिति का आकलन किया गया और क्षेत्र में निगरानी की व्यवस्था मजबूत की गई।
जंगल में हाथियों के बीच शावक का जन्म वन्यजीवों के प्राकृतिक जीवन चक्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हाथियों के झुंड में नवजात शावक की मौजूदगी के दौरान विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है। जन्म के बाद शुरुआती समय में शावक अपनी मां और झुंड पर निर्भर रहता है। इस दौरान हाथियों का कुनबा सामान्य परिस्थितियों की तुलना में अधिक सतर्क रह सकता है। यदि कोई व्यक्ति अनजाने में झुंड के बहुत करीब पहुंच जाता है, तो उसके लिए खतरा उत्पन्न हो सकता है।
इसी बात को ध्यान में रखते हुए वन विभाग द्वारा ग्रामीणों को जंगल के आसपास अनावश्यक आवाजाही से बचने की सलाह दी जा रही है। विभागीय कर्मचारियों को क्षेत्र में हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखने और ग्रामीणों तक समय पर चेतावनी पहुंचाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
मां और नवजात शावक की सुरक्षा पर विशेष ध्यान
हाथी एक सामाजिक वन्यजीव है और उसका झुंड आपसी सहयोग के साथ रहता है। नवजात शावक की सुरक्षा में उसकी मां के साथ झुंड के अन्य हाथियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है। ऐसे समय में हाथियों के आसपास लोगों की भीड़ जुटना, तेज आवाज करना, उनका पीछा करना या उनके बहुत नजदीक जाने का प्रयास करना स्थिति को संवेदनशील बना सकता है।
वन विभाग का प्रयास है कि हाथियों को उनके प्राकृतिक आवास में शांतिपूर्वक रहने का अवसर मिले। इसके लिए वनकर्मियों द्वारा क्षेत्र की निगरानी की जा रही है और लोगों को सुरक्षित दूरी बनाए रखने की समझाइश दी जा रही है।
नवजात शावक को देखने की उत्सुकता में ग्रामीणों अथवा अन्य लोगों को जंगल की ओर जाने से बचना चाहिए। कई बार वन्यजीवों के दिखाई देने की सूचना मिलने पर लोग बड़ी संख्या में मौके पर पहुंच जाते हैं। इससे न केवल वन्यजीवों की प्राकृतिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं, बल्कि लोगों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, हाथियों के झुंड के नजदीक पहुंचकर फोटो या वीडियो बनाने का प्रयास भी जोखिमपूर्ण हो सकता है। मां हाथी अपने बच्चे की सुरक्षा को लेकर संवेदनशील रहती है। इसलिए किसी भी स्थिति में शावक के पास जाने, उसे छूने, रास्ता रोकने या झुंड को घेरने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
ड्रोन कैमरे से की जा रही निगरानी
हाथियों के कुनबे और नवजात शावक की सुरक्षा के लिए वन विभाग द्वारा ड्रोन कैमरे की सहायता से निगरानी की जा रही है। तकनीक के माध्यम से हाथियों की गतिविधियों का आकलन करने और उनकी स्थिति पर नजर बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है।
जंगल के भीतर हाथियों की आवाजाही पर निगरानी रखना कई बार चुनौतीपूर्ण होता है। घने वन क्षेत्र, झाड़ियों और प्राकृतिक अवरोधों के कारण जमीन से प्रत्येक गतिविधि को देख पाना आसान नहीं होता। ऐसे में परिस्थितियों के अनुरूप ड्रोन जैसी तकनीक निगरानी में सहायक हो सकती है।
हालांकि, ड्रोन का संचालन भी सावधानीपूर्वक किया जाना आवश्यक है, ताकि हाथियों और विशेषकर नवजात शावक को किसी प्रकार की परेशानी न हो। वन्यजीवों के आसपास किसी भी तकनीकी उपकरण का इस्तेमाल इस तरह किया जाना चाहिए कि उनकी प्राकृतिक गतिविधियों में अनावश्यक बाधा उत्पन्न न हो।
वन विभाग का मैदानी अमला क्षेत्र में मौजूद रहकर परिस्थितियों पर नजर बनाए हुए है। विभाग की प्राथमिकता है कि मां हाथी और उसका शावक सुरक्षित रहें तथा हाथियों की आवाजाही के दौरान ग्रामीणों को समय पर सतर्क किया जा सके।
आसपास के गांवों में मुनादी, ग्रामीणों को किया जा रहा सतर्क
हाथियों की मौजूदगी और नवजात शावक के जन्म की सूचना को ध्यान में रखते हुए वन विभाग द्वारा आसपास के गांवों एवं प्रभावित क्षेत्रों में मुनादी कराई जा रही है। ग्रामीणों को बताया जा रहा है कि वे जंगल की ओर जाने से बचें और हाथियों की गतिविधियों को लेकर सतर्क रहें।
वन क्षेत्रों के आसपास रहने वाले लोगों के लिए हाथियों की आवाजाही की जानकारी समय पर मिलना महत्वपूर्ण है। कई ग्रामीण जंगल पर दैनिक जरूरतों के लिए निर्भर रहते हैं। कुछ लोग जलाऊ लकड़ी, पत्ते, लघु वनोपज अथवा अन्य आवश्यक कार्यों के लिए जंगल जाते हैं। ऐसी परिस्थितियों में हाथियों की मौजूदगी वाले क्षेत्रों में जाने से पहले वन विभाग की चेतावनियों और स्थानीय सूचनाओं पर ध्यान देना आवश्यक है।
विभाग द्वारा लोगों को समझाइश दी जा रही है कि वे हाथियों के दिखाई देने पर उनके पास जाने या उन्हें भगाने का प्रयास न करें। यदि किसी स्थान पर हाथियों का झुंड दिखाई देता है, तो उसके आसपास भीड़ एकत्रित करने के बजाय सुरक्षित स्थान पर रहना चाहिए और वन विभाग को सूचना देनी चाहिए।
रात के समय विशेष सावधानी बरतना भी जरूरी है। ग्रामीणों को हाथियों की संभावित आवाजाही वाले रास्तों पर अनावश्यक रूप से जाने से बचना चाहिए। खेतों, पगडंडियों और जंगल से जुड़े मार्गों पर आवागमन करते समय स्थानीय चेतावनियों का पालन करना चाहिए।
हाथियों के प्राकृतिक व्यवहार को समझना जरूरी
हाथियों का जीवन जंगल के प्राकृतिक वातावरण, भोजन, पानी और झुंड की सामाजिक संरचना से जुड़ा होता है। मादा हाथी के शावक को जन्म देने के बाद शुरुआती समय में मां और बच्चे को शांत वातावरण की आवश्यकता होती है। इस दौरान मानवीय हस्तक्षेप से बचना वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।
नवजात हाथी सामान्य रूप से अपनी मां के निकट रहता है। शुरुआती दिनों में उसे चलने-फिरने और झुंड के साथ तालमेल बनाने में समय लग सकता है। झुंड के अन्य सदस्य भी उसकी सुरक्षा में सहयोग कर सकते हैं। ऐसे में हाथियों के रास्ते में बाधा उत्पन्न करना या उन्हें किसी दिशा में जाने के लिए मजबूर करना उचित नहीं है।
यदि हाथियों को किसी स्थान पर लोगों की भीड़, तेज आवाज या वाहनों की आवाजाही से परेशानी होती है, तो वे असहज हो सकते हैं। परिस्थितियों के अनुसार उनकी प्रतिक्रिया बदल सकती है। इसलिए लोगों को हाथियों के व्यवहार का अनुमान लगाकर उनके करीब जाने का जोखिम नहीं उठाना चाहिए।
वन विभाग द्वारा ग्रामीणों से अपील की गई है कि वे वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता बरतें। जंगल हाथियों का प्राकृतिक आवास है और वहां उनकी गतिविधियों को सुरक्षित रूप से जारी रहने देना जरूरी है।
मानव-हाथी सहअस्तित्व की दिशा में सतर्कता जरूरी
कोरबा जिले के वन क्षेत्रों में हाथियों की आवाजाही के दौरान मानव और वन्यजीवों की सुरक्षा एक महत्वपूर्ण विषय बना रहता है। जंगल के आसपास स्थित गांवों में रहने वाले लोगों और वन विभाग के बीच समन्वय से ऐसी परिस्थितियों में जोखिम को कम किया जा सकता है।
हाथियों की मौजूदगी वाले क्षेत्रों में सूचना का समय पर प्रसार, ग्रामीणों को जागरूक करना और विभागीय निगरानी बनाए रखना आवश्यक है। मुनादी के माध्यम से लोगों को सावधान करने का उद्देश्य यही है कि वे अनजाने में हाथियों के नजदीक न पहुंचें।
ग्रामीणों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि हाथियों की गतिविधियों की जानकारी मिलने पर उसे अपुष्ट रूप में फैलाने के बजाय संबंधित वन विभाग को सूचना दें। सोशल मीडिया पर स्थान और गतिविधि से जुड़ी जानकारी साझा करते समय भी सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि ऐसी सूचनाओं के कारण लोग हाथियों को देखने के लिए मौके पर पहुंच सकते हैं।
हाथियों के आसपास भीड़ जमा होने से स्थिति बिगड़ सकती है। इसलिए नवजात शावक को देखने के लिए जंगल में जाने या हाथियों का पीछा करने से बचना जरूरी है।
वन विभाग की अपील—निर्देशों का पालन करें
वन विभाग, कोरबा वनमंडल ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे धैर्य बनाए रखें और विभाग द्वारा जारी निर्देशों का पालन करें। हाथियों के कुनबे और नवजात शावक की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जंगल की ओर जाने से बचें तथा हाथियों से पर्याप्त दूरी बनाए रखें।
विभागीय अमला मौके पर मुस्तैद है और क्षेत्र की स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है। आसपास के गांवों में मुनादी के माध्यम से लोगों को सतर्क किया जा रहा है। ड्रोन कैमरे की सहायता से भी हाथियों की गतिविधियों पर निगरानी की जा रही है।
वन विभाग का उद्देश्य है कि मां हाथी और नवजात शावक सुरक्षित रहें तथा ग्रामीणों को भी किसी प्रकार की अनहोनी से बचाया जा सके। इसके लिए विभागीय निगरानी के साथ जनसहयोग भी महत्वपूर्ण है।
वन्यजीव संरक्षण केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी भी है। ग्रामीणों की सतर्कता, विभाग के निर्देशों का पालन और वन्यजीवों के प्राकृतिक व्यवहार का सम्मान ऐसी परिस्थितियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
ग्राम सजापानी के जंगल में मादा हाथी द्वारा शावक को जन्म दिए जाने की यह घटना वन्यजीवों के प्राकृतिक जीवन चक्र का हिस्सा है। वर्तमान में वन विभाग द्वारा सुरक्षा और निगरानी के उपाय किए जा रहे हैं। ऐसे में लोगों से अपेक्षा है कि वे उत्सुकतावश जंगल की ओर न जाएं, हाथियों को परेशान न करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि अथवा हाथियों की आबादी वाले क्षेत्र की जानकारी संबंधित वनकर्मियों तक पहुंचाएं।

